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  5. कब लॉन्च होगा चंद्रयान-3? कौन हैं गगनयान के यात्री? चांद तक पहुंचने में कितना खर्च? जानें, हर सवाल का जवाब

अगले साल तक लॉन्च होगा चंद्रयान-3, गगनयान के लिए चुने गए 4 अंतरिक्ष यात्री: ISRO

इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा है कि तीसरे चंद्रयान मिशन को सरकार की मंजूरी मिल गई है और इससे संबंधित सभी गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: January 02, 2020 8:56 IST
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2020 will be year of Chandrayaan-3 and Gaganyaan, says ISRO chief K Sivan | PTI

बेंगलुरु: ISRO ने बुधवार को ऐलान किया कि चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग अगले साल हो सकती है। साथ ही, महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम के लिए भी भारतीय वायुसेना से 4 अंतरिक्ष यात्रियों को चयनित किया गया है और जल्द ही रूस में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी। हालांकि, एक दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि भारत 2020 में चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण करेगा। इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा है कि तीसरे चंद्रयान मिशन को सरकार की मंजूरी मिल गई है और इससे संबंधित सभी गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं। 

‘चंद्रयान-3 मिशन पर खर्च होंगे 250 करोड़ रुपये’

सिवन ने कहा कि इसमें पहले की तरह लैंडर, रोवर और एक ‘प्रोपल्शन मॉड्यूल’ होगा। सिवन ने कहा कि चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण अगले साल तक जा सकता है। इसरो चीफ ने कहा कि चंद्रयान-3 और मिशन गगनयान, दोनों का काम एक साथ चल रहा है। गगनयान मानव को अंतरिक्ष में ले जाने का भारत का पहला अभियान है। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल 7 साल होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तीसरे चंद्र मिशन के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। चंद्रयान-3 परियोजना की लागत पर सिवन ने कहा, ‘इस मिशन पर 250 करोड़ रुपये का खर्च होगा।’ 

‘2020 के लिए है 25 मिशन की प्लानिंग’
तमिलनाडु के तूतिकोरीन में प्रक्षेपण स्थल के बारे में सिवन ने कहा कि श्री हरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के स्पेस पोर्ट के अलावा दूसरे प्रक्षेपण स्थल के वास्ते तूतिकोरीन जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गयी है। स्थान के चयन के संबंध में उन्होंने कहा कि दक्षिण की ओर प्रक्षेपण, खासकर एसएसएलवी (छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान) को इससे फायदा होगा। भविष्य के अभियानों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 2020 के लिए 25 मिशन की योजना है। सिवन ने कहा, ‘2019 में जिस मिशन की योजना बनाई गई थी और उसे पूरा नहीं किया जा सका, उसे इस साल मार्च तक पूरा किया जाएगा।’ 

ISRO चीफ ने बताया, क्यों नहीं हुई विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग
विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग में क्या दिक्कत हुई? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह वेग में कमी से जुड़ी विफलता थी और यह आंतरिक कारणों से हुआ था। इसरो ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराने का प्रयास किया था। हालांकि, निर्धारित समय से कुछ क्षण पहले इसरो का विक्रम से संपर्क टूट गया था। चंद्रयान-2 मिशन चंद्रमा की सतह पर पहुंचने का भारत का पहला प्रयास था। इसरो प्रमुख ने चेन्नई के उस इंजीनियर की भी तारीफ की जिसने चंद्रमा पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का पता लगाया था। उन्होंने कहा कि यह अंतरिक्ष एजेंसी की नीति थी कि वह दुर्घटनाग्रस्त मॉड्यूल की तस्वीर जारी नहीं करेंगे। 

गगनयान के लिए चुने गए हैं 4 अंतरिक्ष यात्री
सिवन ने कहा कि महत्वाकांक्षी ‘गगनयान’ मिशन के लिए ऐस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग रूस में जनवरी के तीसरे हफ्ते से शुरू होगी। सिवन ने बताया कि इस मिशन के लिए 4 अंतरिक्षयात्रियों को चुना गया है। उन्होंने कहा, ‘हमने 2019 में गगनयान के संबंध में अच्छी प्रगति की। कई डिजाइन का काम पूरा हो गया और ऐस्ट्रोनॉट्स के चयन का काम हो चुका है। अब ट्रेनिंग के लिए चारों लोगों को चिन्हित किया जा चुका है।’ भारत ने गगनयान मिशन पर सहयोग के लिए रूस और फ्रांस के साथ समझौता किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन के दौरान महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की घोषणा की थी।

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