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सूरत की हीरा फैक्ट्री में 118 मजदूरों को किसने जहर देकर मारने की कोशिश की? पुलिस ने किया मामले का पर्दाफाश

 Published : Apr 12, 2025 02:42 pm IST,  Updated : Apr 12, 2025 02:54 pm IST

डीसीपी ने बताया कि कुछ समय बाद निकुंज को कुछ गलत होने का अहसास हुआ और उसे लगा कि साथी श्रमिकों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है तो उसने पानी में दुर्गंध आने की बात अपने मैनेजर को बताई और पुलिस के शक के घेरे में आ गया और पकड़ा गया।

पुलिस के शिकंजे में आरोपी निकुंज- India TV Hindi
पुलिस के शिकंजे में आरोपी निकुंज Image Source : INDIA TV

सूरतः सूरत की हीरा फैक्ट्री के वॉटर कुलर में जहर मिलाकर 118 श्रमिकों की सामूहिक हत्या की कोशिश के मामले का पर्दाफाश हो गया है। गुत्थी सुलझाते हुए सूरत की कापोड्रा पुलिस ने कारखाने में काम करने वाले को युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने खुलासा किया है कि कर्ज बढ़ जाने से वह खुद आत्महत्या करने के लिए जहर का पैकेट खरीदा था पर हिम्मत नहीं जुटा पाया और डर के मारे जहर का पैकेट वॉटर कूलर में डाल दिया।

31 मार्च को आरोपी ने खरीदा था जहर

सूरत के जॉन 1 डीसीपी आलोक कुमार ने बताया निकुंज देव मुरारी गिरफ्तार किया है। वह फैक्ट्री के मुख्य मेनेजर का रिश्तेदार है। उसी ने 31 मार्च को जहर का पैकेट खरीदा था। 9 मार्च को सुबह उसी ने जहर का पैकेट कारखाने में पानी के टैंक में पैकेट डाल दिया था। उसके बाद काम पर आए कुछ श्रमिकों ने कूलर से पानी की बोतल भरी तो कुछ देर बाद उसी ने फैक्ट्री मैनेजर को पानी में दुर्गंध आने की शिकायत की थी और श्रमिकों को पानी पीने से रोका। पानी पीने वाले श्रमिकों की तबियत बिगड़ने लगी। कूलर को खोलकर देखा गया तो अंदर से जहर का पैकेट बरामद हुआ। श्रमिकों को जहर का असर दिखने लगा। तबीयत बिगड़ने से सभी श्रमिकों को अस्पताल ले जाया गया। 

पुलिस की चार टीमें मामले की कर रही थी जांच

कूलर के पास सीसीटीवी नहीं होने की वजह से तुरंत इस बात का पता नहीं लगा कि जहर का पैकेट पानी की टंकी में किसने डाला था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चार अलग अलग टीम बनाई और चारों दिशाओं में जांच का डायरा बढ़ाया। आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और निकुंज को गिरफ्तार कर लिया।

कैसे पकड़ा पकड़ा गया आरोपी

सूरत जॉन 1 डीसीपी आलोक कुमार ने बताया कि दुर्गंध की शिकायत सबसे पहले निकुंज ने की थी, दूसरे किसी भी श्रमिक को दुर्गंध महसूस नहीं हुई थी। इस लिए उस पर संदेह हुआ। पहली टीम उनसे पूछताछ कर रही थी। दूसरी टीम ने जहर के पैकेट पर बैच नंबर के जरिए पड़ताल शुरू की। पुलिस को उसमें कामयाबी मिली। जिस दुकान से जहर का पैकेट बेचा गया था। उस दुकान पर पुलिस पहुंची। दुकान के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो उसमें निकुंज पैकेट खरीदता हुआ दिख रहा था। पुलिस ने जब दुकानदार से पूछताछ की तो उसने बताया कि उन्होंने हमें ऑनलाइन पेमेंट किया था। तब पुलिस उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

अय्याशी पर बहुत पैसे खर्च करता था निकुंज

डीसीपी आलोक कुमार ने बताया कि निकुंज अपनी अय्याशी पर बहुत अधिक खर्च करता था। फैक्ट्री में उसे 20 से 25 हजार वेतन मिलता था। अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए उसने मित्रो से 9 लाख रुपए का कर्ज ले चुका था, जिसे वह चुका नहीं पा रहा था। हताश होकर उसने आत्महत्या करने की ठानी पर और मेडिकल स्टोर से जहर का पैकेट खरीदा। निकुंज आत्महत्या करने की कोशिश बार-बार की पर वह हिम्मत नहीं जुटा पाया। आखिरकार 9 मार्च को फैक्ट्री में जाकर जहर का पैकेट वॉटर कूलर में डाल दिया।

रिपोर्ट: शैलेष चांपानेरिया, सूरत

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