गुवाहाटी: असम में कई जिलों में ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यहां बाढ़ की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। यहां के मकान और खेत डूब चुके हैं। करीब 12.5 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ का पानी भर गया है। हालांकि बाढ़ प्रभावित असम में सेना लोगों की सहायता में जुटी है और उन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है।
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अधिकारियों ने बताया कि सेना ने चिरांग जिले से 200 लोगों को जबकि बोंगाईगांव से 150 लोगों को डूबने से बचाया है। सेना के लोगों ने कोकराझार जिले में एक मेडिकल कैंप लगाया जिसमें 100 मरीजों को सलाह दी गई। सेना के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें मंगलवार देर दोपहर चिरांग और बोंगाईगांव जिलों से मदद का अनुरोध किया गया। त्वरित कार्रवाई करते हुए सेना ने मानवीय सहायता मुहैया कराते हुए चिरांग में एक और बोंगाईगांव में दो बचाव दल भेजे।
असम के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार ने आज कहा कि मोरिगांव, जोरहट और डिब्रूगढ़ जिलों में जलभराव के कारण सड़कें टूट गई हैं, संचार बाधित हो गया है। कोकराझार, जोरहट, बोंगईगांव, डिब्रूगढ़ और गोलाहाट जिलों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के कारण पानी आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहा है।
ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां 18 जिलों में उफान पर हैं, जिसके कारण काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पवित्र वन्यजीव अभयारण्य में पानी भर गया है।
आपदा प्रबंधन प्राधिकार ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिन जिलों में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, ये हैं... लखीमपुर, गोलाघाट, बोंगाईगांव, जोरहट, धेमजी, शिवसागर, बारपेटा, कोकराझार, नौगांव, डिब्रूगढ़, चिरांग, गोआलपाड़ा, तिनसुकिया, धुबरी, मोरीगांव, सोनीतपुर, बिस्वनाथ और दरांग।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ के पानी के कारण एक व्यस्क गैंडा डूब गया था। उसका सिंग सहित कंकाल आज बरामद हुआ है। ऐसा ही एक अन्य गैंडा दो दिन पहले भी मिला था।