इंदौरः पिता ने अपनी बेटियों को बेटों की तरह पाला और हमेशा बेटों की तरह ही उनके साथ व्यवहार किया। पिता की अंतिम इच्छा थी कि जब भी इस दुनिया से विदा हो तो बेटियां ही उनका अंतिम संस्कार करें। बेटियों ने भी समाज के रीति रिवाजों के डर को छोड कर अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी की और उन्हें मुखाग्नि दी।
मामला इंदौर के रामबाग क्षेत्र का है। यहां रहने वाले रघुनाथ खातरकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में प्रभारी सहायक कुलसचिव थे। उनकी तीन बेटिया मीनल, मानसी और विशाखा थी। उन्होंने अपनी इन तीनों बेटियों की परवरिश लडकों की तरह की। 15 दिन पहले ओंकारेश्वर से लौटते समय रघुनाथ का एक्सीडेंट हो गया था, जिसके चलते एक पैर टूट गया था और कमर के पास की नस दब गई थी। रविवार को कमर का ऑपरेशन था। जब उन्हें ऑपरेशन के लिए ओटी ले जाया जा रहा था तभी हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।
उनके पारिवारिक मित्र महेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि खातरकर जी की अंतिम इच्छा थी कि जिन लडकियों को उन्होनें बेटों की तरह पाला है वे ही उनका अंतिम संस्कार करें। उनकी इस इच्छा को उनकी तीनों बेटियों ने पूरी करी। समाज के रीति रिवाजों को भुलाकर तीनों बेटियों ने सोमवार सुबह रामबाग मुक्तिधाम में अपने पिता को मुखाग्नि दी। यही नहीं उन्होनें पिता की अंतिम यात्रा में सम्मलित होकर उन्हें कन्धा भी दिया।