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सैयारा मूवी रिव्यू: गुस्से, गम, प्यार और गानों से सजी 'सैयारा' की धीमी तड़प में निखरे अहान पांडे और अनीत पड्डा

 Written By: जया द्विवेदी
 Published : Jul 18, 2025 02:16 pm IST,  Updated : Jul 18, 2025 06:46 pm IST

'सैय्यारा' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म की कहानी में पूरी तरह घुले हुए दो नए सितारे नजर आ रहे हैं। कहानी और एक्टर की अभिनय कैसा है, जानने के लिए पढ़े पूरा रिव्यू।

Saiyyara Movie Review
अनीत और अहान Photo: FILM POSTER
  • फिल्म रिव्यू: सैयारा
  • स्टार रेटिंग 3/5
  • पर्दे पर: 18.07.2025
  • डायरेक्टर: मोहित सूरी
  • शैली: रोमांटिक ड्रामा

'सैयारा', एक फिल्म जो बड़े पर्दे पर नए चेहरों को लेकर आई है, लेकिन प्रचार की रौनक से कहीं दूर रही। ये फिल्म एक ऐसे सफर की दास्तान कहती है जो दिल की गहराइयों में उतरता है। इस फिल्म में अहान पांडे और अनीत पड्डा की मुख्य भूमिका है, जो अपनी पहली बड़ी बड़ी रिलीज के साथ कैमरे के सामने आए हैं। निर्देशक मोहित सूरी ने इस फिल्म का निर्देशन किया है, जो पहले ही ‘रॉकस्टार’ और ‘आशिकी 2’ जैसी फिल्मों से जुड़े रहे हैं। इस बार मोहित ने अपनी पहचान कायम रखी है। मोहित सूरी का करियर लगभग दो दशकों का है और वे अपनी फिल्में बनाने की शैली के मामले में अब एक अलग मुकाम पर खड़े हैं। एक ऐसा अंदाज, जिसमें हर कहानी में एक जैसी भावनाएं, एक जैसी तीव्रता और नायक-नायिका की कई परतें होती हैं। उनकी कहानियों में नायक एक सनकी, लापरवाह लड़का होता है और नायिका नाजुक लेकिन अंदर से गहरे जख्मों से जूझती आत्मा को पेश करती है।

क्या मोहित सूरी ने छोड़ी छाप

फिल्म की शुरुआत ही कुछ ऐसे पल से होती है जो दिल को झकझोर कर रख देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मोहित सूरी की पिछली फिल्मों में देखने को मिलता है। अहान पांडे का किरदार एक टिक-टिक करता टाइम बम लगता है, गुस्से से भरा, धूम्रपान की लत से घिरा और कहीं-कहीं कबीर सिंह की झलक लिए हुए वो सामने आता है, जिसे देखकर लगता है कि वो कभी भी फट पड़ेगा। उनके चेहरे को देखने से पहले ही उनके एंट्री सीन में इस बेचैनी और उग्रता का अनुभव हो जाता है। वहीं अनीत पड्डा, इस दुनिया की एक परी की तरह नजर आती हैं। अपनी एंट्री के साथ एक रहस्यमय और आकर्षक छाप छोड़ती हैं। दोनों किरदारों की दुनिया अलग, अजीब और विरान है, लेकिन फिर इसमें एक आकर्षण भरा हुआ है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।

कैसा है 'सैय्यारा' का साउंडट्रैक

मोहित सूरी की फिल्मों का संगीत हमेशा एक खास अनुभव होता है। 'सैयारा' का साउंडट्रैक भी ऐसा ही दिल को छूने वाला है, जो फिल्म के भावुक क्षणों को और गहराई देता है। संगीत एक तरह से पात्रों के भीतर की उलझनों और उनकी भावनात्मक यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन जैसा कि सूरी की फिल्मों में अक्सर देखा गया है, वे कलाकारों को चुनौतीपूर्ण स्थितियों में डालते हैं जहां उनकी क्षमता की परीक्षा होती है। कभी-कभी परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं निकलते और 'सैय्यारा' के भी कुछ हिस्सों ऐसा ही महसूस होता है।

कहानी में है कितना दम

फिल्म में हास्य का बहुत कम रंग है। फिल्म की कहानी में रोमांस और गम की कई तह हैं। शायद एक-दो हल्के-फुल्के चुटकुले सुनने को मिलते हैं, जो पूरी गंभीरता को थोड़ा तोड़ते हैं। एक खास सीन में जब अहान पांडे का किरदार एक पत्रकार पर हमला करता है क्योंकि वह नेपोटिज्म को सपोर्ट करता है तो यह एक व्यंग्यात्मक मोड़ बन जाता है। नेपोटिज्म और वास्तविक प्रतिभा के बीच की जंग को यह सीन बड़ी चालाकी से उभारता है। यह जानबूझकर की गई विडंबना है या नहीं, यह सवाल फिल्म निर्माताओं के लिए खुला है, लेकिन उनकी मेहनत और जुनून झूठा नहीं लगता। फिल्म काफी इमोशनल है और इसका इमोशनल एंगल ही आपको कहानी से जोड़ता है। शानदार शुरुआत के बाद कहानी में ऐसा मोड़ आता है, जहां कहानी थोड़ी ठहरी, गंभीर और प्रेडिक्टेबल लगती है, लेकिन इंटरवल के बाद क्लाइमेक्स फिल्म को असल गति देता है। फिल्म का रनटाइम लगभग 2.30 घंटे का है और अगर यही रनटाइम 15 मिनट कम होता तो फिल्म के लिए सेवियर का काम करता। अगर कहानी और लंबी खिंचती तो ये अच्छी एक्टिंग और प्रभावी गानों के बावजूद काफी उबाऊ हो जाती। कई हिस्से ऐसे हैं, जहां साइलेंस काफी लंबा है और किरदारों की चुप्पी अच्छी लगती हैं और बैकग्राउंड चलते गाने इसे और बल देते हैं। 

वाणी (अनीत पड्डा) और कृष (अहान पांडे) की कहानी आपको दर्द भरी दुनिया की सैर कराती हैं, जहां कई पुराने जख्म हैं, जो वर्तमान में सामने आते हैं। कृष एक ऐसी शख्सियत है जो कहीं न कहीं बेकाबू, क्रोधी और भविष्य में विनाशकारी होने की कगार पर खड़ा है। दूसरी ओर वाणी सहज, शांति प्रिय और सौम्य दिखती है, लेकिन उसमें भी जिद और दृढ़ता की कमी नहीं। दोनों पात्रों की जिंदगियों में एक उदासी और दर्द छुपा है, जो उनकी हर मुस्कुराहट को निगल जाता है। फिल्म में यह भावना इतनी गहराई से समाई हुई है कि लगभग पूरे एक घंटे तक कोई भी मुस्कुराता नहीं दिखता। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वाणी के व्यवहार की वजह समझ में आती है और अनीत पड्डा के अभिनय में यह नाजुकपन और ताकत एक साथ सामने आती है। निर्देशक ने महिला पात्रों को न सिर्फ मजबूती दी है, बल्कि उनकी नियंत्रण क्षमता और आत्म-निर्भरता भी स्पष्ट की है, जो फिल्म की बड़ी खासियत है।

कितनी विश्वसनीय है ये प्रेम कहानी

जहां तक अहान पांडे की बात है, उनकी सच्चाई और प्रतिभा इंटरवल के बाद ही पूरी तरह नजर आती है। जब उनके किरदार का गुस्सा और अव्यवस्थित व्यवहार कुछ हद तक कम हो जाता है, तब उनकी परफॉर्मेंस में संतुलन आता है। इस हिस्से में, जोड़ी के बीच की केमिस्ट्री भी बेहतर लगती है और उनकी कहानी में वजन आता है। लेकिन फिल्म में कुछ अजीबोगरीब और अधूरे पल भी हैं, जो कहानी के प्रवाह को बाधित करते हैं। कृष का सड़क से सुपरस्टार बनने का सफर बेहद तेजी से, बिना किसी विस्तार के दिखाया गया है, जो कहीं न कहीं विश्वसनीयता से कोसों दूर है। वहीं वाणी के पूर्व प्रेमी की कहानी भी फिल्म के मुख्य कथानक से मेल नहीं खाती और बेमेल सी लगती है। वो अचानक बीच में आता है और फिर गायब हो जाता है, अगर दूसरे हिस्से में उसकी निजी लाइफ भी दिखाते तो शायद कहानी को आकार अच्छा मिलता।

इन फिल्मों की दिलाती है याद

फिल्म में ‘मलंग’ जैसी ग्लैमरस और एड्रेनालिन से भरपूर सीन और ‘आशिकी’ जैसी भावुक तड़प के तत्व हैं, लेकिन ये सारे मसाले “सैयारा” को अपनी अलग, अनूठी पहचान बनाने से रोकते हैं। फिल्म की कहानी भटकी हुई नहीं है, लेकिन फिर भी ये आशिकी और रॉकस्टार की याद दिलाती है। कई बार ऐसा लगता है कि आशिकी की कहानी को ही अब अलग एंगल से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही फिल्म में कहीं-कहीं अजय देवगन और काजोल की 'यू मी और हम' की झलक भी मिलती है, जो पुराने समय की याद दिलाती है। हालांकि ज्यादा स्पॉइलर से बचते हुए, कहा जा सकता है कि कहानी कहीं-कहीं अपने सांचे से बाहर निकलकर दिखाना चाहती है पर सफलता थोड़ी कम मिलती है।

कैसा है अहान और अनीत का काम

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि नए कलाकारों की मेहनत और संवेदनशीलता इसे कमजोर स्टोरीलाइन के बावजूद जीवंत बनाए रखती है। उनकी ऊर्जा और किरदारों के प्रति लगाव फिल्म की कमजोरी को काफी हद तक छुपा देता है। साथ ही, फिल्म का टाइटल ट्रैक एक दमदार संयोजन है, जो पूरी फिल्म को जोड़कर एक साथ बांधता है। बाकी गानों में वो स्थायी छाप नहीं है जो मोहित सूरी की पिछली फिल्मों के गानों में मिलती है, लेकिन फिल्म की नीयत और ईमानदारी इसे एक अलग मुकाम देती है। ये कहने में को परहेज नहीं कि अहान पांडे और अनीत पड्डा ने अपनी पहली ही फिल्म में छाप छोड़ दी है। दोनों ही अपने काम में परफेक्ट हैं। दोनों में अनुभव की कमी नहीं लग रही है। दोनों के पास काश और अच्छे डायलॉग आते तो उनकी एक्टिंग का और निखरा रूप देखने को मिलता। इतना ही नहीं कई सीन में अहान पांडे अनीत पर भारी पड़ते हैं तो कुछ में अनीत इतनी गहराई में डूबी लगती हैं कि उनसे नजरें हटा पाना मुश्किल हो जाता है। सहायक कलाकारों का काम भी अच्छा है, लेकिन उनका स्क्रीन स्पेस काफी कम है।

क्या देखनी चाहिए 'सैय्यारा'

“सैयारा” एक धीमी-धीमी धड़कन वाली प्रेम कहानी है, जो अपने अनजानेपन और अधूरेपन के बावजूद दर्शकों के दिलों तक पहुंचने की कोशिश करती है। यह फिल्म यह सवाल उठाती है कि प्यार कब मुकम्मल होता है? जहां जुनून, दर्द, और करुणा के भावों की भरमार है, वहीं फिल्म के कुछ हिस्से दर्शकों को उबाऊ भी लगती है। फिर भी इसकी सच्चाई और कलाकारों का समर्पण इसे खास बनाता है। अंत में 'सैयारा' एक ऐसा अनुभव है जो उन दर्शकों के लिए है जो नए कलाकारों को देखना चाहते हैं और मोहित सूरी की फिल्मी दुनिया में डूबना पसंद करते हैं। यह फिल्म कई परंपरागत रोमांटिक ड्रामा से अलग है, लेकिन ये टिपिकल मोहित सूरी स्टाइल फिल्म है, जो उनकी ही पुरानी फिल्मों की याद दिलाती है। इस फिल्म को आप एक बार जरूर देख सकते हैं।

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