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इरोम शर्मिला खत्म करेंगी अनशन, लड़ेंगी मणिपुर विधानसभा का चुनाव

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 26, 2016 04:31 pm IST,  Updated : Jul 26, 2016 05:06 pm IST

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफ्सपा) को हटाने की मांग को लेकर 16 साल से अनशन कर रहीं मणिपुर की आयरन लेडी इरोम शर्मिला ने मंगलवार को घोषणा की कि वह नौ अगस्त को अपना अनशन समाप्त कर देंगी और राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी।

Irom Sharmila- India TV Hindi
Irom Sharmila Image Source : PTI

इंफाल: सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफ्सपा) को हटाने की मांग को लेकर 16 साल से अनशन कर रहीं मणिपुर की आयरन लेडी इरोम शर्मिला ने मंगलवार को घोषणा की कि वह नौ अगस्त को अपना अनशन समाप्त कर देंगी और राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी। यहां एक स्थानीय अदालत से बाहर आते हुए 44 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता ने मीडिया के समक्ष घोषणा की, मैं नौ अगस्त को अपना अनशन समाप्त कर दूंगी और चुनाव लड़ूंगी।

उन्होंने कहा कि अब उन्हें नहीं लगता कि उनके अनशन से कठोर आफ्सपा हट पाएगा, लेकिन वह लड़ाई जारी रखेंगी।

आफस्पा कानून संक्षिप्त में समझिए:

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून यानी अफ्सपा साल 1958 में संसद ने पारित किया था और तब से ही यह कानून के रूप में काम कर रहा है। इसे शुरु में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में लागू किया गया था। जम्मू और कश्मीर में यह कानून साल 1990 से लागू है। राज्य में तेजी से बढ़ रही आतंकी घटनाओं के मद्देनजर इस कानून को यहां पर लागू किया गया। हालांकि लेह और लद्दाख के इलाके इस कानून के दायरे में नहीं आते हैं।

क्यों है कानून का विरोध:

  • इस कानून के जरिए सेना का जवान किसी भी व्‍यक्ति को बिना कोई वारंट के तशाली या गिरफ्तार कर सकता है। इतना ही नहीं सेना का जवान उसे जबरन गिरफ्तार भी कर सकता है।
  • इस कानून के तहत सेना का जवान संदेह के आधार पर भी किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है। संदेह के आधार पर ही सेना का जवान किसी व्यक्ति के घर में जबरन घुस सकता है।
  • इतना ही नहीं सेना का जवान कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर गोली भी चला सकता है और इस दौरान अगर उस व्यक्ति की मौत हो जाती है तो इस घटना की जवाबदेही फायरिंग करने या फायरिंग का आदेश देने वाले किसी भी अधिकारी पर नहीं होगी।
  • संवेदनशील क्षेत्रों में लागू किए जाने वाले इस कानून की धारा 3,4,6 और 7 को लेकर विवाद है। धारा 3 के तहत केंद्र सरकार किसी भी क्षेत्र को डिस्टबर्ड एरिया घोषित कर सकती है। धारा 4 के तहत सेना का जवान बिना वारंट किसी को भी गिरफ्तार कर सकता है। धारा 6 के तहत सेना का जवान संदिग्ध व्यक्ति की संपत्ति जब्त कर सकता है और उसे गिरफ्तार कर सकता है। धारा 7 के तहत सेना का जवान अगर किसी को गिरफ्तार करता है या फिर गोली मार देता है तो उसके खिलाफ कोई अलील, दलील और वकील काम नहीं आएगा। ऐसे मामले में कार्यवाही का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास ही होता है।  
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