कोच्चि: दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा पर सोशल मीडिया पर हमलों के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि भारत 'असहिष्णुता' को बर्दाश्त नहीं कर सकता। यहां के.ए.राजामोनी मेमोरियल लेक्चर देने के दौरान उन्होंने कहा कि असहिष्णु भारतीयों के लिए भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा, "प्राचीन काल से ही भारत विचार, भाषण व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का केंद्र रहा है।" राष्ट्रपति ने कहा, "हमारे समाज की पहचान असमान विचारों तथा बहसों को लेकर रही है।" उन्होंने कहा, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे संविधान द्वारा दिए मौलिक अधिकारों में से एक हैं। वैध आलोचना व मतभेद की जगह होनी चाहिए।"
दिल्ली विश्वविद्यालय में हुई घटना पर उन्होंने दुख जताया। उन्होंने कहा कि छात्रों को बहस करना चाहिए न कि झड़प में उलझना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा, "उच्च शिक्षा के हमारे प्रमुख संस्थान वाहन रहे हैं, जिनपर सवार होकर भारत ने खुद को एक समझदार समाज में तब्दील किया है।"
प्रणब मुखर्जी की यह टिप्पणी पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में आरएसएस से संबद्ध एबीवीपी तथा वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के बीच हिंसक झड़प की घटना के मद्देनजर आई है।