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Explainer: इस साल दिल्ली में आग लगने से कुल कितनी हुई मौत? मालवीय नगर अग्निकांड ने फिर खड़े किए सवाल

 Published : Jun 03, 2026 02:49 pm IST,  Updated : Jun 03, 2026 04:14 pm IST

दिल्ली में बढ़ रही आग की घटनाओं से एक बार फिर सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इस साल जनवरी से लेकर जून के पहले हफ्ते तक रिकॉर्ड संख्या में लोगों की मौतें हुईं हैं।

मालवीय नगर के...- India TV Hindi
मालवीय नगर के रेस्टोरेंट में आग। Image Source : INDIA TV

गर्मी का मौसम आते ही आग अपना अलग रौद्र रूप दिखाती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल आग की घटनाओं ने कई लोगों को अपनी चपेट में लिया है। दिल्ली में इस साल अब तक (जनवरी से 3 जून तक) आग लगने की घटनाओं में कम से कम 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अकेले 3 जून को ही मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हुई है। मई के महीने में 13 लोगों की मौत आग से हुई है। 

मई में आग से 13 लोगों की मौत

दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी से अप्रैल के बीच आग लगने की घटनाओं में 32 लोगों की मौत हुई और मई के पहले 27 दिन के दौरान 13 मौतें दर्ज की गईं। दिल्ली के मालवीय नगर के एक रेस्टोरेंट में बुधवार (3 जून) को इतनी भीषण आग लगी की इसमें 21 लोगों की मौत हो गई।

मार्च में 15 लोगों की जान आग के कारण गई

आंकड़ों के अनुसार, जून का महीना इस साल का सबसे घातक रहा है। हालांकि, जून महीने की अभी तो ये सिर्फ शुरुआत है। मार्च में आग से संबंधित घटनाओं में 15 लोगों की मौत हुई। डीएफएस के रिकॉर्ड बताते हैं कि जनवरी में 6, फरवरी में 6, मार्च में 15 और अप्रैल में 5 लोगों की आग की घटनाओं में मौत हुई।

दिल्ली में इस साल आग लगने की कितनी घटनाएं हुई हैं।
Image Source : INDIA TVदिल्ली में इस साल आग लगने की कितनी घटनाएं हुई हैं।

दिल्ली में मई में सबसे ज्यादा हुईं आग की घटनाएं

गर्मी के महीनों में शहर में आग लगने की घटनाओं में भारी वृद्धि देखी गई। दिल्ली में जनवरी में 1,396; फरवरी में 1,096; मार्च में 1,538; और अप्रैल में 2,663 और जून में अभी सबसे बड़ी घटना मालवीय नगर की है। मई के पहले 26 दिन में ही अग्निशमन विभाग को आग लगने की 2,877 घटनाओं की सूचना फोन पर मिली, जो अप्रैल की तुलना में कहीं अधिक है।

आग से बड़ी संख्या में लोग हुए झुलसे

आंकड़ों से पता चला कि जनवरी में आग लगने की घटनाओं में 41 लोग झुलस गए या बचाए गए, फरवरी में 46, मार्च में 68 और अप्रैल में 119 लोग घायल हो गए या उन्हें बचा लिया गया। मई में 26 मई तक आग लगने की घटनाओं में 99 लोगों के घायल होने या बचाए जाने की सूचना मिली। जून के महीने में 21 लोगों की मौत हो गई कई अन्य अभी गंभीर रूप से घायल हैं। 

अप्रैल में 725 आग लगने की घटनाओं की मिली सूचना

इस साल दिल्ली में कचरे और कूड़े में लगने वाली आग की घटनाओं की संख्या भी काफी रही। जनवरी में ऐसी 441 घटनाएं, फरवरी में 331, मार्च में 539 और अप्रैल में 725 घटनाएं दर्ज की गईं। 26 मई तक, विभाग ने कचरे में आग लगने की 766 शिकायतों पर कार्रवाई की।

ये हैं आग लगने की प्रमुख वजहें

अधिकारियों ने कहा कि गर्मी के महीनों के दौरान तापमान में वृद्धि और शुष्क मौसम के कारण आमतौर पर आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। डीएफएस के आंकड़ों से पता चला कि मई में आपातकालीन कॉल और बचाव अभियानों की कुल संख्या में वृद्धि हुई, लेकिन आग से संबंधित मौत के मामले मार्च में दर्ज किए गए सर्वाधिक मामलों से कम रहे।

दिल्ली में इस साल आग से कितनी मौतें हुई हैं।
Image Source : INDIA TVदिल्ली में इस साल आग से कितनी मौतें हुई हैं।

रोकी जा सकती हैं ये घटनाएं

दिल्ली के मालवीय नगर का अग्निकांड शहरी आपदाओं के भयावह इतिहास में एक और घटना है। इस घटना को रोका जा सकता था। दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों से भयावह स्थिति का पता चलता है। 

लापरवाही और सरकारी विफलताओं बन रहीं वजहें

आज की त्रासदी से पहले भी जनवरी से 27 मई, 2026 के बीच आग की घटनाओं में 45 लोगों की जान जा चुकी थी, जबकि अकेले मई में आग लगने की 2,877 कॉल दर्ज की गईं। हालांकि व्यक्तिगत घटनाएं अक्सर शॉर्ट सर्किट जैसी आकस्मिक परिचालन दुर्घटनाओं के कारण होती हैं, लेकिन मालवीय नगर जैसी घटनाओं का भयावह पैमाना गहरी सरकारी विफलताओं की ओर इशारा करता है। 

सेफ्टी क्लियरेंस में बरती जा रही लापरवाही

सरकारी नक्शों का उल्लंघन और इमारतों में अवैध बेसमेंट आग की घटना जैसी आपदा को न्योता देती हैं। किसी इमारत में सिर्फ एक ही बाहर निकलने का रास्ता हो या खिड़कियां बंद हों और फिर भी उसकी सेफ्टी क्लियरेंस का नवीनीकरण कर दिया जाए, तो यह लोगों की सुरक्षा के साथ समझौता है। ऐसी स्थिति में आग या किसी अन्य आपातकाल के दौरान लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि उनके पास सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने का पर्याप्त रास्ता नहीं होता है।

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