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Coronavirus: Curfew में हिंदू की अर्थी को मुस्लिम पड़ोसियों ने कंधा दिया

 Written By: Bhasha
 Published : Apr 13, 2020 06:48 pm IST,  Updated : Apr 13, 2020 07:18 pm IST

भट्टा बस्ती थानाधिकारी शिवनारायण ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कर्फ्यू के कारण सिर्फ पांच लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी गई। उन्होंने बताया कि पड़ोसी मुसलमानों ने अंतिम संस्कार का प्रबंध किया और राजेन्द्र के छोटे भाई ने मुखाग्नि दी।

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Curfew में हिंदू की अर्थी को मुस्लिम पड़ोसियों ने कंधा दिया Image Source : TWITTER

जयपुर. जयपुर के भट्टा बस्ती क्षेत्र में मुस्लिम समाज के लोगों ने हिंदू पड़ोसी की मृत्यु पर ना केवल उसकी अर्थी को कांधा दिया बल्कि हिंदू रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार कर मानवता और साम्प्रदायिक सौहार्द्र की एक मिसाल पेश की। बस्ती निवासी एक युवक की लंबी बीमारी के बाद रविवार रात को मृत्यु हो गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार भट्टा बस्ती के बजरंग नगर निवासी राजेन्द्र बागरी (35) कैंसर से पीड़ित था, कल रात उसकी मृत्यु हो गई।

जिस इलाके में राजेन्द्र रहता था वह मुस्लिम बाहुल्य है और भट्टा बस्ती में कर्फ्यू और लॉकडाउन के कारण घर में उसकी पत्नी, बच्चों और छोटे भाई के अलावा कोई सदस्य नहीं था। ऐसी स्थिति में पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम समाज के लोगों ने आगे आकर परिवार को संबल दिया और अंतिम संस्कार का प्रबंध करने का निर्णय किया। पड़ोसियों ने राजेन्द्र की अर्थी को हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार 'राम नाम सत्य है' बोलते हुए कुछ दूरी तक कांधा देकर उसे वैन में रखकर चांदपोल मोक्षगृह तक पहुंचाया और उसका अंतिम संस्कार करवाया।

भट्टा बस्ती थानाधिकारी शिवनारायण ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कर्फ्यू के कारण सिर्फ पांच लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी गई। उन्होंने बताया कि पड़ोसी मुसलमानों ने अंतिम संस्कार का प्रबंध किया और राजेन्द्र के छोटे भाई ने मुखाग्नि दी। सोशल मीडिया में चल रहे दो वीडियो में मुस्लिम समाज के लोग अर्थी को कांधा देकर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। राजेन्द्र के मुसलमान पड़ोसी पप्पू ने बताया, ‘‘राजेन्द्र को कैंसर था। वह काफी समय से बीमार था। कल रात उसकी मृत्यु हो गई। चूंकि यहां उसके कोई रिश्तेदार नहीं थे इसलिये हमने उसके अंतिम संस्कार का प्रबंध करने का निर्णय लिया। यह सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों को एक बड़ा संदेश है कि ऐसे लोग भी हैं जिनके लिए मानवता किसी भी जाति या धर्म से बड़ी है।’’ 

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