अहमदाबाद: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आज अहमदाबाद के अडानी विद्या मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि मुझे आज यहां आकर पता लगा कि शिक्षा के क्षेत्र में अडानी फाउंडेशन कितना योगदान कर रहा है। यहां आप जैसे बेटे और बेटियां ज्ञान की ज्योति जला रहे हैं, इसलिए यहां आकर मुझे बहुत खुशी हुई।
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उन्होंने कहा कि हमारे देश में ऐसी-ऐसी प्रतिभाएं हैं, जिनमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अवसर नहीं मिलने की वजह से वह आगे नहीं बढ़ पाते और प्रतिभा का परिचय नहीं दे पाते। वह दुनिया की भीड़ में समाप्त हो जाते हैं। अडानी फाउंडेशन ने आप सभी को चुना, जिनमें आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं। आपके लिए धन और साधन परेशानी ना बन पाए, इसके लिए अडानी फाउंडेशन के काम को बहुत बधाई देता हूं।
बालक किस उतार चढ़ाव से गुजरता है, मैं इस मनोविज्ञान को जानता हूं: राज्यपाल
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, "मैंने 35 सालों तक बालकों को पढ़ाने का काम किया। मेरी प्रीति अडानी से खुलकर बात हुई। आप एक डे स्कूल में हैं। मैं जो चलाता हूं वो रेजीडेंसियल स्कूल है। मेरे पास गुरुकुल में 5000 बेटे और बेटियां हैं। आप सब बालकों के जीवन में क्या परिस्थितियां आती हैं और किस उतार चढ़ाव से बालक गुजरता है, मैं इस मनोविज्ञान को जानता हूं। मेरे गुरुकुल आवासीय हैं और वहां बालक की घर की तरह रहने की आदत बनती है। सुबह 5 बजे जागने से लेकर रात के शयन तक उनकी पूरी दिनचर्या होती है।"
जीवन में कभी भी हीन भावना मत आने देना: राज्यपाल
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बच्चों से कहा, "जिंदगी में पहली बात ये मानना कि अपने जीवन में कभी भी हीन भावना मत आने देना। आप ये मत सोचना कि हम एक ऐसे सामान्य परिवार में पैदा हुए हैं, जहां हमें बहुत बड़े मकान नहीं मिले, लक्जरी गाड़ियां नहीं मिलीं, अमीरों की तरह वस्त्र नहीं मिले। कभी मन में ये विचार नहीं लाना। भगवान जब किसी भी बालक को दुनिया में भेजता है, उसके सुखी जीवन यापन के लिए इतनी शक्ति देकर भेजता है कि अगर वो बालक ईमानदारी से मेहनत करे तो उसके लिए सब तरह के रास्ते खुलते चले जाते हैं।"
राज्यपाल ने कहा, "ये बात मैं आपके मनोरंजन के लिए नहीं कह रहा। इतिहास साक्षी है कि जिन बालकों ने शुरू से मेहनत की, संस्कारवान बने, उन्हें दुनिया की ताकत बढ़ने से नहीं रोक सकती। अडानी विद्या मंदिर में एडमिशन के लिए आप बच्चों ने रिटेन टेस्ट पास किया। वो रिटेन पास क्यों कर पाए क्योंकि आप बच्चों ने उसके लिए मेहनत की थी। आप जैसे और भी बच्चे यहां के टेस्ट में बैठे होंगे। लेकिन उन्होंने इतनी मेहनत नहीं की कि वो यहां प्रवेश ले पाते।"
राज्यपाल ने बच्चों को एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन की कहानी सुनाई
राज्यपाल ने कहा, "इस देश में एक ऐसे राष्ट्रपति हुए जिनका नाम एपीजे अब्दुल कलाम था। आपको पता है कि वो किस घर में पैदा हुए। उनके पिता मछुआरे थे। वो सरकारी स्कूल में पढ़ते थे। उसमें कोई आधुनिक सुविधाएं नहीं थीं। उनके पिता फीस के लिए भी पैसे नहीं दे पाते थे। ये कभी-कभी एक दोस्त के घर जाते थे और उसके वस्त्र और व्यवहार देखकर महसूस करते थे कि वो बहुत गरीब हैं। उनके दोस्त के पिता, जो पुजारी थे, वे उनकी फीस कभी-कभी भरते थे।"
राज्यपाल ने कहा, "कलाम ने किसी तरह टूटी साइकिल खरीदी और उस पर वो अखबार बेचते थे। उससे जो पैसा मिलता, उससे वो अपनी ड्रेस सिलाते और बुक्स का प्रबंध करते। जब उन्होंने 12वीं पास की और आगे पढ़ने की इच्छा व्यक्त की तो उनके पिता ने कहा कि मेरे पास पैसा नहीं हैं। उस दौरान इनकी बड़ी बहन ने कहा कि मेरे ससुराल वालों ने जो आभूषण बनवाए थे, उन्हें मै बेच दूंगी। उससे जो पैसे मिला, उससे कलाम को अगली शिक्षा के लिए एडमिशन मिला। इतनी मेहनत करके वो देश के वैज्ञानिक बने। आज जिस मिसाइल ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए हैं, वो उसी गरीब बालक की बदौलत है।"