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Explanier: महिला आरक्षण बिल और सीटों का गणित, कैसे बदल जाएगी राजनीति की दशा और दिशा

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Apr 16, 2026 03:05 pm IST,  Updated : Apr 16, 2026 04:10 pm IST

संसद के विशेष सत्र में आज तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए हैं। इनका उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को पूरी तरह ऑपरेशनलाइज करना है। जानें इससे कैसे बदल जाएगी राजनीति की दशा और दिशा।

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश- India TV Hindi
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश Image Source : PTI

Explainer: सरकार ने आज लोकसभा में तीन अहम बिल पेश किया है, इनमें महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन विधेयक 2026, दूसरा परिसीमन विधेयक, 2026 और तीसरा केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक, 2026 शामिल हैं। इन बिल का मकसद 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह ऑपरेशनलाइज करना है। सरकार 2029 से पहले लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है। इन तीनों बिल के पास होने के बाद लोकसभा और विधानसभा में सीटों का गणित बदल जाएगा। यह कदम न केवल देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि लोकसभा की विधायी संरचना को भी बदल देगा।

क्यों खास हैं ये तीनों बिल

संसद में पेश होने जा रहे बिल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अहम कदम है। इसके तहत सांसदों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों वाला विधेयक संसद में पेश किया गया है। संविधान संशोधन के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी, इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए, 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। बिल में साफ किया गया है कि जनसंख्या का मतलब उसी जनगणना से होगा, जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हों। बता दें कि फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े ही उपलब्ध हैं और उन्हीं के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।

इसपर विपक्ष का कहना है कि वो महिला आरक्षण बिल के विरोध में नहीं है लेकिन इससे जुड़े परिसीमन को लेकर उसका विरोध है। विपक्ष की मांग है कि परिसीमन 2026 की जनगणना के नतीजे आने के बाद किया जाए। वहीं तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना की सरकारें भी इस बिल का विरोध कर रही हैं।

सरकार को विपक्ष की होगी जरूरत 

सरकार ने संविधान संशोधन करके नारी शक्ति वंदन एक्ट पारित किया था, इसलिए, उसमें बदलाव के लिए भी constituition में बदलाव करना होगा। संविधान संशोधन करने के लिए दो तिहाई बहुमत की ज़रूरत होती है। लोकसभा में मौजूदा सांसदों की संख्या 540 है, जिसके हिसाब से दो तिहाई बहुमत 360 सीटों का होता है। NDA के पास इस वक़्त 292 सांसद हैं, विपक्षी के 233 सासंद हैं, जिसमें से 15 सांसद ऐसे हैं, जो किसी भी एलायंस का हिस्सा नहीं हैं। अगर, ये सभी 15 सांसद सरकार का सपोर्ट भी कर दें, तो भी सरकार के पास दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा नहीं होगा। इसलिए, ये संविधान संशोधन पारित करने के लिए सरकार को विपक्ष के सहयोग की ज़रूरत होगी,  तभी लोकसभा की सीटें बढ़ाई जा सकती हैं और महिला रिज़र्वेशन लागू किया जा सकता है। 

सरकार बार बार भरोसा दिला रही है कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। हर राज्य में लोकसभा की सीटें 50 परसेंट बढ़ाई जाएंगी यानी अगर तमिलनाडु की 39 सीटें हैं तो वो बढ़कर 59 हो जाएंगी। केरल की 50 परसेंट सीटें बढ़ीं, तो लोकसभा सीटों की संख्या 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी। सरकार इस बात को  स्पष्ट करेगी। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी दल, सरकार के साथ आकर देश की महिलाओं को उनका हक़ देंगे।

सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अहम कदम है। इसके तहत सांसदों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों वाला विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। संविधान संशोधन के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए, 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।

बिल में साफ किया गया है कि जनसंख्या का मतलब उसी जनगणना से होगा, जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हों। फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े ही उपलब्ध हैं और उन्हीं के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। 

  1. पहला - संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
  2. दूसरा - परिसीमन विधेयक, 2026
  3. और तीसरा- केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक, 2026

इन बिल का मकसद 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह ऑपरेशनलाइज करना है। मोदी सरकार का कहना है कि यह कदम न केवल देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई ऊंचाई देगा बल्कि लोकसभा की विधायी संरचना को भी बदल देगा। इन बिलों के संसद में पास होने से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में चार अहम बदलाव होने जा रहे हैं-

नंबर 1-  लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का रास्ता साफ होगा.

नंबर 2-  नए बदलाव में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रस्ताव है.

नंबर 3- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्गठन करना है.

नंबर 4 - एक बिल में परिसीमन आयोग बनाए जाने का भी प्रपोजल है

विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन में सरकार के मनमाने तरीके से उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों की लोकसभा सीटों में बड़ा उछाल आएगा और दक्षिण भारतीय राज्यों को बड़ा नुकसान आएगा। हालांकि सरकार ने भरोसा दिया है कि लोकसभा में सभी राज्यों की सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा. 2011 की जनगणना में राज्यों की आबादी का आधार पर बाध्यकारी नहीं होगा. इसलिए सीटों का अनुपात नहीं बदलेगा।

विपक्ष की मांग

  1. महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिया जाए
  2.  महिला आरक्षण मौजूदा लोकसभा के आधार पर 2029 में लागू किया जाए
  3. परिसीमन 2026 की जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद किया जाए
  4. विपक्षी पार्टियां परिसीमन के मौजूदा प्रावधानों के खिलाफ है

कैसे होगी सीटों की गिनती 

  • प्रस्तावित परिसीमन बिल की धारा 8 परिसीमन आयोग को यह अधिकार देती है कि वह नवीनतम जनगणना के आंकड़ों और संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर सीटों का बंटवारा तय करे।
  • इस खंड में आयोग से यह भी कहा गया है कि वह गणितीय रूप से यह हिसाब लगाए कि प्रत्येक राज्य की विधानसभा में कितनी सीटें होंगी, जो उस राज्य की लोकसभा सीटों की संख्या पर निर्भर करेगा।
  • हालांकि अनुच्छेद 170 का वह प्रावधान, जो विधायकों की संख्या को 60 से 500 सीटों के बीच सीमित करता है नहीं बदला गया है, लेकिन संविधान संशोधन बिल में यह प्रस्ताव है कि अब विधानसभा में सीटों की संख्या की गणना उस जनगणना के आधार पर की जाएगी, जिसे संसद कानून बनाकर तय करेगी और जिसके संबंधित आंकड़े प्रकाशित हो चुके होंगे।

इसका मतलब है कि राज्य विधानसभा में सीटों का बंटवारा भी उन जनगणना आंकड़ों पर निर्भर करेगा जिन्हें परिसीमन आयोग विचार के लिए चुनेगा।

55 साल से परिसीमन नहीं

वर्तमान में लोकसभा की सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर ही स्थिर है और दो बार इसे 25-25 साल बढ़ाया गया है। बता दें कि यह समयसीमा 2026 में खत्म हो रही है। इसके बाद होने वाली जनगणना के आधार पर ही सीटों की संख्या में बड़ा बदलाव होने की संभावना है।

बिल और  सीटों का गणित

  •  तमिलनाडु में 39 सीटें हैं और परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होता है तो उसकी सीटें 49-50 हो सकती हैं, लेकिन सरकार के सभी राज्यों के हिस्से को आनुपातिक रूप से 50% बढ़ाने का फार्मूला दिया है। ऐसे में उसकी 59 सीटें होंगी।
  • केरलम में 20 सीटें हैं और 2011 की जनगणना के आधार पर उसकी 23 सीटें होती हैं। लेकिन 50% के फार्मूले के अनुसार वहां 30 सीटें होंगी। आंध्र प्रदेश में 25 सीटें हैं, 2011 की जनगणना के आधार पर वहां 33 सीटें होती हैं। 50% के फार्मूले के अनुसार वहां 37 सीटें होंगी।
  • ओडिशा में वर्तमान में 21 सीटें हैं। यदि परिसीमन केवल 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाता, तो केरल में 28 सीटें होतीं। लेकिन भारत सरकार के सभी राज्यों के हिस्से को आनुपातिक रूप से 50% बढ़ाने के फार्मूले के अनुसार, अब तेलंगाना में 31 सीटें होंगी।

 

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