नई दिल्ली: देश के सुदूरतम हिस्सों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए 25 साल पहले लकड़ी के तीन डिब्बों के साथ शुरू की गयी दुनिया की पहली अस्पताल ट्रेन जीवन रेखा एक्सप्रेस में अब इस्पात के सात डिब्बे हैं और इनमें दो तो आज ही जोड़े गए।
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इन दो डिब्बों का रेल मंत्री सुरेश प्रभु और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने उद्घाटन किया। एक डिब्बा कैंसर निदानकारी डिब्बा होगा जबकि दूसरा परिवार स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित है।
इंपैक्ट इंडिया फाउंडेशन की पहल पर लाईफलाइन एक्सप्रेस ने साल 1991 में अपनी शुरूआत से लेकर अबतक देश के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब दस लाख गरीबों का मुफ्त इलाज किया है। इसमें दुनियाभर से करीब दो लाख मेडिकल पेशेवरों ने अपनी सेवाएं प्रदान की।
इपैक्ट इंडिया के न्यासी समीर शाह ने इसके संस्थापक जेल्मा लाजारूस की भावनाओं के अनुरूप विचार व्यक्त करते हुए कहा, यदि मरीज अस्पताल नहीं पहुंच सकते तो हम अस्पताल मरीजों तक पहुंचा सकते हैं। अक्सर ग्रामीण जिले में बड़े अस्पतालों में भी या तो ऑपरेशन थियेटर नहीं होते या फिर प्रशिक्षित सर्जन नहीं होते। हमारी ट्रेन इस अंतर को पाटती है।
लाईफलाइन एक्सप्रेस के सात डिब्बों में ऑपरेशन थियेटर, पैथोलोजी लैब, मेमोग्राफी इकाई (एक्सरे से स्तनकैंसर की पहचान), गायनोकोलोजी एक्जामिनेशन रूम, डेंटल यूनिट:, फार्मेसी, कंसलटेशन क्यूबिक्ल्स, एक्स-रे आदि सुविधाएं हैं। ट्रेन में वाई फाई सुविधा भी है।
साल 1990 के दशक में यह ट्रेन केवल मोतियाबिंद और पोलियो के इलाज की सुविधा ही दिया करती थी, लेकिन वक्त गुजरने के साथ साथ यह प्लास्टिक सर्जरी, डेंटल सर्जरी, मिर्गी का इलाज, कैंसर का इलाज और ग्रामीण बच्चों के लिए स्कूल चिकित्सा शिक्षा जैसी सुविधाएं भी प्रदान करने लगी।