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Constitution Day: आज का दिवस बाबासाहेब अम्बेडकर को नमन करने का है- PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में हमारे लिए आवश्यक है कि कर्तव्य के पथ पर आगे बढ़ें ताकि अधिकारों की रक्षा हो। महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में आधिकारों को लिए लड़ते हुए भी, कर्तव्यों के लिए तैयार करने की कोशिश की थी। अच्छा होता अगर देश के आजाद होने के बाद कर्तव्य पर बल दिया गया होता।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: November 26, 2021 11:39 IST
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Image Source : INDIA TV Constitution Day: आज का दिवस बाबासाहेब अम्बेडकर को नमन करने का है- PM मोदी

Highlights

  • ज का दिवस इस सदन को प्रणाम करने का है।- नरेंद्र मोदी
  • आज 26/11 हमारे लिए एक ऐसा दुखद दिवस है। उन बलिदानियों को आदरपूर्वक नमन करता हूं।- नरेंद्र मोदी
  • भारतीय संविधान मात्र क़ानूनी मार्गदर्शन की व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक आर्थिक परिवर्तन का दस्तावेज भी है।- ओम

नई दिल्ली. देश में आज संविधान दिवस मनाया जा रहा है। संसद के सेंट्रल हाल में इस मौके पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। हालांकि कांग्रेस सहित कई दलों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया। इस कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिवस बाबासाहेब अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद जैसे दुरंदेशी महानुभावों का नमन करने का है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिवस इस सदन को प्रणाम करने का है। आज पूज्य बापू को भी नमन करना है। आजादी के आंदोलन में जिन-जिन लोगों ने बलिदान दिया, उन सबको भी नमन करने का है। आज 26/11 हमारे लिए एक ऐसा दुखद दिवस है, जब देश के दुश्मनों ने देश के भीतर आकर मुंबई में आतंकवादी घटना को अंजाम दिया। देश के वीर जवानों ने आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। आज उन बलिदानियों को भी नमन करता हूं।

उन्होंने कहा कि हमारा संविधान ये सिर्फ अनेक धाराओं का संग्रह नहीं है, हमारा संविधान सहस्त्रों वर्ष की महान परंपरा, अखंड धारा उस धारा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। इस संविधान दिवस को इसलिए भी मनाना चाहिए, क्योंकि हमारा जो रास्ता है, वह सही है या नहीं है, इसका मूल्यांकन करने के लिए मनाना चाहिए। बाबासाहेब अम्बेडकर की 125वीं जयंती थी, हम सबको लगा इससे बड़ा पवित्र अवसर क्या हो सकता है कि बाबासाहेब अम्बेडकर ने जो इस देश को जो नजराना दिया है, उसको हम हमेशा एक स्मृति ग्रंथ के रूप में याद करते रहें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि भारत एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा है, जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय है, लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय है और वो है पारिवारिक पार्टियां। योग्यता के आधार पर एक परिवार से एक से अधिक लोग जाएं, इससे पार्टी परिवारवादी नहीं बन जाती है। लेकिन एक पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति में है। संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है, संविधान की एक-एक धारा को भी चोट पहुंची है, जब राजनीतिक दल अपने आप में अपना लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो देते हैं। जो दल स्वयं लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो चुके हों, वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं।

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