नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बारे में आज बड़ा खुलासा हुआ है। केजरीवाल ने राम जेठमलानी को अपना निजी केस लड़ने के लिए सरकारी खजाने से 3 करोड़ 86 लाख रूपए देने की मांग की है। अरुण जेटली ने केजरीवाल पर डिफेमेशन का केस किया और इस केस में केजरीवाल ने राम जेठमलानी को हायर किया है और केजरीवाल चाहते हैं कि राम जेठमलानी का बिल दिल्ली सरकार के खजाने से भरा जाए।
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दिल्ली सरकार ने एलजी को लिखी चिट्ठी
दिल्ली सरकार की तरफ से एलजी अनिल बैजल को एक चिट्ठी लिखी गयी है। केजरीवाल की सरकार ने इस चिट्ठी में जेठमलानी की फीस का पेमेंट सरकार के खजाने से करने की मांग की है। इस केस की पैरवी करने के लिए जेठमलानी की फीस 3 करोड़ 86 रुपये बनती है। केजरीवाल की तरफ से राम जेठमलानी 13 बार कोर्ट में पेश हुए थे। जेठमलानी ने एक करोड़ रुपये रिटेनर और हर सुनवाई के लिए 22 लाख रुपये की फीस रखी। केजरीवाल सरकार की तरफ से लीगल बिल का पेमेंट करने की मांग पर एलजी ने कानूनी राय मांगी हैं।
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इससे पहले 21 दिसंबर 2016 को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्टमेंट को भेजे एक नोट में राम जेठमलानी की लीगल फीस का भुगतान करने को कहा था। साथ में ये भी लिखा था कि ये फाइल लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास ना भेजी जाए और सीधे जेठमलानी की फीस भर दी जाए।
पार्टी के प्रचार में भी 97 करोड़ जनता के खजाने से लूटा चुके हैं केजरीवाल
अरविन्द केजरीवाल भी कमाल करते हैं। मानहानि का केस लड़ने के लिए राम जेठमलानी को जनता का करोड़ों रूपए देना चाहते हैं। अरुण जेटली पर झूठे इल्जाम केजरीवाल ने लगाए, जेटली ने केस किया तो इसका खामियाजा जनता क्यों भरे। इसी तरह केजरीवाल ने कई राज्यों में अपनी पार्टी का प्रचार किया और इसके लिए 97 करोड़ जनता के खजाने से लुटा दिए।
केजरीवाल दावा करते हैं कि वो जनता के एक पैसे की बर्बादी नहीं कर होने देंगे, वो सरकारी खजाने को नहीं लुटने देंगे। किसी पर झूठे इल्जामा लगाना और अपनी पार्टी का प्रचार करना कौन से जनसेवा काम है जिसका बिल जनता भरे।