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Ratna Astrology: पुखराज के साथ भूलकर भी न पहनें ये 4 रत्न, रुक जाएगी तरक्की

Published : May 21, 2026 01:17 pm IST,  Updated : May 21, 2026 01:19 pm IST
रत्न शास्त्र के अनुसार, पुखराज देवगुरु बृहस्पति का रत्न है। कहते हैं इस रत्न को धारण करने से गुरु ग्रह के शुभ प्रभावों में वृद्धि होती है। जिससे करियर और मैरिज लाइफ में काफी अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुखराज रत्न कुछ रत्नों के साथ धारण करना अशुभ माना जाता है। चलिए जानते हैं ये कौन से रत्न हैं।
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रत्न शास्त्र के अनुसार, पुखराज देवगुरु बृहस्पति का रत्न है। कहते हैं इस रत्न को धारण करने से गुरु ग्रह के शुभ प्रभावों में वृद्धि होती है। जिससे करियर और मैरिज लाइफ में काफी अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुखराज रत्न कुछ रत्नों के साथ धारण करना अशुभ माना जाता है। चलिए जानते हैं ये कौन से रत्न हैं।
हीरा: पुखराज के स्वामी गुरु हैं तो हीरे के स्वामी शुक्र हैं। दोनों ग्रहों में शत्रुता का संबंध है इसलिए पुखराज और हीरे को साथ में पहनने से मना किया जाता है। अगर ये दोनों रत्न एक साथ पहन लेते हैं तो इससे वैवाहिक जीवन में तनाव और सुख-सुविधाओं में कमी आने लगती है।
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हीरा: पुखराज के स्वामी गुरु हैं तो हीरे के स्वामी शुक्र हैं। दोनों ग्रहों में शत्रुता का संबंध है इसलिए पुखराज और हीरे को साथ में पहनने से मना किया जाता है। अगर ये दोनों रत्न एक साथ पहन लेते हैं तो इससे वैवाहिक जीवन में तनाव और सुख-सुविधाओं में कमी आने लगती है।
नीलम: नीलम और पुखराज दोनों ही बेहद शक्तिशाली और उग्र रत्न हैं। ऐसे में अगर इन दोनों को एक साथ धारण करते हैं तो इससे मानसिक तनाव काफी बढ़ सकता है। साथ ही बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं। यही कारण है कि इन दोनों रत्नों को साथ में पहनने से मना किया जाता है।
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नीलम: नीलम और पुखराज दोनों ही बेहद शक्तिशाली और उग्र रत्न हैं। ऐसे में अगर इन दोनों को एक साथ धारण करते हैं तो इससे मानसिक तनाव काफी बढ़ सकता है। साथ ही बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं। यही कारण है कि इन दोनों रत्नों को साथ में पहनने से मना किया जाता है।
गोमेद: गोमेद राहु का रत्न है और ज्योतिष में गुरु-राहु के मिलने से 'चांडाल दोष' बनता है। इसलिए पुखराज के साथ गोमेद धारण करने से मना किया जाता है क्योंकि व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित हो जाती है। जिससे मान-सम्मान को ठेस पहुंच सकती है।
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गोमेद: गोमेद राहु का रत्न है और ज्योतिष में गुरु-राहु के मिलने से 'चांडाल दोष' बनता है। इसलिए पुखराज के साथ गोमेद धारण करने से मना किया जाता है क्योंकि व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित हो जाती है। जिससे मान-सम्मान को ठेस पहुंच सकती है।
पन्ना: ज्योतिष शास्त्र में पन्ना और पुखराज का मेल भी शुभ नहीं माना जाता है। कहते हैं इन दोनों रत्न को साथ पहनने से व्यक्ति काफी ओवरथिंकिंग करने लगता है। जिससे नुकसान होने की संभावना रहती है। यही कारण है कि पन्ना और पुखराज को भी साथ में धारण करने से मना किया जाता है।
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पन्ना: ज्योतिष शास्त्र में पन्ना और पुखराज का मेल भी शुभ नहीं माना जाता है। कहते हैं इन दोनों रत्न को साथ पहनने से व्यक्ति काफी ओवरथिंकिंग करने लगता है। जिससे नुकसान होने की संभावना रहती है। यही कारण है कि पन्ना और पुखराज को भी साथ में धारण करने से मना किया जाता है।
पुखराज के साथ मूंगा, माणिक्य और मोती रत्न बेझिझक धारण कर सकते हैं क्योंकि इनके स्वामी ग्रहों के साथ गुरु के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। लेकिन यहां ये भी सुझाव है कि कोई भी रत्न पहनने से पहले एक बार किसी ज्योतिषी को अपनी कुंडली जरूर दिखा लें।
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पुखराज के साथ मूंगा, माणिक्य और मोती रत्न बेझिझक धारण कर सकते हैं क्योंकि इनके स्वामी ग्रहों के साथ गुरु के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। लेकिन यहां ये भी सुझाव है कि कोई भी रत्न पहनने से पहले एक बार किसी ज्योतिषी को अपनी कुंडली जरूर दिखा लें।
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