नई दिल्ली: अब ऐसा लगने लगा है कि अयोध्या में राम मंदिर का सपना जल्द पूरा होगा क्योंकि मुसलमान का एक बड़ा तबका राम मंदिर बनाने के समर्थन में है। अयोध्या में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने जलसा-ए-पैगाम-मोहब्बत नाम का कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें शिया और सुन्नी धर्मगुरुओं के अलावा बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के आम लोगों ने भी शिरकत की। सम्मेलन में कहा गया कि मुस्लिम समाज को भाईचारे और अमन का पैगाम देते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में सहयोग करना चाहिए। दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर राजस्थान से मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की खेप पहुंच रही है जिससे लगता है कि राम मंदिर के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इस कार्यक्रम में शरीक हुए लोगों ने कहा कि इस बात के काफी सबूत मिल चुके हैं कि अयोध्या हिंदुओं के आराध्य भगवान राम की जन्मभूमि है। हाईकोर्ट भी फैसला कर चुका इसलिए मुस्लिम समाज को भाईचारे और अमन का पैगाम देते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में सहयोग करना चाहिए। ज्यादातर मौलवियों के पास अयोध्या के लोगों की बात का जबाव नहीं हैं। मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली कहते हैं विवाद तो सुलझना चाहिए। मुसलमान कभी भी राम मंदिर निर्माण के खिलाफ कभी नहीं रहा लेकिन मामला कोर्ट में है। कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार का भी यही दावा है कि यूपी के मुसलमान अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में हैं। रास्ता बातचीत से निकल सकता है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं लेकिन ये भी सही है कि आस्था के मुद्दे अदालतों में हल नहीं होते। आपसी बातचीत से रास्ता निकल जाए तो सबसे अच्छा और ये बात शायद मुसलमान समझने लगे हैं।