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ना जाने कौन आ गया रिव्यू: जतिन सरना का दमदार अभिनय, आज के दौर के रिश्तों की कड़वी सच्चाई पेश करती मॉर्डन लव स्टोरी

 Written By: जया द्विवेदी
 Published : Mar 05, 2026 05:04 pm IST,  Updated : Mar 05, 2026 05:05 pm IST

'ना जाने कौन आ गया' आधुनिक रिश्तों और प्रेम की जटिलताओं को गहराई से दर्शाती एक संवेदनशील फिल्म है। जतिन सरना के शानदार अभिनय और विकास अरोड़ा के परिपक्व निर्देशन ने कहानी को प्रभावी बनाया है।

Na Jaane Kaun Aa Gaya
न जाने कौन आ गया। Photo: PRESS KIT
  • फिल्म रिव्यू: ना जाने कौन आ गया
  • स्टार रेटिंग 3/5
  • पर्दे पर: 05/03/2026
  • डायरेक्टर: विकास अरोड़ा
  • शैली: रोमांटिक ड्रामा

फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ के ट्रेलर में लव, इमोशन्स, चीटिंग और लव ट्रायंगल को प्रमुखता से दिखाया गया था। लेकिन जब आप पूरी फिल्म देखते हैं तो महसूस होता है कि यह कहानी सिर्फ प्रेम-प्रसंग तक सीमित नहीं है। यह रिश्तों की गहराई, भावनाओं की परतों और सच्चे प्यार के अर्थ को समझाने की कोशिश करती है। यह फिल्म बताती है कि प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समय देने, समझने और महसूस करने का नाम है।

कहानी

फिल्म की शुरुआत जतिन सरना और मधुरिमा रॉय की खूबसूरत प्रेम कहानी से होती है। दोनों के बीच की केमिस्ट्री बेहद स्वाभाविक और दिल को छू लेने वाली है। उनके रिश्ते में मासूमियत भी है और एक अनकही दूरी भी, जो धीरे-धीरे कहानी का भावनात्मक आधार बनती है। कहानी में असली मोड़ तब आता है जब प्रणय पचौरी का किरदार प्रवेश करता है। इसके साथ ही प्रेम कहानी एक जटिल लेकिन दिलचस्प लव ट्रायंगल में बदल जाती है। यहां से फिल्म सिर्फ रोमांस नहीं दिखाती, बल्कि आत्म-सम्मान, असुरक्षा, अधूरेपन और भावनात्मक संघर्ष को सामने लाती है। फ़िल्म मोहब्बत, तकरार और भीतर के टूटन को संवेदनशीलता से दिखाती है। यह साफ करती है कि “आई लव यू” कहना आसान है, लेकिन उस प्यार को निभाना और समझना कहीं ज्यादा कठिन।

अभिनय

जतिन सरना ने ‘कुशल’ के किरदार को बेहद प्रभावशाली ढंग से निभाया है। उन्होंने अपने अभिनय में ऐसी सच्चाई भरी है कि दर्शक उनके दर्द और द्वंद्व को महसूस करने लगते हैं। उनके चेहरे के भाव, आंखों की नमी और संवादों की ठहराव भरी प्रस्तुति उन्हें एक शक्तिशाली अभिनेता के रूप में स्थापित करती है। उनका किरदार प्यार में टूटा हुआ है, भीतर से बिखरा हुआ है, लेकिन पूरी तरह हार नहीं मानता। वह अपनी गलतियों से जूझता है, खुद से सवाल करता है और इसी संघर्ष में उसका चरित्र और गहरा होता जाता है। युवा दर्शकों के लिए यह परफॉर्मेंस खास है, क्योंकि इसमें आज के रिश्तों की सच्चाई और कन्फ्यूजन साफ दिखाई देता है।

जतिन सरना अपने दमदार अभिनय के जरिए फिल्म की कहानी को मजबूती देते हैं और ‘कुशल’ के माध्यम से भावनात्मक यात्रा को विश्वसनीय बनाते हैं। प्रणय पचौरी ने एक मॉडर्न, आत्मविश्वासी और भावनात्मक रूप से जटिल किरदार को सहजता से निभाया है। उनके और जतिन सरना के बीच के दृश्य ड्रामैटिक होने के बावजूद प्रभावी हैं। मधुरिमा रॉय ने एक ऐसी युवती का किरदार निभाया है जो दिल और दिमाग के बीच झूल रही है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावशाली है और उन्होंने किरदार की भावनात्मक जटिलता को खूबसूरती से उकेरा है।

निर्देशन

निर्देशक विकास अरोड़ा ने मॉडर्न लव को परिपक्व और संवेदनशील दृष्टिकोण से पेश किया है। उनका विजन स्पष्ट है, प्यार सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, धैर्य और समझ की प्रक्रिया है। संवाद प्रभावशाली हैं और कई जगह सीधे दिल को छूते हैं। गंभीर विषय होने के बावजूद निर्देशक ने कहानी को सहज और दर्शकों के लिए जुड़ने योग्य बनाए रखा है।

संगीत फिल्म की भावनात्मक धारा को आगे बढ़ाता है और स्वाभाविक लगता है। टाइटल ट्रैक ‘ना जाने कौन आ गया’ मधुर और याद रह जाने वाला है। यह फिल्म बड़े ड्रामेटिक ट्विस्ट्स पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अपनी सादगी, सच्चाई और दमदार अभिनय के बल पर असर छोड़ती है।

क्यों देखें ये फिल्म

आज के दौर में जब रिश्ते अक्सर डिजिटल दुनिया की भीड़ में उलझ जाते हैं, यह फिल्म ठहरकर सोचने को मजबूर करती है। इसमें इंटेंसिटी है, दर्द है, और सबसे बढ़कर वह सच्चाई है जिससे आज का युवा आसानी से जुड़ सकता है। ‘ना जाने कौन आ गया’ एक ऐसी इमोशनल लव स्टोरी है जो मॉडर्न रिश्तों को नए नजरिए से देखने का मौका देती है और खासतौर पर जतिन सरना की दमदार परफॉर्मेंस के लिए यह फिल्म जरूर देखी जानी चाहिए।

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