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इन 7 चीजों-व्यक्तियों को पैर नहीं लगना चाहिए, बनेंगे पाप के भागीदार, आचार्य चाणक्य ने दी है साफ चेतावनी

Written By: Arti Azad
Published : Sep 27, 2025 05:19 pm IST,  Updated : Sep 27, 2025 05:22 pm IST
आचार्य चाणक्य की नीतियां आपके जीवन को सही दिशा देने की ताकत रखती हैं। चाणक्य नीति में बहुत सी बातें कहीं गई हैं। इसके अनुसार हमारे जीवन में कुछ ऐसे लोग और वस्तुएं होती हैं, जिन्हें गलती से भी कभी पैरों से नहीं छूना चाहिए। आज हम ऐसी आपको 7 चीजों और व्यक्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें पैर लगना पाप के समान माना गया है।
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आचार्य चाणक्य की नीतियां आपके जीवन को सही दिशा देने की ताकत रखती हैं। चाणक्य नीति में बहुत सी बातें कहीं गई हैं। इसके अनुसार हमारे जीवन में कुछ ऐसे लोग और वस्तुएं होती हैं, जिन्हें गलती से भी कभी पैरों से नहीं छूना चाहिए। आज हम ऐसी आपको 7 चीजों और व्यक्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें पैर लगना पाप के समान माना गया है।
पादाभ्यां न स्पृशेदग्निं गुरुं ब्राह्मणमेव च। नैव गां न कुमारी च न वृद्धं न शिशु तथा।।
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पादाभ्यां न स्पृशेदग्निं गुरुं ब्राह्मणमेव च। नैव गां न कुमारी च न वृद्धं न शिशु तथा।।
यह चाणक्य नीति के सातवें अध्याय का छठे श्लोक है, जो अथर्ववेद के आधार पर लिखा गया है। इस श्लोक का यह अर्थ है कि हमें कभी भी आग, गुरुओं, ब्राह्मण, गाय, कन्या, बुजुर्गों और बच्चों को पैरों से नहीं छूना चाहिए। चलिए जानते हैं क्यों इन चीजों और व्यक्तियों को पैरों से क्यों नहीं छूना चाहिए।
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यह चाणक्य नीति के सातवें अध्याय का छठे श्लोक है, जो अथर्ववेद के आधार पर लिखा गया है। इस श्लोक का यह अर्थ है कि हमें कभी भी आग, गुरुओं, ब्राह्मण, गाय, कन्या, बुजुर्गों और बच्चों को पैरों से नहीं छूना चाहिए। चलिए जानते हैं क्यों इन चीजों और व्यक्तियों को पैरों से क्यों नहीं छूना चाहिए।
साधु-संतों भारतीय संस्कृति की अहम धूरी माने जाते हैं। ये सदियों के ज्ञान और परंपरा को सहेजकर आगे बढ़ाते हैं। वहीं, ब्राह्मणों से ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। उन्हें भोजन कराकर और पैर छूकर उनसे आशीर्वाद मांगा जाता है। चाणक्य नीति में कहा गया है कि इन लोगों का अपमान करने से घर में सुख-समृद्धि नहीं आता।
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साधु-संतों भारतीय संस्कृति की अहम धूरी माने जाते हैं। ये सदियों के ज्ञान और परंपरा को सहेजकर आगे बढ़ाते हैं। वहीं, ब्राह्मणों से ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। उन्हें भोजन कराकर और पैर छूकर उनसे आशीर्वाद मांगा जाता है। चाणक्य नीति में कहा गया है कि इन लोगों का अपमान करने से घर में सुख-समृद्धि नहीं आता।
सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। कहते हैं कि गाय की सेवा करने से देवताओं की पूजा करने के बराबर फल मिलता है। ऐसे में गाय को पैर से छूना 33 कोटी देवी-देवताओं का अपमान करने के समान है। जिसे चाणक्य ने महापाप कहा है।
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सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। कहते हैं कि गाय की सेवा करने से देवताओं की पूजा करने के बराबर फल मिलता है। ऐसे में गाय को पैर से छूना 33 कोटी देवी-देवताओं का अपमान करने के समान है। जिसे चाणक्य ने महापाप कहा है।
हिंदू धर्म में घर के बुजुर्गों को अहम स्थान दिया गया है, जिनका आशीर्वाद घर को खुशहाल करता है। ऐसे में घर के बुजुर्गों को पैर लगाना ईश्वर का अपमान करने के समान बताया गया है।
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हिंदू धर्म में घर के बुजुर्गों को अहम स्थान दिया गया है, जिनका आशीर्वाद घर को खुशहाल करता है। ऐसे में घर के बुजुर्गों को पैर लगाना ईश्वर का अपमान करने के समान बताया गया है।
छोटे बच्चे दिल के साफ और मासूम होते हैं। उन्हें पैर से छूना भगवान का अपमान करने के समान है। चाणक्य नीति में कहा गया है कि बच्चों के साथ बुरा व्यवहार करने वाले और जानबूझकर उन्हें मारने वालों को ईश्वर भी सजा देता है।
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छोटे बच्चे दिल के साफ और मासूम होते हैं। उन्हें पैर से छूना भगवान का अपमान करने के समान है। चाणक्य नीति में कहा गया है कि बच्चों के साथ बुरा व्यवहार करने वाले और जानबूझकर उन्हें मारने वालों को ईश्वर भी सजा देता है।
सनातन धर्म ग्रंथों में आग को देवता का स्थान दिया गया है। यह पंचतत्वों में से एक तत्व है, जिससे मानव शरीर बना है। हर भारतीय हिंदू परिवारों में सुबह-शाम दीपक जलाने की परंपरा है। किसी भी शुभ काम के दौरान दीपों को जलाकर या हवन आदि अनुष्ठान किया जाता है। अग्नि को साक्षी मानकर विवाह संपन्न होते हैं। ऐसे में इसे पैर से छूना देवताओं का अपमान बताया गया है।
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सनातन धर्म ग्रंथों में आग को देवता का स्थान दिया गया है। यह पंचतत्वों में से एक तत्व है, जिससे मानव शरीर बना है। हर भारतीय हिंदू परिवारों में सुबह-शाम दीपक जलाने की परंपरा है। किसी भी शुभ काम के दौरान दीपों को जलाकर या हवन आदि अनुष्ठान किया जाता है। अग्नि को साक्षी मानकर विवाह संपन्न होते हैं। ऐसे में इसे पैर से छूना देवताओं का अपमान बताया गया है।
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी पहले बताया गया है। गुरु ही सफलता का सही मार्ग बताते हैं। ऐसे में गुरु को गलती से भी पैर लग जाना महापाप की श्रेणी में आता है। कहा जाता है कि गुरु को पैर से स्पर्श करने से आपका अशुभ हो सकता है।
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भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी पहले बताया गया है। गुरु ही सफलता का सही मार्ग बताते हैं। ऐसे में गुरु को गलती से भी पैर लग जाना महापाप की श्रेणी में आता है। कहा जाता है कि गुरु को पैर से स्पर्श करने से आपका अशुभ हो सकता है।
हिंदू धर्म में छोटी बच्चियों को देवी दुर्गा का का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि में कुमारी पूजन का विधान है। साधक माता का आशीर्वाद पाने के लिए कंजकों को भोजन कराते हैं। ऐसे में किसी कन्या को पैर से छूना या ठोकर मारना देवी का अपमान करने के समान होता है।
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हिंदू धर्म में छोटी बच्चियों को देवी दुर्गा का का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि में कुमारी पूजन का विधान है। साधक माता का आशीर्वाद पाने के लिए कंजकों को भोजन कराते हैं। ऐसे में किसी कन्या को पैर से छूना या ठोकर मारना देवी का अपमान करने के समान होता है।
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