मुंबई: एक असाधारण फैसले में बंबई उच्च न्यायालय ने 30 वर्षीय आरोपी द्वारा 23 साल की पीडि़त और अब सात महीने की गर्भवती महिला को दस लाख रूपये देने के बाद बलात्कार का एक मामला निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि महिला की रजामंदी से विशेष परिस्थितियों में में ऐसा किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति अभय ओका की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, हम विशेष परिस्थितियों में शिकायत निरस्त कर रहे हैं क्योकि पीड़ित ने इसकी रजामंदी दी है और आरोपी ने उसके भविष्य तथा अजन्मे बच्चे के लिए दस लाख रूपये जमा कराए हैं। न्यायाधीशों ने कल अपने आदेश में कहा, रिकार्ड में खुलासा हुआ है कि दोनों के बीच आपसी रजामंदी से संबंध थे। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि पुणे के आरोपी द्वारा दिये गये धन को दस साल के लिए एक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा कराया जाए।
न्यायाधीशों ने कहा कि शिकायतकर्ता धन पर प्राप्त ब्याज पाने की हकदार होगी और समयावधि पूरी होने पर वह राशि निकालने के योग्य होगी। शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि उसे शिकायत निरस्त किये जाने पर कोई आपत्ति नहीं है और वह मामला निपटाना चाहती है जबकि आरोपी ने उसके लाभ तथा अजन्मे बच्चे के लिए दस लाख रूपये जमा करने पर सहमति जताई।