गुजरात में 2026 के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर Bharatiya Janata Party की मजबूत पकड़ को साबित कर दिया है। राज्य की 15 नगर निगमों, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों में हुए चुनावों में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की। रविवार को हुए मतदान के बाद मंगलवार को मतगणना पूरी हुई, जिसमें पार्टी ने कई क्षेत्रों में क्लीन स्वीप करते हुए विपक्ष को पीछे छोड़ दिया।
कौन है ये गुजरात के रमेशभाई भील?
मेहसाणा के रहने वाले रमेशभाई भील की कहानी भारतीय राजनीति में जमीनी कार्यकर्ताओं की ताकत को दर्शाती है। साधारण परिवार से आने वाले रमेशभाई ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा मेहनत और लोगों की सेवा में बिताया। उन्होंने लगभग 25–28 वर्षों तक बीजेपी के स्थानीय कार्यालय में एक सहायक (चपरासी) के रूप में काम किया। इस दौरान वे नेताओं के लिए चाय-पानी की व्यवस्था करना, कार्यालय की देखभाल करना और संगठन के छोटे-बड़े काम संभालना जैसे जिम्मेदारियां निभाते रहे।
टिकट मिलने के पीछे की कहानी
कई वर्षों की निष्ठा और समर्पण को देखते हुए पार्टी ने 2026 के नगर निकाय चुनाव में उन्हें मौका देने का फैसला किया। वार्ड 13 से टिकट मिलने के बाद रमेशभाई ने पूरे जोश के साथ चुनाव प्रचार शुरू किया। परिणामस्वरूप, उन्होंने 4000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की और पार्षद बने। यह जीत सिर्फ एक उम्मीदवार की नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और विश्वास की जीत मानी जा रही है।
जीत के बाद क्या बोले रमेशभाई ?
पार्षद बनने के बाद रमेशभाई ने अपने क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका फोकस बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, पानी, सफाई और शिक्षा पर रहेगा।
गोधरा के मुस्लिम बहुल वार्ड से हिंदू महिला की जीत
गोधरा शहर में एक अनोखा और ऐतिहासिक परिणाम सामने आया है। वार्ड नंबर 7, जिसे पूरी तरह मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है, वहां से पहली बार एक हिंदू महिला उम्मीदवार ने जीत हासिल की। यह क्षेत्र पहले सांप्रदायिक तनावों के लिए जाना जाता था, खासकर 2002 Gujarat riots तक। ऐसे में इस जीत ने सबका ध्यान आकर्षित किया है।
वापी में निर्दलीयों का बीजेपी में विलय
वापी नगर पालिका के वार्ड नंबर 12 में जीतने वाले चार निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव के तुरंत बाद बीजेपी का दामन थाम लिया। इस मौके पर राज्य के कैबिनेट मंत्री Kanubhai Desai और स्थानीय नेता मौजूद रहे। इस घटनाक्रम से साफ है कि चुनाव के बाद भी बीजेपी अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने में जुटी हुई है।