India TV की ओर से SHE कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस सान्या मल्होत्रा ने भी हिस्सा लिया। 'दंगल' से लेकर 'मिसेज' जैसी फिल्मों के जरिए अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकीं सान्या ने इवेंट के दौरान इंडिया टीवी के सवालों के खुलकर जवाब दिए और उन्होंने अपने फिल्मी करियर के बारे में भी खुलकर बात की। सान्या ने 2016 में 'दंगल' से अपना करियर शुरू किया और 'मिसेज' और 'कटहल' जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। इवेंट के दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों की चॉइस पर बात की और साथ ही साथ ये भी बताया कि उनके लिए ग्लैमर की परिभाषा क्या है।
सान्या मल्होत्रा ने अपने किरदारों और फिल्मों में अपने लुक पर बात करते हुए बताया कि उनके लिए ग्लैमर की असली परिभाषा क्या है। दंगल से लेकर मिसेज तक में अपने लुक पर बात करते हुए उन्होंने कहा- 'मुझे लगता है कि ये भी एक तरह का ग्लैमर है, वो सूट पहनना जो मैंने मिसेज में पहना। या फिर बाल कटवा देना दंगल के लिए। या फिर वो वर्दी, जिसे पहनकर आप बहुत पावरफुल फील करते हैं। ग्लैमर मेरे लिए सब्जेक्टिव था। मैं जब एक्टर बनी, मैंने शुरुआत ही दंगल से की। तो मेरे लिए ये जरूरी था कि मैं जब अपने किरदार में हूं तो वो दर्शकों को छुए। तो मेरे लिए ये कभी भी जरूरी नहीं था कि कैरेक्टर ग्लैमरस है या नहीं। मेरे लिए ये जरूरी था कि जब मैं किसी किरदार में हूं तो लोग मुझे उसी किरदार में देखें। कई बार मैं लोगों से मिलती हूं और वो कहते हैं कि आप जैसी फिल्मों में दिखती हैं, वैसी असल जिंदगी में नहीं लगतीं। तो ये मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लीमेंट है।'

सान्या मल्होत्रा ने फिल्मों के अपने चुनाव और फिल्म जगत के बारे में बात करते हुए कहा- 'अब ऐसी फिल्में बन रही हैं, जो महिलाओं को स्टोरी लीड करते दिखा रही हैं। बॉलीवुड और बेहतर हो सकता है और हम भी उसके लिए तैयार हैं। ओटीटी काफी बदलाव लेकर आया है। लोग वर्ल्ड सिनेमा देख रहे हैं। चेंजेस तो लगातार हो रहे हैं और मुझे लगता है कि वो बदलाव आ गया है और मुझे बहुत गर्व महसूस होता है कि मैं 'मिसेज' और 'कटहल' जैसी मीनिंगफुल फिल्मों का हिस्सा रही हूं।'
अपनी फिल्म मिसेज के बारे में बात करते हुए सान्या ने कहा- 'मेरी मम्मी से मुझे एक रियलाइजेशन होता था। मैं एक दिन दिल्ली आई और मेरा दिल्ली आने का एक कारण होता था कि मुझे राजमा चावल खाना है। लेकिन, उन दिनों मेरी मां बीमार थीं और वो मेरे लिए कुछ बना नहीं पाईं। मैं 2-3 दिनों के लिए ही आई थी। जैसे ही मैं वापस जाने लगी तो मेरी मम्मा इमोशनल हो गईं और कहने लगीं कि तुम इतनी दूर से आई हो और मैं तुम्हारे लिए कुछ बना भी नहीं पाई। मुझे बुरा लग रहा है। तब मैंने मम्मा से कहा कि 'मम्मा आपने मेरे लिए कुछ बनाया नहीं, इसका ये मतलब नहीं कि आप मुझसे कम प्यार करते हो। कोई बात नहीं कि आपने नहीं बनाया। मुझे अच्छा लगा कि आपने मेरे लिए कुछ बनाने से ऊपर अपना ध्यान रखना चुना।' तब मुझे एहसास हुआ कि हम महिलाओं पर कितना प्रेशर होता है।'
सान्या मल्होत्रा से जब डांस से लेकर फिल्मों तक के सफर पर सवाल किया गया तो अभिनेत्री ने बताया कि कैसे फिल्मों तक के सफर के चलते वह अपना ड्रीम हाउस खरीद पाईं। उन्होंने कहा- 'मेरे इस सफर में मेरे माता-पिता दोनों का साथ था। इस बीच मैं आपको कुछ बताना चाहूंगी। मैं इस हफ्ते मुंबई में अपने नए घर में शिफ्ट हो रही हूं। ये मेरे लिए ड्रीम हाउस था, क्योंकि जब भी मैं उस बिल्डिंग के आस-पास से गुजरती थी तो सोचती थी कि मैं एक दिन इस बिल्डिंग में घर लूंगी। लेकिन, ये बात और है कि उसी बिल्डिंग में एक बार मुझे घुसने नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि पहले आप पेपर दिखाईये, हम चेक करेंगे कि आप यहां घर खरीद सकती हैं या नहीं। मैं अपने पेरेंट्स को भी दिल्ली से मुंबई शिफ्ट कर रही हूं। मैं सोचती थी कि मैं अपने सपने पूरे कर पाऊंगी या नहीं।'
सान्या ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें मुंबई जाने की परमिशन दी थी। उन्होंने कहा- 'जब मैंने अपनी मम्मी से मुंबई जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि पहले पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करो और अपने पापा से जाकर पूछो कि तुम जा सकती हो या नहीं। मैं अपने पापा के पास गई और उनसे कहा कि पापा मुझे एक्ट्रेस बनना है। तो मेरे पिता ने कहा कि मैं तुम्हें बचपन से देखते आ रहा हूं सान्या। हर पीटीएम में तुम्हारी हर टीचर ने मुझे ये बोला है कि तुम बहुत अच्छी डांसर हो और तुम्हें डांसिंग और एक्टिंग में अपना करियर बनाना चाहिए। मुझे लगता है कि यही समय है कि तुम्हें मुंबई जाना चाहिए। मेरी मम्मी और मैं दोनों ही उनकी बात सुनकर हैरान थे। लेकिन, मेरी मम्मी तो काफी टेंशन में थीं, कि लोग क्या कहेंगे। लोग मेरी मम्मी से पूछते थे कि मैं क्या कर रही हूं।'
मुंबई में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए सान्या ने कहा- 'मेरे अपार्टमेंट में हम 6 लोग रहते थे। हम चार लोग हॉल में रहते थे और दो लड़कियां जो पहले से रह रही थीं वो रूम में रहती थीं। ये 2बीएचके अपार्टमेंट था। एक पॉइंट पर हम लोग उस अपार्टमेंट में हम 12 लोग थे। मेरे पास एक छोटा सा गद्दा था, जो मेरी एक फ्रेंड ने दिलाया था। मुझे पापा से मांगना अच्छा नहीं लगता था। मुझे दिखाना था कि मैं कमा सकती हूं, इसलिए मेरी दोस्त ने मुझे वो गद्दा दिलाया और हमारे बीच में 10-10 रुपये के लिए लड़ाई होती रहती थी, क्योंकि कोई भी कमा नहीं रहा था। आज के समय में भी हम साथ जुड़े हुए हैं और सभी कहीं न कहीं अच्छी जगह पर काम कर रहे हैं। कोई डायरेक्टर है, कोई किसी बड़े प्रोडक्शन हाउस से जुड़ा है।'
फिल्मी दुनिया में अपने सफर के बारे में बात करते हुए सान्या ने कहा- 'मैं स्ट्रगल शब्द से कभी रिलेट नहीं कर पाई। 10 साल पहले भी मुझे कभी ऐसा नहीं लगा, क्योंकि मुझे अपना ड्रीम पूरा करना था। ये मेरा लक्ष्य था और मुझे ये करना था। अब इसमें अगर मुझे कोई चैलेंज मिलता है तो ये मुझे उस लक्ष्य को पाने में मदद करता है। तो ये स्ट्रगल कैस हुआ? स्ट्रगल तब हुआ न जब आप कोई काम नहीं करना चाहते उसके बाद भी आपको ये करना पड़ रहा है। तो मैं हमेशा से ग्रेटफुल रही हूं कि मुझे जिंदगी ने ये मौका दिया कि मैं उस लक्ष्य को पा सकी। मैं जिद्दी हूं, लेकिन ऐसा नहीं है कि मैं कोई चीज पकड़कर बैठ जाती हूं। क्योंकि मुझे पता है कि अगर मेरे दिमाग में कुछ है तो मैं उसे पा लूंगी। आज नहीं तो कल मुझे वो मिल जाएगा, जो मैं चाहती हूं।'
दंगल में अपनी एंट्री के बारे में बात करते हुए सान्या ने कहा- 'अजीब सी बात है कि जब मैंने 'दंगल' का ऑडिशन दिया तो अपने रूम पर आई और अपनी रूममेट्स से कहा कि मुझे ये फिल्म मिल गई है। जबकि, तब तक मुझे ये फिल्म नहीं मिली थी। एक महीने तक मुझे किसी का कॉल तक नहीं आया, लेकिन फिर भी कहीं न कहीं मुझे पता था कि मुझे ये फिल्म जरूर मिलेगी। उन दिनों बहुत खबरें भी आ रही थीं कि इस एक्ट्रेस को ये रोल मिल गया है दंगल में। क्योंकि दंगल बहुत बड़ा प्रोजेक्ट था। करीब एक महीने तक इंतजार करने के बाद मैंने सोचा कि घर जाती हूं और अपनी मम्मी को सरप्राइज देती हूं। उस दिन मम्मी का बर्थडे था। तो मैं जैसे दिल्ली पहुंची, मुझे कॉल आया कि आप शॉर्ट लिस्ट हो गई हैं और आमिर सर और नितेश सर आपसे मिलना चाहेंगे। मैंने कहा - मैं तो दिल्ली में हूं, अपनी मम्मी को सरप्राइज करना चाहती हूं, तो प्लीज मुझे थोड़ा सा समय दीजिए। मैं 2 मार्च को वापस गई और फिर तीन महीने ऑडिशन दिए। एक्टिंग का ऑडिशन हुआ, रेसलिंग का ऑडिशन हुआ, ये देखने के लिए कि हम वो प्रेशर और ट्रेनिंग झेल पाएंगे या नहीं। मैं गीता और बबीता दोनों के लिए ऑडिशन दे रही थी। वहां पर सभी एक्टर्स के साथ मेरा कॉम्बिनेशन था। तो मुझे लगा कि इन्हें पता है कि मैं हूं तो मैं हूं फिल्म में। मुझे खुद पर इतना यकीन था कि ये कुछ भी हो जाए, मैं इस फिल्म में हूं।'
'मिसेज' के बारे में बात करते हुए सान्या ने कहा, 'मिसेज में ऋचा का किरदार शायद लोगों को समझ में नहीं आया। मेरे इंस्टाग्राम पर कमेंट्स में लिखा था, 'दो लोगों का खाना नहीं बना पाई।' लोगों को समझ नहीं आया; खाना बनाना समस्या नहीं थी, बल्कि सराहना न मिलना और विकल्प न होना समस्या थी। और मैं यह बात साफ कर देना चाहती हूं। खाना बनाना एक लाइफ स्किल है, लड़का हो या लड़की, सबको यह आना चाहिए। इसे किसी एक जेंडर तक सीमित न रखें।'
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