1. Hindi News
  2. हेल्थ
  3. सिगरेट नहीं पीने वालों में भी क्यों बढ़ रहा फेफड़ों के कैंसर का खतरा, डॉक्टर से जानें टीबी और लंग कैंसर में अंतर?

सिगरेट नहीं पीने वालों में भी क्यों बढ़ रहा फेफड़ों के कैंसर का खतरा, डॉक्टर से जानें टीबी और लंग कैंसर में अंतर?

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Aug 01, 2025 01:33 pm IST,  Updated : Aug 01, 2025 01:34 pm IST

Lung Cancer In Non Smokers: सिगरेट पीने वालों के अलावा न पीने वालों में भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। डॉक्टर से जानिए फेफड़ों के कैंसर के कारण, टीबी और लंग कैंसर में क्या अंतर होता है?

फेफड़ों के कैंसर और टीबी में अंतर- India TV Hindi
फेफड़ों के कैंसर और टीबी में अंतर Image Source : FREEPIK

फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो धूम्रपान करने वालों और नहीं करने वालों दोनों में हो सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले कई कारक हैं, जिनमें प्रदूषित हवा, रेडॉन गैस, एस्बेस्टस और दूसरे जहरीले रसायन शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा आनुवंशिकता और पुरानी फेफड़ों की बीमारियां भी फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती हैं। लंग कैंसर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने हाल में किए एक रिसर्च में बताया है कि, भारत में लंग कैंसर के शिकार 21 प्रतिशत लोग 50 से कम उम्र के हैं। इनमें से कुछ की उम्र तो 30 वर्ष से भी कम है। बढ़ते वायु प्रदूषण को इसका सबसे प्रमुख कारण माना जा रहा है। 

वायु प्रदूषण की स्थिति यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आज विश्व की 91 प्रतिशत जनसंख्या उन क्षेत्रों में रह रही है जहां वायु प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन के पैमाने से अधिक है। वायु प्रदूषण के कारण पीएम 2.5 कण सीधे सांस द्वारा फेफड़ों में पहुंच जाते हैं, ये प्रदूषक पॉवर प्लांट्स, वाहनों, आग के धुएं और उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जनों से आते हैं। पीएम 2.5 की लगभग 20 मिलिग्राम मात्रा हमारे फेफड़ों को एक सिगरेट जितना और 200 मिलिग्राम 10 सिगरेट जितना नुकसान पहुंचाती है।

डॉ. एस. एम. शुएब जैदी (प्रिंसिपल डायरेक्टर एंड यूनिट हेड, सर्जिकल ओंकोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा) से जब इंडिया टीवी ने बात की तो उन्होंने बताया पैसिव स्मोकर्स भी लंग कैंसर से तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। 

फेफड़ों के कैंसर के लक्षण

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं-

  • लगातार खांसी जो ठीक नहीं होती
  • खांसी में खून आना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • छाती में दर्द
  • वजन कम होना
  • आवाज में बदलाव

फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो धूम्रपान करने वालों और नहीं करने वालों दोनों में हो सकती है। टीबी और फेफड़ों के कैंसर में अंतर को समझना और फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों को पहचानना भी  महत्वपूर्ण है। अगर आपको फेफड़ों के कैंसर के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित इलाज करवाएं। समय पर इलाज से फेफड़ों के कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।

टीबी और फेफड़ों के कैंसर में अंतर

टीबी और फेफड़ों का कैंसर दोनों ही फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारियां हैं, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर भी हैं। 

कारण- टीबी एक बैक्टीरिया के कारण होती है, जबकि फेफड़ों का कैंसर अनियंत्रित कोशिका वृद्धि के कारण होता है।

लक्षण- दोनों बीमारियों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ और छाती में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन टीबी में बुखार और रात में पसीना आना भी आम है।
इलाज- टीबी का इलाज एंटी टीबी दवाओं से किया जाता है, जबकि फेफड़ों के कैंसर का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसे तरीकों से किया जाता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। हेल्थ से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।