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Thug Life Review: ठग लेगी 'ठग लाइफ'! न दिखा कमल हासन का स्वैग, फीका पड़ा मणि रत्नम का जादू

 Written By: साक्षी वर्मा
 Published : Jun 05, 2025 02:15 pm IST,  Updated : Jun 05, 2025 02:15 pm IST

ठग लाइफ मूवी रिव्यू: मणिरत्नम और कमल हासन की फिल्म अपनी बात पर खरी नहीं उतरी है। फिल्म में त्रिशा ने भी निराश किया है। ये कहा जा सकता है कि मणिरत्नम का पुराना जादू फीका पड़ गया है।

Thug Life
ठग लाइफ का एक दृश्य। Photo: INSTAGRAM
  • फिल्म रिव्यू: ठग लाइफ
  • स्टार रेटिंग 2/5
  • पर्दे पर: 05/06/2025
  • डायरेक्टर: मणि रत्नम
  • शैली: गैंगस्टर एक्शन ड्रामा

जब 1987 में कमल हासन और मणिरत्नम ने साथ काम किया था, तब उन्होंने नायकन जैसी एक कालजयी फिल्म बनाई थी। सरन्या पोनवन्नन और कमल हासन अभिनीत यह फिल्म न केवल अपने समय की सबसे बेहतरीन क्राइम ड्रामा मानी गई, बल्कि आने वाले दशकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। तभी से दर्शकों को इंतज़ार था कि ये जोड़ी एक बार फिर कोई सिनेमाई चमत्कार पेश करेगी। जब ठग लाइफ की घोषणा हुई और इसका पहला लुक सामने आया, तो ऐसा लगा मानो वर्षों की दुआओं को आवाज़ मिल गई हो। लेकिन जैसे ही यह फिल्म 5 जून 2025 को सिनेमाघरों में आई, दर्शकों की उम्मीदें टूट गईं। औसत दर्जे का लेखन, सपाट पटकथा और पूर्वानुमेय घटनाक्रम ने फिल्म को एक बड़े मौके से चूकने वाली प्रस्तुति बना दिया।

कहानी: एक बेमकसद यात्रा

फिल्म की शुरुआत एक सुंदर, दृश्यात्मक फ्रेम से होती है – तेज़ हवाओं में उड़ते बूढ़े शक्तिवेल नायकर (कमल हासन) के बाल, जो मणिरत्नम के पुराने जादू की उम्मीद जगाते हैं। लेकिन जल्द ही कहानी फ्लैशबैक में जाती है, जहाँ युवा शक्तिवेल एक 5 साल के बच्चे अमर को गोद लेता है, जिसके पिता की हत्या उसके बड़े भाई ने कर दी थी। शक्तिवेल जेल जाता है और अमर को अपने गिरोह का अस्थायी मुखिया बना देता है। इस निर्णय से उसका परिवार और गिरोह के सदस्य नाराज़ हो जाते हैं। पिता और बेटे के बीच की जटिलता, भाई-भाई के मतभेद और गिरोह के अंदर चल रही राजनीति को दिखाया गया है, लेकिन यह सब इतना सतही और अनुमानित लगता है कि कोई रोमांच नहीं जगता।

लेखन व निर्देशन: खोया हुआ जादू

कमल हासन और मणिरत्नम की जोड़ी से जिस गहराई और बारीकी की उम्मीद थी, वह इस फिल्म में नदारद है। फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है – इसका लेखन। शक्तिवेल के रिश्ते उसके चारों ओर मौजूद सभी लोगों से या तो अस्वाभाविक लगते हैं या अधूरे। उसकी पत्नी जीवा (अभिरामी), जो उससे बेशुमार प्यार करती है, एक तरफ छोड़ दी गई है, जबकि इंद्राणी (त्रिशा कृष्णन) का किरदार बेहद कमजोर और मकसदहीन है। त्रिशा जैसी सशक्त अभिनेत्री को इतनी हल्की भूमिका में देखना दुखद है। मणिरत्नम, जो महिलाओं की गहराई को दिखाने में माहिर माने जाते हैं, यहां बुरी तरह चूकते हैं। शक्तिवेल का अपने भाई और दत्तक पुत्र से जुड़ाव भी भ्रमित और जटिल नहीं, बल्कि आधा-अधूरा लगता है। हालांकि मणिरत्नम ने अपने किरदार को मानवीय और खामियों से भरा दिखाया है, जो एक सराहनीय कोशिश है। लेकिन फिल्म की रफ्तार और घटनाओं की पूर्वानुमेयता उसे बेहद उबाऊ बना देती है।

संगीत: जब रहमान भी नहीं चमक सके

एआर रहमान और मणिरत्नम की जोड़ी ने वर्षों तक जादू रचा है – दिल से, रोजा, गुरु जैसी फिल्मों के गानों से लेकर पोन्नियिन सेल्वन तक। लेकिन इस बार रहमान का संगीत औसत है। “चांद के टुकड़े” और “वीर-ए-कायनात” ही ऐसे दो गाने हैं जो थोड़ी राहत देते हैं। श्रुति हासन का गाना क्लाइमेक्स सीन में बेहतर इस्तेमाल हो सकता था, लेकिन इसे अंत में डालकर इसका प्रभाव कम कर दिया गया। तमिल वर्शन में संगीत कहीं ज़्यादा प्रभावी था। बैकग्राउंड स्कोर कुछ दृश्यों में ऊर्जा लाता है, लेकिन पूरी फिल्म में वह पकड़ बनाए नहीं रखता।

अभिनय: कमल हासन दमदार, बाकी असंतुलित

कमल हासन का प्रदर्शन उम्र के इस पड़ाव पर भी गहराई और संजीदगी से भरा हुआ है। उनकी आँखों में भावनाएँ हैं और एक्शन सीक्वेंस में भी वह पूरे जोश के साथ मौजूद हैं। लेकिन हिंदी डबिंग में उनका स्वर और उच्चारण कभी-कभी असहज लगता है। सिलंबरासन टीआर (STR) ने संतुलित अभिनय किया है, हालांकि उनके किरदार को ज्यादा परिपक्वता नहीं मिल पाई। त्रिशा फिल्म की सबसे बड़ी निराशा हैं – उनका किरदार अधूरा लिखा गया है और वे उसमें कुछ खास कर नहीं पाईं। अभिरामी छोटे रोल में भी प्रभाव छोड़ती हैं। अली फजल और रोहित सराफ को ना पर्याप्त स्क्रीन स्पेस मिला और ना ही यादगार दृश्य। नासर ने अपने सीमित दृश्यों में अभिनय का स्तर ऊपर रखा।

एक अधूरी वापसी

ठग लाइफ से जो उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हुई। मणिरत्नम और कमल हासन की जोड़ी दर्शकों को 1987 की तरह मंत्रमुग्ध नहीं कर पाई। इस फिल्म में कुछ भावनात्मक पल हैं, दृश्यात्मक सुंदरता है, और कमल हासन का समर्पण है – लेकिन ये सब मिलकर भी उस बड़ी कमी को नहीं भर पाते जो खराब पटकथा, सुस्त निर्देशन और अधपकी भावनाओं की वजह से उत्पन्न होती है। अगर आपको एक नए अनुभव की उम्मीद थी, तो यह फिल्म शायद आपको निराश करेगी। ठग लाइफ को दो सितारे देना उदारता होगी, यह एक ऐसे अवसर की याद दिलाती है जो एक शानदार अनुभव बन सकता था, लेकिन बन नहीं पाया।

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