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गुजरात: प्रोफेसर का तुगलकी फरमान, कहा- पहले गर्भपात कराओ फिर कॉलेज आना

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 11, 2017 08:26 am IST,  Updated : May 11, 2017 08:26 am IST

यूनिवर्सिटी के मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर वैशाली आचार्य से छात्राएं इस कदर परेशान हो गई की उन्हें पुलिस की शरण लेनी पड़ी, वैशाली आचार्य पर काफी समय से छात्र छात्राओं के शोषण का आरोप लग रहा था।

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नई दिल्ली: गुजरात यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर द्वारा छात्रा को मानसिक तौर पर परेशान करने का चौकाने वाला मामला सामने आया है। यूनिवर्सिटी की महिला प्रोफेसर पर छात्रा को मानसिक तौर पर परेशान करने का आरोप लगा है। इस महिला प्रोफेसर ने एक गर्भवती छात्रा को पहले गर्भपात कराने फिर उसके बाद कॉलेज आने का फरमान सुनाया है। (ये भी पढ़ें: बंद होंगे 2000 के नोट, मोदी सरकार फिर करेगी नोटबंदी?)

इस महिला प्रोफेसर के तुगलकी फरमान से छात्रा इस कदर प्रताड़ित हुई कि उसने प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस कम्प्लेन करनी पड़ी। यूनिवर्सिटी के मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर वैशाली आचार्य से छात्राएं इस कदर परेशान हो गई की उन्हें पुलिस की शरण लेनी पड़ी, वैशाली आचार्य पर काफी समय से छात्र छात्राओं के शोषण का आरोप लग रहा था।

महिला प्रोफेसर छात्रों से टिफ़िन मगवाती थी, फिल्मों की टिकट मगवाती थी लेकिन हद तो तब हो गई जब उन्होंने एक गर्भवती छात्रा पर गर्भपात करवाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। चौथे सेमेस्टर की इस छात्रा को एक दिन उन्होंने अन्य छात्र-छात्राओं के सामने अल्टीमेटम दे दिया की अगर करियर बनाना है तो गर्भपात करवाना ही पड़ेगा।

 
महिला प्रोफेसर की इस धमकी से छात्रा परेशान हो उठी और उसने डिपार्टमेंट के हेड से शिकायत की लेकिन उसके बाद तो गर्भवती छात्रा की मुसीबते और बढ़ गई, वैशाली आचार्य ने अगले दिन सरेआम छात्राओं के सामने कह दिया कि शिकायत से उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। इसलिए वो जैसा चाहती हैं विद्यार्थी वैसा ही करे। अंत मे छात्रा ने पुलिस की शरण ली लेकिन उससे पहले प्रोफेसर वैशाली आचार्य ने हाई कोर्ट से 15 दिन का स्टे हासिल कर लिया।

वहीं वीसी के मुताबिक गर्भपात के लिए दबाव बनाने वाली प्रोफेसर को फिलहाल निलंबित कर दिया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कर रहे हैं। प्रोफेसर वैशाली आचार्य और डिपार्टमेंट हेड पि पि प्रजापति दोनों ही सोशल वेलफेयर के नहीं बल्कि इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर है, इन सबके अलावा इन दोनों पर सरकारी फंड के दुरूपयोग के भी आरोप लगते रहे हैं।

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