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गुलबर्ग दंगा मामले में 24 आरोपी दोषी करार, 36 बरी

 Written By: Nirnaya Kapoor
 Published : Jun 02, 2016 12:06 pm IST,  Updated : Jun 02, 2016 12:06 pm IST

साल 2002 के गोधरा कांड के बाद गुलबर्ग सोसाइटी में हुए दंगों के मामले में स्पेशल एसआईटी कोर्ट ने फैसला करते हुये 23 लोगों को दोषी करार दिया और 36 लोगों को बरी कर दिया है।

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नई दिल्ली: साल 2002 के गोधरा कांड के बाद गुलबर्ग सोसाइटी में हुए दंगों के मामले में स्पेशल एसआईटी कोर्ट ने फैसला करते हुये 23 लोगों को दोषी करार दिया और 36 लोगों को बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि साजिश के तहत ये घटनाक्रम नहीं हुआ था। 24 में से 11 लोगों को मर्डर के चार्जेस के तहत दोषी ठहराया गया है। 13 को कम आरोपों मे दोषी करार ठहराया गया है। 6 जून को दोषियों की सजा का ऐलान होगा।

इस मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे। 39 लोगों के शव बरामद हुए थे और 30 लापता लोगों को सात साल बाद मृत मान लिया गया था।

एसआईटी ने इस मामले की जांच करते हुए 73 लोगों को गिरफ्तार किया था इन 73 लोगों पर साजिश के तहत हत्या करने का मामला दर्ज किया गया था। अब तक 73 लोगों में 4 की मौत हो चुकी है जबकि कुछ लोग हमले के वक्त नाबालिग थे। अगर ऐसे लोगों को हटा दिया जाए तो 60 आरोपियों पर फैसला आना है। कुल आरोपियों में से 9 आरोपी पिछले 14 साल से सलाखों के पीछे हैं जबकि बाकी जमानत पर रिहा हैं।

इस मामले में अबतक 73 आरोपियों पर अलग-अलग समय पर 11 चार्जशीट दायर की गई है, जबकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान 338 गवाहों ने गवाही दी है। कोर्ट ने पिछले साल ही इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था।  लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते फैसला सुनाया नहीं जा सका। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल फरवरी महीने में इस मामले पर फैसले पर लगाई रोक हटा ली थी।

इस मामले की सुनवाई 2009 में शुरू हुई थी। कुल 66 आरोपी थे, जिनमें चार की मौत हो चुकी है। 9 अब भी जेल में हैं। कुल 338 लोगों की गवाही हुई है। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में 2010 में पूछताछ हुई थी। एसआईटी रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। 15 सितंबर 2015 को सुनवाई ख़त्म हो गई थी। पीड़ित परिवार आरोपियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग कर रहा है।

पिछले हफ्ते अदालत ने नारायण टांक और बाबू राठौड़ नाम के दो आरोपियों की ओर से दायर वह अर्जी खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए नार्को अनालिसिस और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की गुहार लगाई थी। अदालत ने कहा कि अब जब फैसला आने वाला है तो इसकी जरूरत नहीं है।

बता दें कि गुलबर्ग सोसाइटी मामला 2002 के गुजरात दंगों के उन नौ मामलों में से एक है जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित एसआईटी कर रही है।

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