-
Image Source : nightcafe ai
मुगल शासक शाहजहां की सबसे बड़ी बेटी जहांआरा इतिहास की सबसे अमीर शहजादी थी। बला की खूबसूरत होने के साथ जहांआरा काफी समझदार और विद्वान थीं।
-
Image Source : Public domain
जहांआरा ने फारसी में दो ग्रंथ लिखे। इतिहासकार इरा मुखोटी ने अपनी किताब में लिखा है कि मुगल सल्तनत में बने नए शहर शाहजहानाबाद का नक्शा खुद जहांआरा ने अपनी देखरेख में बनवाया था।
-
Image Source : nightcafe ai
शाहजहानाबाद के बाद नए शहर की 19 में से पांच इमारतें भी जहांआरा ने अपनी निगरानी में बनवाईं, जिसे अब दिल्ली कहा जाता है। पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक को भी जहांआरा ने ही बनवाया था।
-
Image Source : nightcafe ai
जब शाहजहां मुगल सल्तनत की गद्दी पर बैठे तो उन्होंने बादशाह की हैसियत से अपनी बेटी जहांआरा को सालाना 6 लाख रुपये वजीफा देने का ऐलान किया, जो बहुत बड़ी रकम थी।
-
Image Source : nightcafe ai
सालाना 6 लाख रुपए वजीफे के अलावा जहांआरा को एक लाख अशर्फियां, चार लाख रुपए नकद और तमाम जागीरें भी दी गईं थीं। जिनमें सूरत का बंदरगाह भी शामिल था, जिससे होने वाली सारी आमदनी पर जहांआरा का हक था।
-
Image Source : nightcafe ai
उसके बाद जहांआरा की सालाना आमदनी बढ़ाकर 30 लाख रुपये सालाना कर दी गई, जो उस जमाने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। वह न सिर्फ मुगल साम्राज्य बल्कि दुनिया की सबसे अमीर शहजादी बन गईं थीं।
-
Image Source : nghtcafe ai
मां मुमताज महल के निधन के बाद उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा जहांआरा को दिया गया, बाकी आधा हिस्सा दूसरे भाई-बहनों में बराबर-बराबर बांट दिया गया। इससे जहांआरा की दौलत और बढ़ गई।
-
Image Source : nightcafe ai
बला की खूबसूरत और अकूत दौलत की मालकिन होने के बावजूद जहांआरा ताउम्र कुंवारी रही, उनकी शादी नहीं हुई। इतिहासकारों के मुताबिक इसकी वजह उनके पिता शाहजहां थे, जिनका मानना था कि अगर जहांआरा ने शादी की तो सल्तनत में दामाद को हिस्सा देना पड़ेगा और इससे साम्राज्य पर बुरा असर पड़ेगा।