नई दिल्ली: इशरत जहां मामले की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (SIT) के सदस्य रहे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सतीश वर्मा पर कथित अनियमितता और बगैर इजाजत के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का आरोप लगाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वर्मा 1986 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं जो फिलहाल शिलांग स्थित नार्थ ईस्टर्न इलेक्टि्रकल पावर कॉरपोरेशन (एनईईपीसीओ) में मुख्य सतर्कता अधिकारी के रूप में नियुक्त हैं।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक वर्मा के खिलाफ कार्रवाई एनईईपीसीओ ने की है जो उर्जा मंत्रालय के तहत आता है। आईपीएस अधिकारियों को नियंत्रित करने वाले प्राधिकार गृह मंत्रालय को इस बारे में सूचना दे दी गई है। सूत्रों ने बताया कि वर्मा पर ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने और बगैर इजाजत के यात्रा करने का आरोप है। उन्होंने बताया कि यह अखिल भारतीय सेवा के सेवा नियमों का उल्लंघन है।
संपर्क किए जाने पर वर्मा ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, मैं व्यस्त हूं और मैं कुछ टिप्पणी नहीं करना चाहता। सूत्रों के मुताबिक अधिकारी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर एक चार्ज मेमो दिया गया है। इशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच के लिए गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय एसआईटी का वर्मा हिस्सा थे। उन्होंने अन्य दो सदस्यों से अलग रूख अपनाया और उच्च न्यायालय में यह हलफनामा दाखिल किया कि मुठभेड़ में हुई हत्या योजनबद्ध रही होगी और इशरत के प्रतिबंधित लश्कर ए तैयबा का आतंकवादी होने पर भी संदेह जताया था।
हाल ही में जब हलफनामे में बदलाव को लेकर इशरत का मामला खबरों में आया तब वर्मा का मीडिया ने साक्षात्कार लिया जिसमें उन्होंने इस दावे से असहमति जताई कि मुंबई के पास मुंब्रा निवासी लड़की एक आतंकवादी थी। उन्होंने यह दावा भी किया कि मुठभेड़ योजनाबद्ध थी। बाद में वह उस सीबीआई टीम का हिस्सा थे जिसकी जांच के परिणामस्वरूप चार आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था जिनमें पीपी पांडे, डीजी वंजारा, जीएल सिंहल और राजींदर कुमार शामिल हैं।