दुनिया भर में 1 दिसंबर को 'विश्व एड्स डे' मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को जानलेवा बीमारी एड्स के प्रति जागरूक करना है। दरअसल एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाली महामारी है। हर साल लाखों लोग इस बीमारी के चलते मौत के गर्त में समा जाते हैं।
भारत की बात करें तो हर साल जागरुकता अभियान चलाए जाने के बावजूद इस गंभीर बीमारी को लेकर लोगों के बीच अभी भी कई मिथक कायम है। एड्स के बारे में कहा जाए तो इसके चलते मनुष्य के संक्रमण से लड़ने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। एड्स का कोई पुख्ता इलाज अब तक ईजाद नहीं हो पाया है इसलिए कहा जाता है कि एड्स से बचाव ही इसका इलाज है। हालांकि इसके इलाज को खोजने में वैज्ञानिक लगे हैं औऱ उम्मीद की जाती है कि जल्द ही कुछ न कुछ पुख्ता इलाज मिलेगा जिससे हर साल लाखों एड्स पीड़ितों की जान बचाई जा सकेगी।
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वैज्ञानिक भाषा में कहें तो एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी वायरस है। रोग प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर को होने वाली बीमारियों से बचाती है लेकिन एचआईवी वायरस सीधे हमारे इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है। जिससे कोई भी व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हो जाता है। ये शरीर में जाकर टी सेल्स को खत्म कर देता है। अगर इसका समय पर इलाज नहीं कराया गया तो यह इंफेक्शन बढ़ जाता है और एड्स का कारण बन जाता है।
एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस) एक वायरस है। जो सीधे इम्यून सिस्टम की टी सेल्स पर अटैक करता है। वहीं एड्स की बात करें तो यह एक्वायर्ड इम्यूनो-डिफिशिएंसी सिंड्रोम नाम का एक मेडिकल सिंड्रोम है। जो एचआईवी संक्रमण के बाद सिंड्रोम के रूप में सामने आता है। एचआईवी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो सकता है लेकिन एड्स नहीं हो सकता है।
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-कोई भी टीका या इंजेक्शन लगाने से पहले ध्यान रखें की नीडल यानी सुई बिल्कुल नई हो। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा ना के बराबर हो।
- किसी से भी खून लेने से पहले उसकी जांच करा लें कि वह सुरक्षित है कि नहीं।
-एक से ज्यादा लोगों से यौन या असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बचें। इससे आपको एचआईवी होने का खतरा सबसे अधिक है।
- शेविंग कराते समय हमेशा नई ब्लेड का ही इस्तेमाल करें।
कई लोगों के दिमाग में एचआईवी फैलने की गलत धाराणा है। जानें कैसे नहीं फैलता है एचआईवी।
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