झज्जर: मणिपुर के घने जंगलों में उग्रवादियों की गोलियों का शिकार हुए मेजर अमित देसवाल का आज अंतिम संस्कार कर दिया गया लेकिन शहीद बेटे की चिता पर बुजुर्ग पिता ने ऐसी सौगंध उठाई कि सबकी आंखें नम हो गईं। सलाम उस जांबाज को जो वतन के दुश्मनों को सबक सिखाते सिखाते शहीद हो गया और सलाम उस रिटायर्ड फौजी पिता को जो बेटे की शहादत का बदला लेने के दोबारा आर्मी में भर्ती होना चाहता है, अपने छोटे बेटे और पोते को भी फौज में भेजना चाहता है।
झज्जर में शहीद मेजर का अंतिम संस्कार
धू-धू करती लपटें उठीं, चिता की लकड़ियां चटकीं और झज्जर का आसमान गोलियों की सलामी से गूंज उठा। ये सलामी थी हिंद के उस जांबाज बेटे के लिए जो वतन के दुश्मनों से दो दो हाथ करते हुए शहीद हो गया जो अपनी जान कुर्बान करके हमेशा के लिए विदा हो रहा था। ये सलामी थी 21 पैरा, स्पेशल फोर्स के बहादुर जवान मेजर अमित देसवाल के लिए, जिन्होंने अपनी बहादुरी से मणिपुर के उग्रवादियों के दांत खट्टे कर दिए थे। सामने जलती हुई चिता थी और गर्व से भरे चेहरे उस अमर शहीद को नमन कर रहे थे।
'अब पोते को भी भेजूंगा फौज में'
ये तमाम हलचल देखकर दादा की गोद में सब कुछ खामोशी से देख रहे साढ़े तीन साल के मासूम को भी शायद अहसास हो गया कि पापा अब कभी नहीं आएंगे। दो दिनों से बेटे की शहादत का दर्द सीने के अंदर छुपाए बुजुर्ग पिता भी थक गए थे, गला सूख रहा था और जुबान साथ नहीं दे रही थी लेकिन जज्बा फौलादी था। फौज से रिटायर पिता ने कहा 'बेटे का बदला लेने फिर आर्मी में जाऊंगा, छोटे बेटे को भी फौज में भेजूंगा और पोते को भी फौजी बनाऊंगा।'
देखे वीडियो-
आगे की स्लाइड में पढ़िए पूरी खबर-