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ट्रिपल तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु, 6 दिन में होगा फ़ैसला

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 11, 2017 12:01 pm IST,  Updated : May 11, 2017 12:03 pm IST

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अलग अलग धर्मों के पांच जजों की पीठ ने ट्रिपल तलाक़ पर सुनवाई शुरु कर दी। सुनवाई छह दिन तक चलेगी। चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जगदीश सिंह खेहर ने कहा है कि इस मामले पर छह दिन सुनवाई के बाद फ़ैसला सुनाया जाएगा।

Triple Talaq- India TV Hindi
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गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अलग अलग धर्मों के पांच जजों की पीठ ने ट्रिपल तलाक़ पर सुनवाई शुरु कर दी। सुनवाई छह दिन तक चलेगी। चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया  जगदीश सिंह खेहर ने कहा है कि इस मामले पर छह दिन सुनवाई के बाद फ़ैसला सुनाया जाएगा। सुनवाई का आज पहला दिन है।

खेहर ने स्पष्ट किया है: ''हम बहुविवाह के मसले पर कोई विचार नहीं करेंगे क्योंकि इसका ट्रिपल तलाक़ और हलाला से कोई संबंध नहीं है। अगर ट्रिपल तलाक़ वैध नहीं पाया गया तो तलाक़ को असंवैधानिक माना जाएगा। कोर्ट ये भी देखेगा कि ट्रिपल तलाक़ इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है अथवा नही. अगर ये अभिन्न हिस्सा है तो तोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।

जिस प्रमुख याचिका पर सुनवाई हो रही है उसका टाइटल है “समानता की खोज बनाम जमियत उलेमा-ए-हिंद।”

पांच जजों की पीठ में खेहर (सिख) के अलावा जस्टिस कूरियन जोसेफ (ईसाई), आरएफ़ नरिमन (पारसी), यूयू ललित (हिंदू) और अब्दुल नज़ीर (मुस्लिम) हैं। 

सुनवाई के दौरान 'ट्रिपल तलाक़, निकाह हलाला और बहुविवाह' की संवैधानिक और क़ानूनी वैधता को चुनौती दी जाएगी। मुस्लिम महिलाओं ने अलग से पांच याचिकाएं दायर की हैं जिसमें ट्रिपल तलाक़ को असंवैधानिक बताया गया है। 

ये सुनवाई इसलिये भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि कोर्ट ने ग्रीष्म अवकाश के दौरान सुनवाई करने का फ़ैसला किया है और कहा है कि वह इस नाजुक मसले पर जल्द से जल्द कोई फ़ैसला करने के लिए सप्ताहंत (शनिवार, इतवार) को भी सुनवाई कर सकता है। 

सुनवाई के दौरान ऑटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पीठ की सहायता करेंगे। पीठ ये भी तय करेगी कि अगर मु्स्लिम पर्सनल लॉ से संविधान में मिले नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का हनन होता है तो कोर्ट कहां तक इसमें (मु्स्लिम पर्सनल लॉ) हस्तक्षेप कर सकता है। 

आपको बता दें कि हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ट्रिपल तलाक़ को एक तरफ़ा और क़ानून की नज़र में बुरा बताया था। कोर्ट ने ये बात अक़ील जमील द्वारा दायर याचिका पर फ़ैसला सुनाते समय कही थी। जमील की पत्नी ने अपने पति के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया था जिसमें कहा गया था कि उन्होंने (पति) दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया और दहेज़ न मिलने पर तलाक़ दे दिया।

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