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गुजरात: दाहोद के मनरेगा घोटाले में मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के दूसरे बेटे को भी गिरफ्तार किया गया, कुल 11 लोग पकड़े गए

 Reported By: Nirnay Kapoor, Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : May 19, 2025 02:51 pm IST,  Updated : May 19, 2025 02:52 pm IST

गुजरात के दाहोद मनरेगा घोटाले में गुजरात के मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के दूसरे पुत्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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मंत्री पुत्र किरण खाबड़ Image Source : INDIA TV

दाहोद: गुजरात के दाहोद मनरेगा घोटाले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस ने गुजरात के मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के दूसरे पुत्र को भी गिरफ्तार कर लिया है। मंत्री पुत्र किरण खाबड़ समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में धानपुर के टीडीओ और दो एपीओ को भी गिरफ्तार किया गया है। 

बता दें कि मनरेगा योजना में 71 करोड़ के घोटाले की फरियाद हुई थी। मंत्री के दोनों पुत्रों के नाम दो एजेंसी थी। 2 दिन पहले ही इस मामले में मंत्री के बड़े पुत्र बलवंत खाबड़ को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, गुजरात के दाहोद जिले में मनरेगा योजना में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। देवगढ़ बारिया तालुका के धनपुर और तीन अन्य गांवों में 2021 से 2025 के बीच सड़कों के निर्माण में गड़बड़ी पाई गई है। आरोप है कि 35 एजेंसियों ने मिलकर 71 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया है। इस मामले की जांच डीएसपी भंडारी कर रहे थे। शिकायत में पंचायत मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के बेटों बलवंत खाबड़ और किरण खाबड़ का नाम भी शामिल था। बुधवार को बलवंत खाबड़ ने दाहोद कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी, जिसे उन्होंने बाद में वापस ले लिया। इसके बाद आज खबर आई है कि बलवंत खाबड़ और टीडीओ (तालुका विकास अधिकारी) दर्शन पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में बच्चूभाई खाबड़ के दूसरे पुत्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

क्या है मनरेगा योजना?

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारत सरकार की ओर से 7 सितंबर, 2005 को लागू किया गया एक कानून है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीड मजदूरी रोजगार प्रदान करना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना, टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण करना और महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करना है। मनरेगा मुख्य रूप से ग्राम पंचायतों की ओर से लागू किया जाता है और ठेकेदारों की भागीदारी प्रतिबंधित है।

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