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Explainer: बिपरजॉय जैसे चक्रवात क्यों बेहद गंभीर हालात पैदा करते हैं, क्या है इनके बार-बार आने की वजह?

Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd Published : Jun 13, 2023 04:01 pm IST, Updated : Jun 13, 2023 04:45 pm IST

बिपरजॉय चक्रवात का असर गुजरात में दिखाई देने लगा है। सरकार इससे बचाव के लिए कड़े इंतजाम कर रही है। अब तक 21 हजार से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। यहां हम जानेंगे कि आखिरी बिपरजॉय जैसे चक्रवात इतने गंभीर हालात क्यों पैदा कर देते हैं।

Biparjoy- India TV Hindi
Image Source : FILE cyclone Biparjoy

नई दिल्ली: बिपरजॉय चक्रवात की पूरे देश में चर्चा है। गुजरात में तो इस चक्रवात का सामना करने के लिए सरकार ने कड़े इंतजाम भी किए हैं। अभी तक गुजरात में 21 हजार से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बिपरजॉय के कारण गुजरात में बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि बिपरजॉय तटीय क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। आईएमडी का ये भी कहना है कि ये गुजरात में भारी तबाही मचा सकता है।

क्यों आते हैं बिपरजॉय जैसे चक्रवात? 

बेहद गंभीर चक्रवात बिपरजॉय आने की वजह अरब सागर की प्रकृति में एक क्रमिक लेकिन अवांछनीय परिवर्तन है। यह उत्तर हिंद महासागर में बंगाल की खाड़ी की तुलना में हमेशा अपेक्षाकृत ठंडा रहा है। लेकिन 4 दशक पहले, इसने अपने करेक्टर में एक बड़े बदलाव से गुजरना शुरू कर दिया। पिछले साल प्रकाशित एल्सेवियर अर्थ साइंस रिव्यूज़ में एक पेपर के अनुसार, अरब सागर के ऊपर समुद्र की सतह के तापमान में चार दशक पहले की तुलना में हाल के दशकों में 1.2 से 1.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। इसका नतीजा ये हुआ है कि चक्रवात बार-बार आए, जो मजबूत थे और अक्सर लंबे समय तक चलते थे।

चक्रवातों में आई तेजी

नेचर में प्रकाशित 2021 के पेपर के अनुसार, अध्ययन अवधि, 1982 से 2019 के दौरान अरब सागर के ऊपर देखे गए चक्रवाती तूफानों (CS) और बहुत गंभीर चक्रवाती तूफानों (VSCS) की तीव्रता, आवृत्ति और अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अरब सागर में (2001-2019) के दौरान सीएस की आवृत्ति में 52% की वृद्धि हुई है, जबकि बंगाल की खाड़ी में 8% की कमी आई है। इसके अलावा, दो दशकों से 2021 तक अरब सागर में चक्रवातों की कुल अवधि में 80% की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में बहुत गंभीर चक्रवातों की अवधि में 260% की वृद्धि हुई है।

अरब सागर के करेक्टर में बदलाव अहम, भारत का पश्चिमी तट असुरक्षित

अरब सागर के करेक्टर में बदलाव के कारण भी अधिक गंभीर चक्रवात बने और आगे भी बन रहे हैं। इसका मतलब ये है कि भारत का पश्चिमी तट अब अधिक असुरक्षित है। पृथ्वी विज्ञान के पेपर में जो बात सामने आई है, उसमें बताया गया कि उत्तर हिंद महासागर वैश्विक उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का केवल 6% हिस्सा है, फिर भी इस बेसिन में कुछ सबसे विनाशकारी चक्रवात बन गए हैं, जिससे उत्तर हिंद महासागर के किनारे के देशों में जीवन और संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ है।

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