नई दिल्ली: पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा फांसी की सजा पाए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने अपना फैसला सुनाते हुए जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है। इंटरनेशनल कोर्ट ने कहा है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक पाकिस्तान यह सुनिश्चित करे कि जाधव को फांसी नहीं होगी। अंतर्राष्ट्रीय अदालत के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम ने कोर्ट का फैसला सुनाते हुए ये बातें कहीं:
- आखिरी फैसले तक पाकिस्तान जाधव के खिलाफ कोई और कार्रवाई न करे: ICJ जज
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पाकिस्तान यह सुनिश्चित करे कि कार्रवाई पूरी होने तक जाधव को फांसी न हो: ICJ जज
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पाकिस्तान कोई भी कदम उठाने से पहले ICJ को जरूर सूचित करे: ICJ जज
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आखिरी फैसले तक कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाकिस्तान दुर्भावना युक्त कोई भी कदम न उठाए: ICJ जज
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जब तक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अपना आखिरी फैसला नहीं दे देती तब तक जाधव की फांसी पर रोक रहेगी: ICJ
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इंटरनेशनल कोर्ट ने कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाई
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इंटरनेशनल कोर्ट को जाधव केस की सुनवाई करने का हक: जज
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जासूसी को वियना संधि से बाहर रखने का पाकिस्तान का दावा खारिज।
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जाधव मामले में पाक को ICJ में करारा झटका, आपत्ति खारिज।
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जाधव मामले में वियना कंवेंशन लागू होता है: ICJ
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भारत की मांग वियना संधि के तहत सही है। उसे अपने नागरिक की कानूनी मदद का अधिकार है: जज
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पाकिस्तान ने काउंसलर एक्सेस ना देकर गलती की: जज
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वियना संधि के तहत जाधव को काउंसलर एक्सेस देना चाहिए था: जज
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भारत ने वियना संधि के तहत ही अपील की है: जज
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जज रॉनी अब्राहम ने भारत और पाकिस्तान को वियना संधि का हवाला दिया।
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भारत ने कई बार एक्सेस काउंसलर की मांग की: जज
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भारत को 25 मार्च को गिरफ्तारी के बारे में बताया गया: जज
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कुलभूषण को गिरफ्तार करना विवादित मामला था: जज
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जस्टिस रोनी अब्राहम सुना रहे हैं फैसला।
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कुलभूषण जाधव पर जज ने फैसला पढ़ना शुरू किया है।
46 वर्षीय पूर्व नौसेना अधिकारी जाधव को 3 मार्च 2016 को पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोपों में मौत की सजा सुनाई। जाधव के लिए राजनयिक पहुंच की मांग कर रहे भारत ने 16 बार दरख्वास्त ठुकराए जाने के बाद ICJ का रुख किया था। भारत ने जाधव मामले को 8 मई को इंटरनेशनल कोर्ट में रखा। नीदरलैंड्स के हेग में स्थित आईसीजे में मामले की सुनवाई बीते सोमवार को हुई थी। इसमें भारत और पाकिस्तान के वकीलों ने अपना पक्ष रखा था। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान वियना समझौते का उल्लंघन कर रहा है और जाधव को सबूतों के बिना दोषी करार दिया।
पाकिस्तान ने दी थी यह दलील
पाकिस्तान ने इंटरनेशनल कोर्ट में अपनी दलील में कहा था कि भारत को कुलभूषण जाधव के मामले को ICJ में लाने का हक नहीं है, क्योंकि वियना संधि जासूसों, आतंकियों और जासूसी से जुडे़ लोगों पर लागू नहीं होती। पाक की तरफ से पेश हुए वकील खवार कुरैशी ने यह भी कहा कि भारत ने जनवरी 2017 में पाकिस्तान के उस संदेश का कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें जाधव से संबंधित केस की जांच के लिए उसका सहयोग मांगा गया था। इसके बाद, कोर्ट ने ऐलान किया था कि इस मामले में तत्काल कदम उठाए जाने से जुड़े भारत के अनुरोध पर वह अपना फैसला गुरुवार को सुनाएगी।
हरीश साल्वे ने जोरदार तरीके से रखा था भारत का पक्ष
भारत के बेहतरीन वकीलों में से एक हरीश साल्वे ने जाधव की गिरफ्तारी, उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने तथा मामले की सुनवाई से संबंधित तमाम कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और वियना संधि का उल्लंघन करार दिया था। उन्होंने कहा कि कुलभूषण जाधव पर मनगढ़ंत आरोप लगाए गए और उन्हें अपना बचाव करने के लिए कानूनी सहायता मुहैया नहीं कराई गई। साल्वे ने अदालत से कहा कि 16 मार्च, 2016 को ईरान में जाधव को किडनैप किया गया और फिर पाकिस्तान लाकर कथित तौर पर भारतीय जासूस के तौर पर पेश किया गया। इसके बाद, सैन्य हिरासत में एक अफसर के सामने उनसे कबूलनामा लिया गया। साल्वे ने कहा कि जाधव को किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया और एकतरफा फैसला सुना दिया गया।
पाकिस्तान ने कहा था, ‘वन मैन डिमॉलिशन स्क्वॉड’ हैं जाधव
पाकिस्तान ने जाधव को 'वन मैन डिमॉलिशन स्क्वॉड' बताते हुए 10 अप्रैल 2017 को फांसी की सजा सुनाई थी। कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान ने तमाम फर्जी आरोप लगाए थे। पाकिस्तान ने कहा था कि जाधव ने ग्वादर, तुरबत में हुए हमलों को स्पॉन्सर किया और जिवानी बंदरगाह पर बोट और रेडार स्टेशन पर हमले किए। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया था कि जाधव ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी युवकों को भड़काने के लिए अलगाववादी और आतंकी तत्वों की वित्तीय सहायता दी। इसके अलावा जाधव पर बलूचिस्तान में तमाम जगहों पर धमाके कराने के झूठे आरोप लगाए गए।
पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने किया था खारिज
पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए भारत पहले ही साफ कर चुका है कि जाधव भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी हैं, लेकिन उनके साथ भारत सरकार का कोई संबंध नहीं है। भारत ने यह भी कहा कि कुलभूषण जाधव जासूस नहीं हैं। भारत ने कहा था कि जाधव अपने कारोबार के सिलसिले में बलूचिस्तान गए थे, इसी दौरान 3 मार्च 2016 को पाकिस्तान ने उन्हें ईरान से अगवा कर लिया और अपने देश में लाकर उनके ऊपर झूठे आरोपों में मुकदमा चलाया।
18 साल बाद ICJ में आमने-सामने हैं भारत और पाकिस्तान
दोनों पड़ोसी देश इससे पहले 18 साल पूर्व आईसीजे में आमने-सामने थे जब इस्लामाबाद ने उसके एक नौसैनिक विमान को मार गिराने को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत की मध्यस्थता की मांग की थी। विमान में सवार सभी 16 नौसैनिकों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का दावा था कि विमान को उसके वायुक्षेत्र में मार गिराया गया और उसने भारत से 6 करोड़ अमेरिकी डॉलर के मुआवजे की मांग की। अदालत की 16 जजों की पीठ ने 21 जून 2000 को 14-2 से पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था।