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Explainer: पश्चिम बंगाल की सियासत में आखिर क्यों मचा हुआ है हड़कंप; क्या होने वाला है खेला-2?

 Published : Jun 08, 2026 11:29 pm IST,  Updated : Jun 08, 2026 11:31 pm IST

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सियासत एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां से उसका रास्ता क्या होगा, अभी किसी को पता नहीं है।

Mamata Banerjee- India TV Hindi
ममता बनर्जी Image Source : INDIA TV

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में जब से तृणमूल कांग्रेस विधानसभा का चुनाव हारी है, तब से उसके बुरे दिन चल रहे हैं। पहले अभिषेक बनर्जी पर सड़क पर हमला हुआ और फिर विधायकों का ममता के बुलावे पर न पहुंचने से ही हंगामा मचा हुआ था, अब तृणमूल कांग्रेस के 2 तिहाई से ज्यादा सांसदों ने भी बगावत कर दी और 28 में से 20 सांसदों ने अपना रास्ता अलग कर लिया। इन बागी सांसदों ने काकोली घोष के नेतृत्व में एनडीए के साथ जाने का फैसला किया है।

ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार सदमा लग रहा है और पूरे देश की निगाहें पश्चिम बंगाल की सियासत पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक पंडित इस बात की आशंका जता रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में खेला-2 हो सकता है। 

हालांकि ममता ने अभी हार नहीं मानी है और उन्होंने आज दिल्ली में सोनिया और राहुल गांधी के साथ मिलकर मोदी सरकार से लड़ने का प्लान बनाया है। आज ममता और अभिषेक बनर्जी इंडी अलायन्स की मीटिंग में दिल्ली पहुंचे थे। इस मीटिंग में 25 राजनीतिक दलों के नेता मौजूद थे और सबने ये तय किया है कि वे बीजेपी के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे।

ममता ने कहा कि बंगाल में हार के बाद अब उनके पास टाइम ही टाइम है। वो इंडी अलायन्स के साथ मिलकर देशभर में बीजेपी के खिलाफ कैंपेन करेंगी। मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, डेरेक ओ ब्रायन, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती और सुप्रिया सुले के साथ साथ तमिलनाडु से वाइको शामिल हुए। वामपंथी दलों, CPI-CPM और CPI-ML के नेता भी इसमें मौजूद रहे।

तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बाद बने 3 गुट

तृणमूल कांग्रेस में बगावत के सुर उठने के बाद 3 गुट बनते दिख रहे हैं। जिसमें एक गुट ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का है। दूसरा गुट काकोली घोष दस्तगीर की अगुवाई वाले तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का है। तीसरा गुट बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के नेता ऋतब्रत बनर्जी का है।

हालांकि आज ममता बनर्जी के गुट की तरफ से ऋतब्रत बनर्जी के गुट को मान्यता देने के खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन फाइल की गई है। स्पीकर के फैसले के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की पिटीशन पर हाईकोर्ट 11 जून को सुनवाई करेगा लेकिन ऋतब्रत का कहना है कि उन्हें इसकी फिक्र नहीं है क्योंकि पार्टी के दो तिहाई से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं। ऋतब्रत यहीं नहीं रुके बल्कि एक और चौंकाने वाला दावा किया कि अभी तो पार्टी के और भी नेता उनके साथ आएंगे।

ममता की पार्टी कैसे टूटी?

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी आज दिल्ली में थे और इन्हें पता ही नहीं लग पाया कि इनकी पार्टी के 20 से ज्यादा सांसद इन्हें कब झटका दे गए। काकोली घोष ने ये बयान दिया कि पार्टी के 20 सांसदों ने NDA को सपोर्ट करने का फैसला किया है और बीस सांसदों के सिग्नेचर वाली चिट्ठी तैयार है, ये चिट्ठी आज ही स्पीकर ओम बिरला को सौंपने की तैयारी थी लेकिन आज स्पीकर दिल्ली में नहीं थे। नतीजन तृणमूल कांग्रेस के MP जल्दी ही स्पीकर से मिलेंगे। 

काकोली घोष इस बागी गुट की लीडर हैं और इन सांसदों की रणनीति पार्टी को तोड़ने की नहीं है बल्कि ये लोग अलग गुट के तौर पर मान्यता भी नहीं मांग रहे। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का कहना है कि बंगाल में जनता ने जिस तरह बीजेपी को सपोर्ट किया है और एकतरफा जीत दी है, उससे साफ है कि जनता NDA की नीतियों से खुश है इसलिए वो भी जनमत के साथ चलना चाहते हैं और लोकसभा में भी NDA को सपोर्ट करना चाहते हैं। मांग है कि इनके गुट को NDA के हिस्से के तौर पर मान्यता दी जाए। काकोली घोष ने कहा कि वो अब देश की सुरक्षा और राज्य के विकास के लिए काम करना चाहती हैं, इसलिए उन्होंने ममता बनर्जी से अलग होने का फैसला किया।

8 सांसदों ने काकोली घोष के दावों को गलत बताया

हालांकि अभी भी 28 में से 8 सांसदों के गुट का पक्ष अलग है। ये 8 सांसदों का गुट ममता बनर्जी के साथ है और काकोली घोष के दावों को गलत बता रहा है। कीर्ति आजाद ने कहा है कि 20 सांसदों के पार्टी छोड़ने का दावा गलत है क्योंकि उन्होंने खुद ऐसे कई सांसदों से बात की, जिनका नाम बगावत करने वालों की लिस्ट में बताया जा रहा है।

एक तरफ कीर्ति आजाद काकोली घोष के दावे को गलत बता रहे हैं लेकिन कलकत्ता में मौजूद ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने आज मान लिया कि लोकसभा में पार्टी टूट चुकी है। कुणाल घोष ने कहा कि दिल्ली में जो हो रहा है वो दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इसके लिए बीजेपी नहीं तृणमूल कांग्रेस की लीडरशिप ही जिम्मेदार है। ममता बनर्जी ने जिन सीनियर लीडर्स को नेशनल पॉलिटिक्स की जिम्मेदारी दी थी, उनसे पूछना चाहिए कि क्या उन्हें पता नहीं था कि पार्टी के सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं। गौरतलब है कि ममता ने दिल्ली की जिम्मेदारी अभिषेक को दी थी इसलिए ये तो साफ है कि कुणाल घोष के निशाने पर अभिषेक बनर्जी ही हैं।

कुल मिलाकर इस सियासी भंवर में ममता बनर्जी के सपनों का जहाज डगमगा रहा है और राजनीतिक जानकार खेला-2 होने की आशंका जता रहे हैं। खेला-2 होने का मतलब है पार्टी का पूरी तरह बिखर कर अपनी शक्ति खो देना। क्या ममता के सपनों की पार्टी बच पाएगी, ये तो अब वक्त ही बताएगा।

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