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नोटों के सीरियल नंबर से पकड़े जाएंगे बैंक? जानिए नए नोटों का नंबर गेम

 Written By: India TV News Desk
 Published : Dec 14, 2016 06:28 pm IST,  Updated : Dec 14, 2016 06:28 pm IST

नई दिल्ली: क्या नोटों के सीरियल नंबर से काली करेंसी का कुछ सुराग मिल सकता है? जब्त नए नोटों के बंडल के सीरियल नंबर पर आप देखेंगे तो इनके सीक्वेंस में आपको कोई गड़बड़ी नहीं

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नई दिल्ली: क्या नोटों के सीरियल नंबर से काली करेंसी का कुछ सुराग मिल सकता है? जब्त नए नोटों के बंडल के सीरियल नंबर पर आप देखेंगे तो इनके सीक्वेंस में आपको कोई गड़बड़ी नहीं दिखेगी। इसका मतलब ये है कि नए नोटों के इस जखीरे का स्रोत एक ही है जिसका पता दे रहे हैं नोट पर दर्ज सीरियल नंबर। चोर दरवाजे से पुराने नोट के बदले नए नोट एक्सचेंज करने का ये धंधा कहां से चल रहा है, जांच एजेंसियों को इन सीरियल नंबर से ही पता चल जाता है।

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क्या है नये नोटों का नंबर गेम?

लेकिन करेंसी के शातिर अपराधियों ने एक नया खेल रचकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट वालों की परेशानी बढ़ा दी है। जगह-जगह पुलिस, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और इनफोर्समेंट डिपार्टमेंट द्वारा जब्त सारे नए नोट ऐसी हालत में नहीं हैं कि उनके सीरियल नंबर से काले खेल की उस गंगोत्री का पता लगाया जा सके।

करेंसी के क्रिमिनल ने की बंडलों से छेड़छाड़

  • एजेंसियों को जब्त ज्यादातर नए नोट अव्यवस्थित हालत में मिले हैं...
  • ज्यादातर नए नोटों के सीरियल नंबर का सीक्वेंस तोड़ा गया है...
  • ऐसा कोई निशान नहीं छोड़ा गया है कि उन नोटों से बैंक का पता चल सके

नोटों के सीरियल नंबर से पकड़े जाएंगे बैंक?

अगर जब्त किए गए नए नोटों में सीरियल नंबर का सीक्वेंस नहीं तोड़ा गया होता, तो ये पकड़ में आ जाता कि इतने नोट आखिर निकले किस बैंक से हैं। हालांकि जानकार मानते हैं कि रिजर्व बैंक अभी भी ऐसे नोटों का पता लगा सकता है। खुद बैंकवाले भी मानते हैं कि नोटों पर दर्ज सीरियल नंबर नोटों को ट्रेस करने में बड़े मददगार होते हैं लेकिन समस्या नोट तस्करी के नए पैटर्न की है जिसने एजेंसियों के सामने चुनौती पेश कर दी है। असल में रिजर्व बैंक से पैसा बैंकों और एटीएम तक पहुंचने का एक फिक्स्ड रूट है।

क्या चोर दरवाजे को पकड़ना मुश्किल है?

पैसा रिजर्व बैंक से करेंसी चेस्ट के जरिये अलग-अलग बैंकों तक पहुंचता है। अगर आपका सेविंग अकाउंट है तो हर हफ्ते 24 हजार रुपये ही मिलेगा। अगर करेंट अकाउंट है तो आपको हर हफ्ते 50 हजार रुपये मिल सकता है। बैंकों से एटीएम कॉन्ट्रेक्टर पैसों की ढुलाई करते हैं तब जाकर आप 2500 रुपये रोज़ाना एटीएम से निकाल सकते हैं।

नोटों के आम लोगों तक पहुंचने का ये तयशुदा रूट है, जिसमें नोटबंदी के बाद से आम लोगों को ढाई हजार रुपया भी बड़ी मुश्किल से मिल पा रहा है लेकिन नोट तस्करों ने बड़े शातिराना तरीके से नए नोटों के सीरियल नंबर से छेड़छाड़ कर एजेंसियों का काम बढ़ा दिया है।

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