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Apsara Rambha Story: तीनों लोकों की सबसे सुंदर अप्सरा, हजारों साल तक पत्थर की बनी रहीं, आज भी इनके नाम पर रखा जाता है यह खास व्रत!

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Apr 20, 2026 10:21 am IST,  Updated : Apr 20, 2026 10:28 am IST

Apsara Rambha Story: पौराणिक कथाओं में रंभा को स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सराओं में से एक माना जाता है। जिनकी खूबसूरती तीनों लोक में प्रसिद्ध थी। लेकिन इसी सुंदरता के कारण उन्हें एक ऐसा श्राप मिला जिसके कारण ये हजारों सालों तक पत्थर की बनी रहीं।

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तीनों लोकों की सबसे सुंदर अप्सरा Image Source : PINTEREST.COM

Apsara Rambha Story: कहते हैं रंभा की सुंदरता इतनी अद्वितीय थी कि देवराज इंद्र ने उन्हें 'अप्सराओं की रानी' का पद दिया था। मान्यताओं के अनुसार रंभा का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था तो वहीं कुछ कथाओं अनुसार उनके पिता कश्यप ऋषि थे और माता का नाम प्रधा था। वहीं कुछ जगहों पर रंभा का जिक्र नलकुबेर की पत्नी के रूप में भी हुआ है। कहा जाता है कि ऋषि विश्वामित्र ने रंभा को पत्थर बनने का श्राप दिया था। जानिए किस गलती के कारण रंभा को मिला थे इतना भयंकर श्राप।

जब रंभा बन गईं पत्थर की मूरत

एक पौराणिक कथा अनुसार एक बार देवराज इंद्र ने ऋषि विश्वामित्र की घोर तपस्या को भंग करने के लिए रंभा को पृथ्वी पर भेजा था। रंभा ने अपनी खूबसूरती से ऋषि को विचलित करने की कोशिश की, लेकिन वे इस कार्य में सफल न हो सकीं। ऋषि विश्वामित्र को पहले ही इस चीज का आभास हो गया था कि ये सब उनकी तपस्या भंग करने के लिए किया जा रहा है, इसलिए वे अत्यंत क्रोधित हो गए।

क्रोध में आकर ऋषि विश्वामित्र ने रंभा को श्राप दिया: हे अप्सरा! तूने मेरी तपस्या भंग करने का प्रयास किया है, इसलिए तू हजारों वर्षों तक पत्थर की शिला बनकर पृथ्वी पर रहेगी। रंभा को अपनी गलती का अहसास हुआ और वो क्षमा याचना करने लगीं। ये देखकर विश्वामित्र का दिल पिघल गया और उन्होंने कहा कि जब एक परम तपस्वी ब्राह्मण तुम्हें मुक्ति दिलाएंगे, तब तुम फिर से अपने वास्तविक स्वरूप में लौट आओगी। कहते हैं कई हजारों साल तक पत्थर की मूरत बने रहने के बाद रंभा को इस श्राप से मुक्ति मिली। रामायण की एक कथा के अनुसार एक ब्राह्मण द्वारा रंभा को इस श्राप से मुक्ति मिली थी। लेकिन स्कन्द पुराण के अनुसार श्वेतमुनि ने उन्हें इस श्राप से मुक्ति दिलाई थी।

हर साल मनाई जाती है रंभा तीज

क्या आप जानते हैं कि रंभा के नाम से एक तीज भी मनाई जाती है। ये तीज ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर रंभा की विधि विधान पूजा करती हैं। साथ ही विवाहित महिलाएं गेहूं, अनाज और फूल के साथ चूड़ियों के जोड़े की भी पूजा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से महिलाओं को सुंदरता और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। बता दें इस साल ये व्रत 17 जून 2026 को रखा जाएगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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