गुजरात सीआईडी (अपराध) ने देश के कई राज्यों में थोक बुकिंग के माध्यम से जंगल सफारी परमिट की कृत्रिम कमी पैदा करने और फिर इस परमिट को 'काला बाजार' में ऊंचे दामों पर बेचने का गिरोह चलाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि मामले की जांच के बाद गांधीनगर स्थित 'साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ द सीआईडी-क्राइम' ने अजय कुमार चौधरी व अरविंद उपाध्याय नाम के दो लोगों को दिल्ली से गिरफ्तार किया और उन्हें गुजरात ले आए।
देश के 6 बड़े जंगल थे निशाने पर
विज्ञप्ति के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि दोनों आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर गुजरात के गिर जंगल सफारी, राजस्थान के रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी बाघ अभयारण्य, उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, असम के काजीरंगा और मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य के ऑनलाइन परमिट की भारी बुकिंग की थी।
जांच एजेंसी ने बताया कि इस गिरोह के तहत बिहार के मूल निवासी चौधरी व उपाध्याय फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर इन राष्ट्रीय उद्यानों/बाघ अभयारण्यों के लिए ऑनलाइन सफारी परमिट थोक में बुक करते थे, जिससे अंततः परमिट की कमी हो जाती थी और असली पर्यटक परमिट से वंचित रह जाते थे।
विज्ञप्ति में बताया गया कि फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर आधिकारिक वेबसाइटों से थोक में परमिट खरीदने के बाद दोनों उन्हें 'ट्रैवल एजेंटों' को बेच देते थे, जो जंगल सफारी की तलाश में आने वाले पर्यटकों को ये पक्की बुकिंग ऑफर करते थे और उन्हें बहुत ऊंची कीमतों पर परमिट खरीदने के लिए मजबूर करते थे।
गिर के 12,000 परमिट बेचे
जांचकर्ताओं के अनुसार, चौधरी व उपाध्याय ने आधिकारिक वेबसाइट के नाम से मिलती-जुलती एक फर्जी वेबसाइट बनाई थी, ताकि वे धोखाधड़ी से अनजान पर्यटकों से बुकिंग ले सकें और फिर अवैध रूप से हासिल किए गए परमिट उन्हें ऊंची कीमतों पर बेच सकें। विज्ञप्ति में बताया गया कि अब तक दोनों आरोपियों ने अकेले गिर जंगल सफारी के लगभग 12,000 परमिट बेचे हैं और भुगतान की पुष्टि करने वाले लगभग 8,600 ईमेल भी उनके कंप्यूटर से बरामद किए गए हैं। (इनपुट- भाषा)
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