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‘जो अरबी खाते हैं, उनके गले में ही खुजली होती है’

 Written By: Bhasha
 Published : May 06, 2016 03:20 pm IST,  Updated : May 06, 2016 03:20 pm IST

विवादास्पद अगस्ता वेस्टलैंड सौदे को लेकर पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज कहा कि तत्कालीन कांग्रेस नीत सरकार ने अगस्तावेस्टलैंड को हेलीकाप्टर का ठेका देने के लिए हर तरह की रियायत दी और पूर्व वायु सेना प

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नयी दिल्ली: विवादास्पद अगस्ता वेस्टलैंड सौदे को लेकर पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज कहा कि तत्कालीन कांग्रेस नीत सरकार ने अगस्तावेस्टलैंड को हेलीकाप्टर का ठेका देने के लिए हर तरह की रियायत दी और पूर्व वायु सेना प्रमुख एस पी त्यागी, गौतम खेतान तो बहती गंगा में हाथ धोने वाले छोटे नाम है, हम बड़े नामों का पता लगा रहे हैं जिन्होंने रिश्वत ली। लोकसभा में अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर सौदा 2013 में कथित अनियमितताओं के बारे में कोर्ट ऑफ अपील मिलान, इटली द्वारा हाल ही में किए गए खुलासे के बारे में रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा जांच उन पर केन्दि्रत होगी जिनका नाम इटली की अदालत के फैसले में आया है। पर्रिकर ने कहा कि शर्तो में हेलीकाप्टर के केबिन की उंचाई 1.8 मीटर करने की शर्त अनिवार्य रूप से डाली गई और यह जानबूझकर किसी कंपनी को बाहर करने के उद्देश्य से किया गया। इस शर्त के कारण वेंडर आधार सिकुड़ गया।

इसके साथ ही अगस्तावेस्टलैंड हेलीकाप्टर दो मानदंडों को पूरा नहीं किया, फिर भी विशेष तौर पर उसे छूट दी गई। निविदा दस्तावेज एक कंपनी को दिये गये, जबकि निविदा दस्तावेज दूसरी कंपनी ने भरे। तब की सरकार ने भ्रष्टाचार का मामला आने के बाद कंपनी को लिखने की बजाए उच्चायोग से सम्पर्क किया। उन्होंने कहा कि इस सौदे में 50.7 मिलियन यूरो की बैंक गारंटी की राशि अभी भी अटकी पड़ी हुई है। कांग्रेस एवं गांधी परिवार पर परोक्ष निशाना साधते हुए पर्रिकर ने कहा, हमने पहले ही कदम उठाया है। अभी जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे छोटे लोग है। त्यागी, खेतान ने तो बहती गंगा में हाथ धो लिया। हम यह पता लगा रहे हैं कि गंगा कहां जाती है।

कांग्रेस सदस्यों के विरोध के बीच अपना प्रहार जारी रखते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, मैंने किसी के उपर कोई आरोप नहीं लगाए। किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन जो अरबी खाते हैं, उनके गले में ही खुजली होती है। इन्हें :कांग्रेस: पता है कि गंगा कहां बह कर जाती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर फिनमैकेनिका के सीईओ को गिरफ्तार नहीं किया जाता तब तत्कालीन संप्रग सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है। इस बारे में तत्कालीन सरकार ने जो कार्रवाई की, वह परिस्थिति के कारण मजबूरी में की गई कार्रवाई थी।

पर्रिकर ने कहा कि इससे भी आश्चर्यजनक बात यह है कि अनुबंध को होल्ड पर रखने का आदेश 12 मई 2014 को आया जब लोकसभा चुनाव का अंतिम दौर चल रहा था क्योंकि उन्हें परिणाम का अंदाजा हो गया था और एक्जिट पोल भी आने लगे थे। राज्यसभा में बयान पढ़ने के लिए सदस्यों की आलोचना झेलने वाले पर्रिकर ने आज निचले सदन में स्वाभाविक रूप से सिलसिलेवार ढंग से बात रखी। बारह वीवीआईपी हेलीकाप्टरों के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि संप्रग ने अगस्ता वेस्टलैंड के हेलीकाप्टरों को खरीदने के लिए लगातार रियायत दी। उन्होंने कहा कि इटली में नवंबर 2011 में आपराधिक मामला दर्ज किया गया लेकिन तत्कालीन संप्रग सरकार ने हेलीकाप्टर खरीदना जारी रखा और इनमें से तीन हेलीकाप्टरों की आपूर्ति भी कर दी गई।

रक्षा मंत्री ने इस मामले का तिथिवार ब्यौरा देते हुए कहा कि सीबीआई ने 12 मार्च 2013 को एक मामला दर्ज किया था किन्तु उसने नौ माह तक प्राथमिकी की प्रति को प्रवर्तन निदेशालय को नहीं दिया। उसके बाद ईडी ने जुलाई तक प्राथमिकी पर कोई कार्रवाई नहीं की। जांच जारी होने की ओर ध्यान दिलाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, हमारी सरकार ने कंपनी को कालीसूची में डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि जांच उन लोगों की भूमिका पर केन्दि्रत होगी जिनका नाम इटली की अदालत के फैसले में आया है। सीबीआई जांच कर रही है और वह फिलहाल रिश्वत का धन कहां कहां गया इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है। रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय संप्रग ने विदेश मंत्रालय, दूतावास एवं अदालत को लिखा। उन्होंने कहा कि सौदे को होल्ड करने में करीब दो वर्ष लग गये वास्तव में पहले तीन वायुयानों की आपूर्ति को टाला जा सकता था।

पर्रिकर ने आरोप लगाया कि हेलीकाप्टरों को बढ़े हुए मूल्यों पर लाया गया तथा मूल्य सौदेबाजी के लिए कोई वास्तविक आधार नहीं मुहैया कराया गया उन्होंने आरोप लगाया कि आफसेट्स के लिए चयनित कंपनियों में से एक आईडीएस इंफोटेक का इस्तेमाल रिश्वत का धन देने के लिए माध्यम के तौर पर किया गया। पर्रिकर ने कहा कि मिलान अपील अदालत के फैसले पर गौर करने के बाद रक्षा मंत्रालय ने ईडी एवं सीबीआई दोनों को लिखा है कि वे फैसले की विषय सामग्री पर ध्यान दें तथा जांच को तेजी से संपन्न करें।

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