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क्या AC की वजह से अंधेरे में डूब जाएगा India? हर साल बिक रहे 1.5 करोड़ नए एयर कंडीशनर

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : May 27, 2026 03:53 pm IST,  Updated : May 27, 2026 03:53 pm IST

एयर कंडीशनर जहां गर्मियों में सुकून देते हैं, वहीं ये आने वाले दिनों में पूरे देश को अंधेरे में डूबा सकते हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसी की बढ़ती डिमांड की वजह से बिजली की भयंकर किल्लत हो सकती है।

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क्या एसी की वजह से अंधेरे में डूब जाएगा इंडिया? Image Source : INDIA TV

AC की वजह से भारत में बिजली की बड़ी किल्लत हो सकती है। पिछले कुछ साल में जिस तरह से एयर कंडीशनर की बिक्री बढ़ी है, आने वाले दशक में भारत में बहुत बड़ा पावर क्राइसिस यानी बिजली की किल्लत हो सकती है। कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में घंटो बत्ती गुल रही थी। बिजली की डिमांड अपने रिकॉर्ड पीक पर पहुंच गया है। राजधानी दिल्ली से सटे हाईटेक सिटी गुरुग्राम में कई घंटे बिजली नहीं आई, जिसकी वजह से मैट्रो की सेवाएं ठप हो गई थी। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा ही नजारा आने वाले समय में देखने को मिल सकता है।

क्या अंधेरे में डूब जाएगा देश?

अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में दायर एक वर्किंग पेपर 'इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर' में दावा किया गया है कि भारत में एनर्जी की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण एयर कंडीशनर यानी AC है। पिछले कुछ साल में जिस तरह से एसी खरीदने वाले यूजर्स की संख्यां बढ़ रही है, देश के पावर ग्रिड्स पूरी क्षमता पर काम करने के बाद भी उर्जा की मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से कई शहरों में घंटों पावर कट्स हो रहे हैं।

Power Grid
Image Source : UNSPLASHपावरग्रिड

इस समय भारत में एसी की वजह से एक तिमाही में 60 से 70 गीगावॉट (GW) बिजली की जरूरत होती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर कोई सख्त एनर्जी इफिशिएंसी गाइडलाइंस नहीं बनाई गई तो 2035 तक इसकी डिमांड 120GW तक पहुंच सकती है। हालांकि, सरकार ने सूर्य घर जैसी योजनाएं चलाकर दिन में बिजली की डिमांड को बैलेंस करने की कोशिश की है। वहीं, शाम के समय जब सोलर पैनल से बिजली नहीं बनती है, उस समय सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। ऐसे में पावरग्रिड पर अतिरिक्त लोड रहेगा।

हर साल बिकते हैं 1.5 करोड़ AC

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में हर साल 10 से 15 मिलियन यूनिट्स एसी बिकते हैं। 2035 तक भारत में एसी की संख्यां 130 मिलियन से 150 मिलियन तक पहुंच सकती है। ऐसे में पावर डिमांड तेजी से बढ़ जाएगा और देश अंधेरे में डूब सकता है। रिपोर्ट में एनर्जी एफिशिएंसी के स्टैंडर्ड को सख्त करने की सलाह दी गई है। हालांकि, सरकार ने नए एनर्जी रेटिंग इस साल लागू की है, जो पहले के स्टैंडर्ड के मुकाबले बेहतर है।

BEE स्टैंडर्ड सख्त करने की जरूरत

रिपोर्ट में कहा गया है कि एसी के लिए मिनिमम एनर्जी परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड (MEPS) को सख्त करने की जरूरत है। अगर, सख्ती नहीं की गई तो ये एयर कंडीशनर रात में होने वाली बिजली की मांग का एक-तिहाई हिस्सा अकेले खत्म कर देंगे। रिसर्चर्स बताते हैं कि ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) को मिनिमम एनर्जी परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड्स यानी न्यूनतम उर्जा मानकों को सुधारना चाहिए।

AC
Image Source : UNSPLASHतेजी से बढ़ रही एसी की डिमांड

करोड़ों रुपये की होगी बचत

इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि देश में बिकने वाले सबसे बेसिक स्टैंडर्ड को 5 स्टार रेटिंग के बराबर कर देना चाहिए। 2033 तक इसे बढ़ाकर 6.7 तक ले जाना जरूरी है। नियमों में सख्ती का फायदा सरकार के साथ-साथ कंज्यूमर्स को भी होगा। एनर्जी स्टैंडर्ड बेहतर होने की वजह से हर महीने आने वाले बिजली के बिल कम हो जाएंगें। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे 2035 तक करीब 2.48 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकेगी। साथ ही, बिजली की डिमांड भी कम हो जाएगी और सरकार को नया पावर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की जरूरत भी नहीं होगी।

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