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सबसे अमीर मुगल शहजादी, जो थी बला की खूबसूरत, फिर भी क्यों रहीं कुंवारी? जानकर होंगे हैरान

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Aug 23, 2025 03:05 pm IST,  Updated : Aug 24, 2025 06:46 am IST
मुगल शासक शाहजहां की सबसे बड़ी बेटी जहांआरा इतिहास की सबसे अमीर शहजादी थी। बला की खूबसूरत होने के साथ जहांआरा काफी समझदार और विद्वान थीं।
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मुगल शासक शाहजहां की सबसे बड़ी बेटी जहांआरा इतिहास की सबसे अमीर शहजादी थी। बला की खूबसूरत होने के साथ जहांआरा काफी समझदार और विद्वान थीं।
जहांआरा ने फारसी में दो ग्रंथ लिखे। इतिहासकार इरा मुखोटी ने अपनी किताब में लिखा है कि मुगल सल्तनत में बने नए शहर शाहजहानाबाद का नक्शा खुद जहांआरा ने अपनी देखरेख में बनवाया था।
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जहांआरा ने फारसी में दो ग्रंथ लिखे। इतिहासकार इरा मुखोटी ने अपनी किताब में लिखा है कि मुगल सल्तनत में बने नए शहर शाहजहानाबाद का नक्शा खुद जहांआरा ने अपनी देखरेख में बनवाया था।
शाहजहानाबाद के बाद नए शहर की 19 में से पांच इमारतें भी जहांआरा ने अपनी निगरानी में बनवाईं, जिसे अब दिल्ली कहा जाता है। पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक को भी जहांआरा ने ही बनवाया था।
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शाहजहानाबाद के बाद नए शहर की 19 में से पांच इमारतें भी जहांआरा ने अपनी निगरानी में बनवाईं, जिसे अब दिल्ली कहा जाता है। पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक को भी जहांआरा ने ही बनवाया था।
जब शाहजहां मुगल सल्तनत की गद्दी पर बैठे तो उन्होंने बादशाह की हैसियत से अपनी बेटी जहांआरा को सालाना 6 लाख रुपये वजीफा देने का ऐलान किया, जो बहुत बड़ी रकम थी।
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जब शाहजहां मुगल सल्तनत की गद्दी पर बैठे तो उन्होंने बादशाह की हैसियत से अपनी बेटी जहांआरा को सालाना 6 लाख रुपये वजीफा देने का ऐलान किया, जो बहुत बड़ी रकम थी।
सालाना 6 लाख रुपए वजीफे के अलावा जहांआरा को एक लाख अशर्फियां, चार लाख रुपए नकद और तमाम जागीरें भी दी गईं थीं। जिनमें सूरत का बंदरगाह भी शामिल था, जिससे होने वाली सारी आमदनी पर जहांआरा का हक था।
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सालाना 6 लाख रुपए वजीफे के अलावा जहांआरा को एक लाख अशर्फियां, चार लाख रुपए नकद और तमाम जागीरें भी दी गईं थीं। जिनमें सूरत का बंदरगाह भी शामिल था, जिससे होने वाली सारी आमदनी पर जहांआरा का हक था।
उसके बाद जहांआरा की सालाना आमदनी बढ़ाकर 30 लाख रुपये सालाना कर दी गई, जो उस जमाने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। वह न सिर्फ मुगल साम्राज्य बल्कि दुनिया की सबसे अमीर शहजादी बन गईं थीं।
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उसके बाद जहांआरा की सालाना आमदनी बढ़ाकर 30 लाख रुपये सालाना कर दी गई, जो उस जमाने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। वह न सिर्फ मुगल साम्राज्य बल्कि दुनिया की सबसे अमीर शहजादी बन गईं थीं।
मां मुमताज महल के निधन के बाद उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा जहांआरा को दिया गया, बाकी आधा हिस्सा दूसरे भाई-बहनों में बराबर-बराबर बांट दिया गया। इससे जहांआरा की दौलत और बढ़ गई।
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मां मुमताज महल के निधन के बाद उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा जहांआरा को दिया गया, बाकी आधा हिस्सा दूसरे भाई-बहनों में बराबर-बराबर बांट दिया गया। इससे जहांआरा की दौलत और बढ़ गई।
बला की खूबसूरत और अकूत दौलत की मालकिन होने के बावजूद जहांआरा ताउम्र कुंवारी रही, उनकी शादी नहीं हुई। इतिहासकारों के मुताबिक इसकी वजह उनके पिता शाहजहां थे, जिनका मानना था कि अगर जहांआरा ने शादी की तो सल्तनत में दामाद को हिस्सा देना पड़ेगा और इससे साम्राज्य पर बुरा असर पड़ेगा।
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बला की खूबसूरत और अकूत दौलत की मालकिन होने के बावजूद जहांआरा ताउम्र कुंवारी रही, उनकी शादी नहीं हुई। इतिहासकारों के मुताबिक इसकी वजह उनके पिता शाहजहां थे, जिनका मानना था कि अगर जहांआरा ने शादी की तो सल्तनत में दामाद को हिस्सा देना पड़ेगा और इससे साम्राज्य पर बुरा असर पड़ेगा।
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