नई दिल्ली/पेइचिंग: अरुणाचल प्रदेश में इन्फ्रस्ट्रक्चर बढ़ाए जाने को लेकर चीन ने भारत को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि भारत को अरुणाचल में आधारभूत ढांचे के निर्माण को लेकर 'सावधानी' और 'संयम' बरतना चाहिए। चीन का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ढोला और सदिया घाट के बीच बने असम से अरुणाचल को जोड़ने वाले भारत के सबसे लंबे पुल भूपेन हजारिका ब्रिज का लोकार्पण किया था। ये भी पढ़ें: इस ब्लड ग्रुप के लोग हैं एलियंस, कहीं आप भी तो उनमें से एक नहीं
चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि चीन-भारत की सीमा के उत्तरी हिस्से पर चीन की स्थिति तर्कयुक्त और स्पष्ट है। अरुणाचल में यह पहली बड़ी विनिर्माण योजना है। मंत्रालय ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं अंतिम निर्णय से पहले सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भारत की तरफ से विभिन्न मुद्दों पर सावधानी और संयम बरता जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्रीय शांति की रक्षा करने और विवाद को सुलझाने के लिए भारत चीन के साथ मिलकर काम करेगा। चीन ने बिना पुल का जिक्र किए हुए कहा कि दोनों देशों को परामर्श और वार्ता के माध्यम से सीमा विवाद सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।
यह पुल तीन लेन का है। 9.15 किलोमीटर लंबे इस पुल का निर्माण ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर किया गया है। यह पुल असम के ढोला को अरुणाचल के सादिया से जोड़ेगा। इस पुल के बनने से असम के राष्ट्रीय राजमार्ग-37 में रूपाई और अरुणाचल प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग-52 में मेका/रोईंग के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इन दो स्थानों के बीच यात्रा करने में वर्तमान में छह घंटे का समय लगता है, जो अब घटकर एक घंटा हो जाएगा।
अभी तक ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए केवल दिन के समय नौका का ही उपयोग किया जाता था और बाढ़ के दौरान यह भी संभव नहीं होता था। शुक्रवार को इस पुल का उद्घाटन होने के बाद ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के लिए 247 संपर्क सुनिश्चित हो जाएगा। इससे प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल में 10 लाख रुपये तक की बचत होगी।
यह पुल ऊपरी असाम के ब्रह्मपुत्र और अरुणाचल प्रदेश के संपूर्ण आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान देगा। साथ ही राज्य में चल रही कई पणबिजली परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा। ढोला-सदिया पुल परियोजना की कुल लंबाई दोनों तरफ की सड़कों को मिलाकर कुल 28.50 किलोमीटर है और पुल की लंबाई 9.15 किलोमीटर है। इस पुल का निर्माण बीओटी एन्यूटी द्वारा किया गया, जिसकी कुल लागत 2,056 करोड़ रुपये है। इस पुल का उद्देश्य असम और अरुणाचल प्रदेश के लोगों को एक दूसरे के करीब लाना है।
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