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17 जुलाई से पटरियों पर दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने शेयर की तस्वीरें

भारतीय रेलवे 17 जुलाई को एक नया इतिहास रचने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलेगी।

Reported By: Anamika Gaur, Written By: Shivendra Singh
Published : Jul 15, 2026 06:05 pm IST,  Updated : Jul 16, 2026 09:12 pm IST
भारतीय रेलवे 17 जुलाई को एक नया इतिहास रचेगी। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस ट्रेन की कुछ तस्वीरें भी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन न सिर्फ भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन होगी, बल्कि एशिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन भी मानी जा रही है। यह परियोजना ग्रीन ट्रांसपोर्ट और मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
1/10 Image Source : PM Modi facebook account
भारतीय रेलवे 17 जुलाई को एक नया इतिहास रचेगी। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस ट्रेन की कुछ तस्वीरें भी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन न सिर्फ भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन होगी, बल्कि एशिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन भी मानी जा रही है। यह परियोजना ग्रीन ट्रांसपोर्ट और मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
नई हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच करीब 90 किलोमीटर की दूरी लगभग एक घंटे में तय करेगी। अभी यही सफर डीएमयू ट्रेन से करीब दो घंटे में पूरा होता है। एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर तक बिना रुके चल सकेगी। रेलवे ने इस ट्रेन का किराया भी आम यात्रियों को ध्यान में रखकर तय किया है। यात्रा के लिए न्यूनतम ₹5 और अधिकतम ₹25 किराया देना होगा। यानी अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद इस ट्रेन का किराया सामान्य पैसेंजर (DEMU) ट्रेन के बराबर रखा गया है।
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नई हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच करीब 90 किलोमीटर की दूरी लगभग एक घंटे में तय करेगी। अभी यही सफर डीएमयू ट्रेन से करीब दो घंटे में पूरा होता है। एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर तक बिना रुके चल सकेगी। रेलवे ने इस ट्रेन का किराया भी आम यात्रियों को ध्यान में रखकर तय किया है। यात्रा के लिए न्यूनतम ₹5 और अधिकतम ₹25 किराया देना होगा। यानी अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद इस ट्रेन का किराया सामान्य पैसेंजर (DEMU) ट्रेन के बराबर रखा गया है।
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी पर्यावरण अनुकूल तकनीक है। यह 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। इसमें डीजल की जगह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होगी। इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा, बल्कि केवल भाप और गर्मी निकलेगी। यही वजह है कि इसे भविष्य की स्वच्छ और हरित रेल सेवा माना जा रहा है।
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इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी पर्यावरण अनुकूल तकनीक है। यह 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। इसमें डीजल की जगह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होगी। इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा, बल्कि केवल भाप और गर्मी निकलेगी। यही वजह है कि इसे भविष्य की स्वच्छ और हरित रेल सेवा माना जा रहा है।
हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। इसमें लग्जरी सीटें, मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, हैंड ग्रिपर और आरामदायक कोच होंगे। ट्रेन में एक बार में करीब 2,500 यात्रियों की क्षमता होगी, जबकि लगभग 700 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। रेलवे के अनुसार, सभी ट्रायल सफल रहे हैं और ट्रेन नियमित संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है।
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हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। इसमें लग्जरी सीटें, मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, हैंड ग्रिपर और आरामदायक कोच होंगे। ट्रेन में एक बार में करीब 2,500 यात्रियों की क्षमता होगी, जबकि लगभग 700 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। रेलवे के अनुसार, सभी ट्रायल सफल रहे हैं और ट्रेन नियमित संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है।
रेलवे ने सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ट्रेन में 27 हाइड्रोजन सिलेंडर, हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर, फायर डिटेक्टर और आधुनिक कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी नियमित निगरानी और जांच की जाएगी। इस ट्रेन का डिजाइन आरडीएसओ (लखनऊ) ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई में किया गया है।
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रेलवे ने सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ट्रेन में 27 हाइड्रोजन सिलेंडर, हाइड्रोजन लीकेज डिटेक्टर, फायर डिटेक्टर और आधुनिक कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी नियमित निगरानी और जांच की जाएगी। इस ट्रेन का डिजाइन आरडीएसओ (लखनऊ) ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई में किया गया है।
ट्रेन बहु-आयामी सुरक्षा प्रणाली से लैस है, जो हाइड्रोजन रिसाव, गर्मी, आग की लपटों और धुएं का पता लगाने में सक्षम हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर हाइड्रोजन ट्रेन को रवाना करेंगे। ट्रेन जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच चलेगी। पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेन के मुकाबले यह ट्रेन 'हाइड्रोजन फ्यूल सेल' तकनीक से चलती है, जो ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए हाइड्रोजन को बिजली में बदलती है। इस प्रक्रिया में अवशेष के तौर पर सिर्फ जल-वाष्प निकलती है, जिसके दौरान कार्बन का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होता है।
6/10 Image Source : Reporter Input
ट्रेन बहु-आयामी सुरक्षा प्रणाली से लैस है, जो हाइड्रोजन रिसाव, गर्मी, आग की लपटों और धुएं का पता लगाने में सक्षम हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर हाइड्रोजन ट्रेन को रवाना करेंगे। ट्रेन जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच चलेगी। पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेन के मुकाबले यह ट्रेन 'हाइड्रोजन फ्यूल सेल' तकनीक से चलती है, जो ट्रेन को आगे बढ़ाने के लिए हाइड्रोजन को बिजली में बदलती है। इस प्रक्रिया में अवशेष के तौर पर सिर्फ जल-वाष्प निकलती है, जिसके दौरान कार्बन का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होता है।
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, ''एक तरह से, यह ट्रेन अपनी ऊर्जा खुद पैदा करती है, ठीक वैसे ही जैसे पहले भाप और डीजल इंजन करते थे। हालांकि, कोयले या डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन को जलाने के बजाय, यह ट्रेन हवा से ऑक्सीजन लेकर बिजली बनाती है, जिससे न तो कोई दहन होता है और न ही इसे बाहरी बिजली आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है।''
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गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, ''एक तरह से, यह ट्रेन अपनी ऊर्जा खुद पैदा करती है, ठीक वैसे ही जैसे पहले भाप और डीजल इंजन करते थे। हालांकि, कोयले या डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन को जलाने के बजाय, यह ट्रेन हवा से ऑक्सीजन लेकर बिजली बनाती है, जिससे न तो कोई दहन होता है और न ही इसे बाहरी बिजली आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है।''
इस ट्रेन में ही स्वच्छ-हाइड्रोजन तकनीक से बिजली बनाई जाती है, इसलिए यह ट्रेन संचालन का सबसे पर्यावरण-अनुकूल रूप है। बयान में कहा गया, ''इस आधुनिक प्रणोदन प्रणाली के साथ, भारत ने ट्रेन में बहु-आयामी सुरक्षा प्रणाली भी लगायी है जो हाइड्रोजन रिसाव, गर्मी, आग की लपटों और धुएं का पता लगाने में सक्षम हैं।'' जींद-सोनीपत खंड पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति और 110 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति के साथ, यह ट्रेन न केवल सुरक्षित है बल्कि 89 किलोमीटर के इस मार्ग पर सबसे तेज सफर पूरा करेगी।
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इस ट्रेन में ही स्वच्छ-हाइड्रोजन तकनीक से बिजली बनाई जाती है, इसलिए यह ट्रेन संचालन का सबसे पर्यावरण-अनुकूल रूप है। बयान में कहा गया, ''इस आधुनिक प्रणोदन प्रणाली के साथ, भारत ने ट्रेन में बहु-आयामी सुरक्षा प्रणाली भी लगायी है जो हाइड्रोजन रिसाव, गर्मी, आग की लपटों और धुएं का पता लगाने में सक्षम हैं।'' जींद-सोनीपत खंड पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति और 110 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति के साथ, यह ट्रेन न केवल सुरक्षित है बल्कि 89 किलोमीटर के इस मार्ग पर सबसे तेज सफर पूरा करेगी।
हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन वैश्विक स्तर पर अभी भी प्रारंभिक चरण में हैं। जर्मनी व्यावसायिक हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों को शुरू करने वाला पहला देश बन गया है, जबकि फ्रांस, इटली, चीन, जापान और कुछ अन्य देश प्रायोगिक परियोजनाओं या सीमित परिचालन पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इन ट्रेनों में आमतौर पर दो से चार डिब्बे होते हैं और ये मुख्य रूप से क्षेत्रीय यात्री सेवाओं के लिए ही बनाई गई हैं। इसके विपरीत, भारतीय रेलवे की ट्रेन को 10 कोच वाली यात्री ट्रेन के रूप में तैयार किया गया है, जिसकी क्षमता लगभग 2,600 यात्रियों की है।
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हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन वैश्विक स्तर पर अभी भी प्रारंभिक चरण में हैं। जर्मनी व्यावसायिक हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों को शुरू करने वाला पहला देश बन गया है, जबकि फ्रांस, इटली, चीन, जापान और कुछ अन्य देश प्रायोगिक परियोजनाओं या सीमित परिचालन पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इन ट्रेनों में आमतौर पर दो से चार डिब्बे होते हैं और ये मुख्य रूप से क्षेत्रीय यात्री सेवाओं के लिए ही बनाई गई हैं। इसके विपरीत, भारतीय रेलवे की ट्रेन को 10 कोच वाली यात्री ट्रेन के रूप में तैयार किया गया है, जिसकी क्षमता लगभग 2,600 यात्रियों की है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली यह ट्रेन शुरू में उत्तरी रेलवे के जींद-सोनीपत खंड पर चलेगी, जो जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ती है और जींद सिटी, पांडु पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हाल्ट, भम्भेवा, इसापुर खेड़ी हाल्ट, बुटाना हाल्ट, खंडराई हाल्ट, राब्रा हाल्ट, लाठ हाल्ट, मोहना, बड़वासनी हाल्ट और सोनीपत न्यू सहित मध्यवर्ती स्टेशनों और प्रस्तावित ठहरावों पर भी रुकेगी। भारतीय रेलवे जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना से प्राप्त अनुभव का लाभ उठाते हुए कालका-शिमला मार्ग सहित विरासत रेलमार्गों पर हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं का भी पता लगा रहा है।
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हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली यह ट्रेन शुरू में उत्तरी रेलवे के जींद-सोनीपत खंड पर चलेगी, जो जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ती है और जींद सिटी, पांडु पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हाल्ट, भम्भेवा, इसापुर खेड़ी हाल्ट, बुटाना हाल्ट, खंडराई हाल्ट, राब्रा हाल्ट, लाठ हाल्ट, मोहना, बड़वासनी हाल्ट और सोनीपत न्यू सहित मध्यवर्ती स्टेशनों और प्रस्तावित ठहरावों पर भी रुकेगी। भारतीय रेलवे जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना से प्राप्त अनुभव का लाभ उठाते हुए कालका-शिमला मार्ग सहित विरासत रेलमार्गों पर हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं का भी पता लगा रहा है।
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