तेल अवीव: इजराइल के कब्जे वाले ‘गोलन हाइट्स’ में शनिवार को एक फुटबॉल मैदान पर हुए रॉकेट हमले में कम से कम 12 बच्चों और किशोरों की मौत हो गई। इजराइल ने शनिवार शाम लेबनान से किए गए रॉकेट हमले के लिए हिज्बुल्लाह को दोषी ठहराया है। घटना के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को हिज्बुल्लाह के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई का संकल्प लिया। हालांकि हिज्बुल्लाह का कहना है कि उसका इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इजराइल ने अपनी तरफ से उसे सबक सिखाने की पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर दोनों के बीच जंग होती है तो कितनी खतरनाक होगी? आइए, समझते हैं।
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच वैसे तो तमाम लड़ाइयां हो चुकी हैं, लेकिन ताजा तनाव तब भड़का जब 7 अक्टूबर को हमास ने 1200 से ज्यादा इजराइली नागरिकों की नृशंस हत्या कर दी और कइयों को किडनैप करके ले गए। इस घटना के अगले दिन 8 अक्टूबर को हिज्बुल्लाह ने भी इजराइल पर गोलीबारी की थी। हमलों के बाद इजराइल ने गाजा में जंग छेड़ दी जो अभी तक जारी है। हिज्बुल्लाह ने कहा कि इजराइल पर हमले करने के पीछे का उसका मकसद फिलिस्तीनियों का समर्थन करने का है। गाजा की जंग ने पूरे क्षेत्र में ईरान समर्थित आतंकी गुटों को आकर्षित किया है, और हिज्बुल्लाह उनमें सबसे ताकतवर माना जाता है।

हिज्बुल्लाह का कहना है कि वह गाजा में युद्ध विराम लागू होने तक इजराइल पर अपने हमले नहीं रोकेगा। बता दें कि इजराइल और हिज्बुल्लाह ने एक-दूसरे के खिलाफ तमाम लड़ाइयां लड़ी हैं और दोनों के बीच आखिरी जंग 2006 में हुई थी। हिज्बुल्लाह को इजराइल अपनी सीमाओं पर सबसे बड़ा खतरा मानता है और इसके हथियारों के जखीरे बढ़ने के साथ-साथ सीरिया में इसके बढ़ते प्रभाव से परेशान है। हिज्बुल्लाह की स्थापना ही 1982 में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा इजराइली सेना से लड़ने के लिए की गई थी। इजराइल ने तब लेबनान पर हमला किया था और इसके बाद अगले कई सालों तक गुरिल्ला युद्ध चला था। आखिरकार इजराइल को 2000 में दक्षिणी लेबनान से हटना पड़ा था।
इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच ताजा तनाव के चलते दोनों ही तरफ के हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। बता दें कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि अगर हिज्बुल्लाह उनके मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ता है तो वह बेरूत को 'गाजा' में बदल देंगे। 2006 की जंग में इजराइल ने लेबनान को बहुत नुकसान पहुंचाया था और बेरूत के एयरपोर्ट के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर को बुरी तरह तबाह कर दिया था। हालांकि आज हालात दूसरे हैं और हिज्बुल्लाह 2006 के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है। ऐसे में यदि जंग छिड़ती है तो दोनों ही पक्षों को काफी नुकसान पहुंच सकता है।'

फिलहाल तो इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव के कम होने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। अगर इजराइल अगले कुछ दिनों में गाजा में संघर्ष विराम का ऐलान करता है और फुटबॉल मैदान पर हुए रॉकेट हमले को लेकर हिज्बुल्लाह पर जवाबी कार्रवाई नहीं करता है तो निश्चित ही क्षेत्र में तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इजराइल के इतिहास को देखते हुए यह काम थोड़ा मुश्किल लग रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इजराइल सही मौका मिलते ही हिज्बुल्लाह पर हमले करेगा और कोशिश करेगा कि जल्द से जल्द उसे ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सके।
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