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एम्स की नई स्टडी, फोन और टीवी से बच्चों में बढ़ रहा है ऑटिज्म का खतरा, पैरेंट्स को जरूर ध्यान देना चाहिए

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : May 06, 2026 07:58 am IST,  Updated : May 06, 2026 07:58 am IST

Autism In Children: बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर एम्स की एक नई स्टडी सामने आई है। जिसमें पाया गया है कि जो बच्चे ज्यादा स्क्रीन टाइम बिताते हैं उनमें ऑटिज्म का खतरा ज्यादा पाया गया है। हर पैरेंट को ये रिपोर्ट जरूर पढ़नी चाहिए।

स्क्रीन टाइम से बच्चों में ऑटिज्म- India TV Hindi
स्क्रीन टाइम से बच्चों में ऑटिज्म Image Source : FREEPIK

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानि एम्स की एक नई स्टडी में सामने आया है कि 1 साल से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम से 3 साल की उम्र तक ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉक्टर्स की मानें तो बच्चों की कम उम्र में स्क्रीन के अधिक संपर्क में रहने से  बच्चों के दिमाग के विकास और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय भी बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने को लेकर गाइडलाइन जारी कर चुका है। 

ऑटिज्म को लेकर एम्स की नई स्टडी

एम्स के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉक्टर शेफाली गुलाटी ने बताया कि कई रिसर्च और मेटा-एनालिसिस में देखा गया कि जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम जल्दी शुरू होता है और स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है, उनमें ऑटिज्म के लक्षण ज्यादा देखे जाते हैं। बच्चे जिनकी उम्र 1 साल है और उनका स्क्रीन टाइम ज्यादा था। ऐसे बच्चों में खासतौर से 3 साल तक के लड़के में ऑटिज्म के मामले ज्यादा पाए गए। लड़कियों में भी ऑटिज्म के कुछ लक्षण देखे गए। स्टडी से पता चला है कि जितनी जल्दी और जितनी ज्यादा देर के लिए आपके बच्चे को स्क्रीन टाइम दिया, उन बच्चों में ऑटिज्म के साथ कनेक्शन ज्यादा पाया गया है। इसलिए महत्वपूर्ण है कि स्क्रीन टाइम कम करना है। 

बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर भारत में क्या हैं गाइडलाइंस

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइडलाइंस के मुताबिक 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। 18 महीने से 6 साल के बच्चों के लिए सीमित और एक्टिव स्क्रीन देने की सलाह दी जाती है। वहीं जब बच्चा 7 साल से ज्यादा हो जाए तो स्क्रीन टाइम को अधिकतम 2 घंटे तक सीमित किया जा सकता है। इसके साथ ही माता पिता को बच्चों की एक्टिविटी पर नजर रखना जरूरी है। बच्चे क्या देखकर हैं ये आपको पता होना चाहिए। बच्चों को वही दिखाएं जो उनके लिए सही है। बेहतर होगा कि हम बच्चे से बातें करें, जितना ज्यादा आप बच्चे से बात करेंगे बच्चे का विकास बेहतर होगा।

क्या है ऑटिज्म?

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें बच्चों के व्यवहार, कम्युनिकेशन और सामाजिक संपर्क में अंतर देखा जाता है। कई बार काफी देरी से इसके लक्षण समझ आते हैं। कई बार 12 से 18 महीने में ही बच्चें में इसके संकेत नजर आ जाते हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक हर 31 में से 1 व्यक्ति में ASD पाया जाता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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