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1 मिनट में इससे ज्यादा बार पलकें झपकती हैं तो रहें सतर्क! एक्सपर्ट ने बताया क्यों इसे नजरअंदाज न करें

 Published : Feb 13, 2024 05:51 pm IST,  Updated : Feb 13, 2024 05:51 pm IST

पलकों का ज्यादा झपकना कौन सी बीमारी है? कभी आपने इस बारे में सोचा है। अगर नहीं तो आपको इस बारे में सोचना चाहिए। आइए, जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से।

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blepharospasm Image Source : SOCIAL

कभी आपने अपने पलकों के झपकने पर ध्यान दिया है। अगर नहीं तो आपको इस चीज पर ध्यान देना चाहिए कि पलकों का झपकना क्या है और कब ये आपके लिए चिंता की बात हो सकती है। इसी बारे में हमें डॉ. राजीव दुबे, फिजिशियन, मैक्स बीके हॉस्पिटल, दिल्ली से बात की। उन्होंने बताया कि पलकों का ज्यादा झपकना या फिर फड़फड़ाना (causes symptoms of blepharospasm) असल में न्यूरोलॉजिकल समस्या है। ये जब ज्यादा बढ़ने लगे तो आंखों के लिए दूसरी दिक्कतों का कारण बन सकती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को इस बीमारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

1 मिनट में इससे ज्यादा बार पलकें झपकती हैं तो रहें सतर्क

अधिकांश लोग प्रति मिनट 15 से 20 बार पलकें झपकाते हैं। यह आपकी आंखों को ऑक्सीजन युक्त और नम रखकर और गंदगी को साफ करके स्वस्थ रहने में मदद करता है। हालांकि कुछ स्थितियां हैं जिनके कारण आपकी पलकें कम या ज्यादा बार झपकती हैं और इन्हें नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। तो, आइए जानते हैं क्या है ये बीमारी और किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर को दिखाएं। ब्लेफरोस्पाज्म (blepharospasm) शब्द का प्रयोग पलकों की अनैच्छिक गतिविधियों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। इसमें व्यक्ति को पलकें सिकुड़ने और बंद होने का अनुभव होता है। यह वह स्थिति है जो कि आपके न्यूरो मूवमेंट्स से जुड़े हुए होते हैं।

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ब्लेफरोस्पाज्म का कारण

ब्लेफरोस्पाज्म का कोई खास कारण (blepharospasm causes) नहीं है, लेकिन मस्तिष्क के काम करने के तरीके में बदलाव इसकी बड़ी वजह हो सकती है। हालांकि, इसका मेडिकल कारण ये है कि जब मस्तिष्क की गति सही नहीं होती और कंट्रोल से बाहर होती है तो ये तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करती है जिससे पलकों का झपकना बढ़ जाता है।

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Image Source : SOCIALblepharospasm blinking

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ये लक्षण नजर आए तो डॉक्टर से बात करें

ब्लेफेरोस्पाज्म (symptoms of blepharospasm) आमतौर पर छोटी पलकों के फड़कने से शुरू होता है जो कभी-कभार होता है। समय के साथ, फड़कन अधिक बार हो सकती है और आपकी आंखें पूरी तरह से बंद हो सकती हैं। इससे रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो सकता है, जैसे पढ़ना या गाड़ी चलाना। तो, ऐसी दिक्कत महसूस हो रही हो तो अपने डॉक्टर से जरूर दिखाएं।

(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)

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