गोलगप्पे का नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। अलग अलग जगहों पर इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में गोलगप्पों को 'पानी के बताशे' कहा जाता है जबकि पश्चिम बंगाल में इसे पुचका के नाम से जाना जाता है। बाजार में मिलने वाले गोलगप्पे मैदे के या फिर सूजी के बने होते हैं। लेकिन घर पर लोग आटे के गोलगप्पे बनाना चाहते हैं, पर शिकायत रहती है कि घर पर बने गोलगप्पे न सही से फूलते हैं और न ही कुरकुरे होते हैं। लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है। यहां हम सीक्रेट तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप घर पर बाजार जैसे कुरकुरे गोलगप्पे बना सकते हैं।
सही माप और गूंथने का तरीका
गोलगप्पे बनाने के लिए आटे और सूजी का सही अनुपात होना बेहद जरूरी है। अगर आप 1 किलो गेहूं का आटा ले रहे हैं तो उसमें एक पाव (250 ग्राम) सूजी मिलाएं। इसका मतलब है कि आटे का एक चौथाई हिस्सा सूजी का होना चाहिए। आटा गूंथते समय पानी धीरे धीरे डालें। इस बात का खास ध्यान रखें कि आटा न तो बहुत सख्त हो और न ही बहुत ज्यादा नरम। इसे रोटी के लिए गूंथे आटे की तरह रखें। आटा गूंथने के बाद तुरंत गोलगप्पे न बेलें। इसे एक प्लास्टिक की पॉलीथीन में बांधकर कम से कम आधे घंटे के लिए छोड़ दें। पॉलीथीन में आटे को रखने से ऊपरी परत सूखती नहीं है और नमी बनी रहती है। आधे घंटे बाद आटे को पॉलीथीन से निकालें और इसे 2 मिनट और गूंथे।
बेलने की तकनीक और कट्टे का इस्तेमाल
अब गोलगप्पे की छोटी छोटी लोइयां बना लें उन पर थोड़ा सा रिफाइंड तेल लगाएं ताकि वे आपस में न चिपकें। इसके बाद इसे बेलें, इस बात का ध्यान रखें कि इसे न ज्यादा बड़ा, न ज्यादा छोटा बेलना है। बेलने के बाद इसे किसी बर्तन की जगह प्लास्टिक के कट्टे (बोरी) पर रखें। बेलने के बाद इसे दूसरे कट्टे से ढककर आधे घंटे के लिए छोड़ दें।
तलना: सबसे महत्वपूर्ण
कड़ाही में तेल एक चौथाई ही रखें और आंच को तेज रखें। तलते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि जो साइड नीचे है वो तलते वक्त नीचे ही जाए। अगर आप इसे पलटकर डालेंगे तो गोलगप्पे एक तरफ से फूलेंगे और दूसरी तरफ से पापड़ी बन जाएगी। तलने के बाद इन्हें तुरंत न खाएं, एक दिन के लिए खुला छोड़ दें। इससे ये खस्ता हो जाएगी। फिर अगले दिन इसका आनंद लें।