भोपाल: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर गुरुवार (पांच मई) को आयोजित 'जल सत्याग्रह' में मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेंगे। 'नदी पुनर्जीवन विधेयक' पारित करने की मांग को लेकर जल-जन जोड़ो अभियान के आह्वान पर आयोजित इस जल सत्याग्रह को देश भर के 130 संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह की ओर से बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि "देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सूखा और पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हुई है। इस स्थिति में नदियों को पुनर्जीवित किया जाना आवश्यक हो गया है। इसी मकसद से जल पुरुष राजेंद्र सिंह और एकता परिषद के संस्थापक पी. वी. राजगोपाल के नेतृत्व में गुरुवार को जंतर मंतर पर जल सत्याग्रह किया जाएगा।"
बयान के अनुसार, जल सत्याग्रह में देश भर से 130 संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस सत्याग्रह में उन सभी इलाकों के लोग हिस्सा लेंगे, जो सूखे और पानी के संकट से जूझ रहे हैं। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड, बघेलखंड सहित अन्य स्थानों के प्रतिनिधि भी दिल्ली के लिए कूच कर गए हैं।
बयान में कहा गया है, "18 अप्रैल, 2016 को गांधी के सत्याग्रह की भूमि चम्पारण से राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रकृति एवं पर्यावरण प्रेमियों ने जल सत्याग्रह आरम्भ किया। इस जल सत्याग्रह के तहत बिहार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, लातूर, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बुन्देलखंड की यात्रा की गई।
यात्रा के दौरान जो तस्वीर सामने आई वह चौंकाने वाली है। पानी के अभाव में गांव के गांव उजड़ गए हैं। खेत वीरान पड़े हैं। इंसान और जानवर दोनों को पानी नसीब नहीं हो रहा है।"बयान में केन्द्र एवं राज्य सरकारों से भू-गर्भीय जल के नियंत्रण और संरक्षण के लिए कानून लागू करने की मांग की गई है, ताकि पेयजल हेतु जल संरचनाओं में पानी उपलब्ध रहे।
बयान में कहा गया है कि गंदे पानी के साथ साफ पानी को न मिलाया जाए, नदी-नालों का प्रवाह अलग-अलग सुनिश्चित किया जाए, और इसके लिए भारत सरकार का नदी पुनर्जीवन मंत्रालय तत्काल प्रभाव से कानून बनाए और नदी पुनर्जीवन कार्य को प्रभावी बनाए।
बयान में सरकारों से यह सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है कि प्रत्येक नदी में निर्मल व अविरल सतत प्रवाह बना रहे।