जालंधर: पंजाब में सतलुज यमुना लिंक नहर बनाने के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर भूमि अधिगृहित करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को यहां उनसे पूछा कि अगर उच्चतम न्यायालय का फैसला नहर बनाने के पक्ष में आता है तो वह क्या करेंगे क्योंकि कांग्रेस ने इस्तीफा देने का निर्णय कर लिया है।
जालंधर जिले के शाहकोट विधानसभा क्षेत्र में हलके विच कैप्टन कार्यक्रम के इतर अमरिंदर ने संवाददाताओं से बातचीत में दस्तावेजी साक्ष्य मुहैया कराते हुए कहा, यह मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ही थे जिन्होंने 1978 में एसवाईएल के लिए भमि अधिगृहित किया था। कांग्रेस नेता ने कहा, पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में बादल ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा चार के तहत एसवाईएल के लिए राज्य में 20 फरवरी 1978 को एक अधिसूचना जारी की थी और इसके साथ ही नहर निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मैं मुख्यमंत्री को चुनौती देता हूं कि एसवाईएल के संबंध में उनकी भमिका के बारे में मैं जो कुछ भी कह रहा हूं उससे वह इंकार कर दें या गलत करार दें। मैं यह भी कह रहा हूं कि आपने केवल अपने मित्र देवी लाल (हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री) को खुश करने के लिए इस नहर की आधारशिला रखी थी। कैप्टन ने यह भी कहा, इसके बाद बादल ने देवीलाल को पत्र लिखकर उनसे और तीन करोड़ रुपए की मांग की। इससे पहले वह इस काम के लिए दो करोड़ रुपए ले चुके थे। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच समझौता हुआ था कि हरियाणा पंजाब को पांच करोड रुपए भुगतान करेगा।
कैप्टन ने बताया, बाद में एक मार्च 1978 को हरियाणा विधानसभा में देवीलाल ने दावा किया कि अपने व्यक्तिगत रिश्ते के दम पर उन्होंने बादल को एसवाईएल के लिए पंजाब में भूमि अधिग्रहण करने के लिए मना लिया है। इसी निजी रिश्ते की कसौटी पर बादल ने पंजाब के हितों को ताक पर रख दिया। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इतना ही नहीं, देवीलाल को खुश करने के लिए बादल ने आधारशिला रखे जाने के दौरान उन्हें अध्यक्ष के तौर पर बुलाया। बाद में चुनाव में दोनों की सरकार चली गई।
उच्चतम न्यायालय के नहर के पक्ष में फैसला आने के बाद कैप्टन और विधायकों के इस्तीफे के ऐलान पर बादल की आलोचना के बारे में पूछने पर कैप्टन ने आरोप लगाया, मुख्यमंत्री, दरअसल एसवाईएल के अधारशिला का आरोप कांग्रेस पर लगाना चाहते हैं जबकि सचाई यह है कि यह बादल ही थे जिन्होंने 1978 में न केवल एसवाईएल के लिए भूमि अधिग्रहण किया और हरियाणा से पैसे भी लिए। उन्होंने पूछा, अगर फैसला पंजाब के पक्ष में नहीं आता है तो बादल बताएं कि वह क्या करेंगे। हां, हमने फैसले वाले दिन ही इस्तीफा देने का निर्णय कर लिया है। मुख्यमंत्री सूबे की आवाम को बताएं कि वह इस मसले पर क्या करेंगे। इस दौरान कैप्टन ने हरियाणा विधानसभा में दिए गए देवीलाल के बयान, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की भूमि अधिग्रहण वाली अधिसूचना तथा देवीलाल को लिखे गए पत्र का दस्तावेजी साक्ष्य भी मुहैया करवाया।