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EXPLAINER: भारी पड़ रही 'हम दो हमारा एक' की पॉलिसी, भारत में पहली बार रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आई जन्मदर; मंडरा रहा जापान की तरह बूढ़ी आबादी का खतरा!

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jun 07, 2026 11:55 pm IST,  Updated : Jun 07, 2026 11:58 pm IST

इतिहास में पहली बार भारत में प्रजनन दर, रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ गई है। ऐसे में सवाल है कि सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश होने के बावजूद भारत में घटती जन्मदर को लेकर चिंता क्यों जताई जा रही है।

declining birth rate India- India TV Hindi
क्या भारत की आबादी जापान की तरह बूढ़ी हो रही है? Image Source : PEXELS

Declining Birth Rate India: दुनिया में 819 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं। इनमें से 145 करोड़ लोग भारत में रहते हैं यानी दुनिया का हर छठा शख्स भारतीय है। आबादी के मामले में भारत चीन से भी आगे निकल चुका है। फिर भी अमेरिका में बैठे दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क भारत में घटती आबादी पर चिंता जता रहे हैं। मस्क ने एक पोस्ट मे लिखा है कि भारत में इतिहास में पहली बार जन्मदर रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ गई है। दरअसल, जन्म दर घटने का पहला इफेक्ट है बच्चे कम और बूढ़े ज्यादा। इसका दूसरा इफेक्ट है देश की आबादी में कमी और एलन मस्क भी भारत को लेकर यही चिंता जता रहे हैं।

सामान्य ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ क्या है?

बता दें कि किसी देश में औसतन एक महिला अपने जीवन में जितने बच्चों को जन्म देती है, उसे उस देश की कुल प्रजनन दर कहा जाता है। औसतन एक महिला 2.1 बच्चों को जन्म दे, तो इसे सामान्य ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ माना जाता है। यानी वे माता-पिता को रिप्लेस कर देंगे, यानी उनकी जगह लेंगे। प्रजनन दर 2.1 से ऊपर हो, तो इसे जनसंख्या वृद्धि माना जाता है और अगर इससे नीचे हो तो ये माना जाता है कि देश में पर्याप्त बच्चे पैदा नहीं हो रहे हैं। यानी उस देश में मरने वालों की संख्या जन्म लेने वालों से कम हो जाती है।

पहली बार रिप्लेसमेंट लेवल से भी नीचे आई प्रजनन दर

भारत में सिर्फ एक दशक में प्रजनन दर में तेजी से कमी आई है और ये 2.1 यानी रिप्लेसमेंट लेवल से भी नीचे आ गई है। मस्क इसी ओर इशारा कर रहे हैं। भारत में 1950 में प्रजनन दर 5.7 थी यानी 1000 महिलाएं 5700 बच्चे पैदा करती थीं। 1960 में ये बढ़कर 5.9 हो गई। 1970 में 5.6, 1980 में 4.8, 1990 में 4.0, 2000 में 3.4, 2010 में 2.6, 2020 में 2.1, 2023 में 2.0 और 2024 में प्रजनन दर घटकर 1.9 हो गई है यानी 1000 महिलाएं अब केवल 1940 बच्चे पैदा कर रही हैं। 

'हम दो हमारा एक' वाला फॉर्मूला बढ़ा रहा समस्या

गौरतलब है कि मस्क सिर्फ हिंदुस्तान की घटती आबादी पर ही चिंता नहीं जता रहे हैं। बल्कि दिल्ली, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों जहां सबसे ज्यादा पढ़ी लिखे लोग रहते हैं वहां की प्रजनन दर यूरोपीय देशों से भी कम हो गई है। मस्क इस पर भी आईना दिखा रहे हैं। दिल्ली और केरल जैसे राज्यों में 'हम दो हमारा एक' वाला फॉर्मूला चल रहा है जिससे ये समस्या तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली की प्रजनन दर 1.2 है जबकि फिनलैंड की 1.3 है। आंध्र प्रदेश की प्रजनन दर 1.4 है जबकि फ्रांस की 1.68 है। केरल की प्रजनन दर 1.3 है जबकि ब्रिटेन की 1.48 है।

यूपी-बिहार समेत इन 5 राज्यों में अधिक है प्रजनन दर

हालांकि, देश में सिर्फ 5 राज्य ऐसे रह गए हैं जहां प्रजनन सामान्य से ज्यादा है यानी इन राज्यों में महिलाएं औसतन 2 से ज्यादा बच्चे पैदा कर रही हैं। इनमें पहले नंबर पर बिहार है जहां प्रजनन दर 3.0 है, जबकि दूसरे नंबर पर मेघालय है जहां प्रजनन दर 2.91 है। तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है, जहां प्रजनन दर 2.35 है जबकि चौथे नंबर पर झारखंड है जहां प्रजनन दर 2.26 है और पांचवें नंबर पर मणिपुर है जहां प्रजनन दर 2.17 है।

प्रजनन दर गरीबों के मुकाबले अमीरों में है काफी कम

देखा जाए तो प्रजनन दर का सीधा संबंध शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं से है। 2015-16 के NFHS-4 के आंकड़ों में भी ये दिखता है। इसमें साफ देखा गया है कि कम आय वाले लोगों में प्रजनन दर 3.2 है, वहीं अमीरों में यह 1.5 है। इसी तरह सामान्य वर्ग की प्रजनन दर 1.9, पिछड़े वर्ग की 2.2, अनुसूचित जाति की 2.3, अनुसूचित जनजाति की 2.5 और मुस्लिमों की 2.6 है। घटती फर्टिलिटी रेट का असर ये होता है कि बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ती है।

2050 तक भारत की आबादी में 20.8 फीसदी होंगे बुजुर्ग

ध्यान रहे कि 2023 में जारी संयुक्त राष्ट्र की इंडिया एजिंग रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि 2050 तक भारत की आबादी में 20.8 फीसदी हिस्सेदारी बुजुर्गों की होगी। बुजुर्ग यानी जिनकी उम्र 60 साल या उससे ज्यादा होगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2010 के बाद से देश में बूढ़ों की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण से 15 साल से कम आयु के लोगों की जनसंख्या में हिस्सेदारी घट रही है।

सदी के अंत तक भारत में होंगे 36% बूढ़े लोग

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जुलाई 2022 तक देश में बुजुर्गों की आबादी 14.9 करोड़ थी। तब आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 10.5 फीसदी थी लेकिन 2050 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी 34.7 करोड़ हो सकती है। ऐसा हुआ तो उस वक्त भारत की जनसंख्या में 20.8 प्रतिशत बुजुर्ग होंगे जबकि, इस शताब्दी के खत्म होने तक भारत की 36 प्रतिशत से अधिक आबादी बुजुर्ग होगी।

बुजुर्गों की आबादी में होगा 134 फीसदी का इजाफा

इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2022 से 2050 के दौरान भारत की आबादी 18 प्रतिशत बढ़ जाएगी।  जबकि, बुजुर्गों की आबादी 134 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। वहीं, 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की जनसंख्या 279 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, बच्चे कितने जरूरी हैं ये टॉपिक अमेरिका, जापान, ब्रिटेन और चीन में भी चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी बच्चों की पॉलिटिक्स कर रहे हैं। जापान में भी बच्चे घटते जा रहे हैं, बूढ़े बढ़ते जा रहे हैं। वहां 100 साल जीना अब आम बात हो गई है।

जापान में अभी ही एक-तिहाई लोग 65 साल से ज्यादा

जापान में लगभग एक तिहाई लोग 65 साल से ज्यादा उम्र के हैं। जापान में औसत Life Expectancy 84 वर्ष हो गई है। जापान में 100 साल से ज्यादा उम्र के 1 लाख लोग हो गए हैं। जापान में प्रजनन दर 1.15 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गई है। साल में जितने बच्चे पैदा हो रहे हैं, उससे ज्यादा लोग मर रहे हैं।

GDP का 6% खर्च करने पर भी नहीं बढ़ी प्रजनन दर

यूरोप में सोशल प्रोटेक्शन लॉ लागू है। वहां सरकारी खर्चे पर सबकी देख-रेख होती है। फिर भी, यूरोप के लोग बच्चे कम पैदा कर रहे हैं। हंगरी ने 2001 में GDP का करीब 6 प्रतिशत हिस्सा प्रजनन दर बढ़ाने से जुड़ी योजनाओं पर खर्च करना शुरू किया।  इससे 2020 तक प्रजनन दर 1.23 से बढ़कर 1.61 तक पहुंच गया। लेकिन 2024 में ये गिरकर 1.39 पर आ गया।

चीन को मजबूरी में बंद करनी पड़ी 'वन चाइल्ड पॉलिसी'

उधर, चीन में भी जनसंख्‍या का संकट 2022 में गहरा गया क्योंकि 1961 के बाद पहली बार जन्म दर तेजी से कम होने की वजह से जनसंख्‍या में कमी दर्ज की गई है। चीन में काम करने वालों की संख्या तेजी से घटती जा रही है और बुजुर्ग ज्यादा होने लगे हैं। चीन ने बुजुर्गों की बढ़ती आबादी से चिंतित होकर साल 2015 में एक बच्चे की नीति बंद कर दी और दो बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी। अब चीन की सरकार बच्चे पैदा करने के लिए पैसे देती है।

3 बच्चों की अनुमति के बाद भी नहीं बढ़ रही आबादी

दरअसल, चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने 1979 में 'वन चाइल्ड' पॉलिसी लागू की थी। 2015 में चीन ने 'वन चाइल्ड' पॉलिसी खत्म कर दी। चीन के लोगों को दो बच्चे पैदा करने की इजाजत दी गई लेकिन इससे चीन में जन्म दर नहीं बढ़ी। 2021 में चीन सरकार ने 3 बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी, फिर भी चीन की आबादी घट रही है। 2025 में चीन की आबादी 33 लाख 90 हजार घट गई। अमेरिका और यूरोप से लेकर जापान और चीन तक इसका हल ढूंढ़ रहे हैं।

आंध्र प्रदेश में सरकार लाी बच्चे पैदा करने पर इनाम वाली स्कीम

वहीं, भारत की बात करें तो आंध्र प्रदेश में भी ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू नई स्कीम लाए हैं। आंध्र प्रदेश में दूसरा बच्चा पैदा करने पर 25 हजार रुपये, तीसरा बच्चा होने पर 30 हजार और चौथा बच्चा हुआ तो 40 हजार रुपये मिलेंगे। आंध्र सरकार के फैसले के पीछे सबसे मुख्य वजह राज्य का गिरता हुआ टोटल फर्टिलिटी रेट है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश का TFR इस समय घटकर करीब 1.4 पर पहुंच गया है। आबादी को स्थिर रखने के लिए रिप्लेसमेंट लेवल टीएफआर का 2.1 होना बहुत जरूरी माना जाता है। इसका मतलब है कि राज्य में आबादी अब तेजी से घटने की कगार पर है।

2047 तक आंध्र में बुजुर्गों का आंकड़ा 23 प्रतिशत होने का अनुमान

साल 2011 में आंध्र प्रदेश में 14 साल से कम उम्र के बच्चों की आबादी 25 फीसदी थी। ये आंकड़ा साल 2036 तक घटकर सिर्फ 15 फीसदी रह जाने का अनुमान है। इसके उलट 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की आबादी इसी दौरान 10 प्रतिशत से बढ़कर 19 फीसदी हो जाएगी। साल 2047 तक बुजुर्गों का आंकड़ा 23 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश की औसत उम्र इस समय 32.5 साल है जो देश की औसत उम्र 28 साल से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि राज्य तेजी से बूढ़ा हो रहा है। अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो साल 2040 के बाद राज्य के पास काम करने वाले युवाओं की भारी कमी हो जाएगी।

अधिकतर महिलाएं चाहती हैं कम बच्चे

भारत में एक ओर अधिक बच्चे पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है लेकिन हकीकत है कि ज्यादातर महिलाएं कम बच्चे पैदा करना चाह रही हैं। NFHS-5 के अनुसार, अधिकतर भारतीय महिलाएं सिर्फ 1 बच्चे की चाहत ही रखती हैं। इस वक्त भारत में फर्टिलिटी रेट 1.9 है, जबकि महिलाएं इसे 1.6 चाहती हैं। सर्वे के अनुसार, जिन कपल के 2 बच्चे हैं, उनमें से 86 प्रतिशत पुरुष और महिलाएं अब तीसरा बच्चा नहीं करना चाहते हैं। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि जो कम पढ़े-लिखे हैं, वो ज्यादा बच्चे चाहते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। जो महिलाएं कभी स्कूल नहीं गईं, उनमें फर्टिलिटी रेट 2.8 है, जबकि वो 2.2 चाहती हैं। तो आगे से किसी नेता के 3 बच्चे या 4 बच्चे पैदा करने की अपील या बयान को मजाक में मत लीजिए। यह बात गंभीर है। ये बात देश और समाज की है।

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