नई दिल्ली: आप में से हर किसी ने बचपन में पार्ले-जी बिस्कुट एक बार जरूर खाया होगा। लेकिन आपको शायद इससे जुड़ी एक दिलचस्प बात नहीं पता होगी कि हर सेकेंड करीब 4.5 हजार लोग पार्ले-जी का पैकेट खरीदते हैं। पार्ले प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बनाया जाने वाला पार्ले-जी बिस्कुट भारत के सबसे लोकप्रिय बिस्कुटों में से एक हैं। पार्ले-जी सबसे पुराने ब्रांड नामों में से एक होने के साथ-साथ भारत में सर्वाधिक बिक्री वाला बिस्कुट ब्रांड भी है। दशकों तक मोम के कागज (वैक्स पेपर) से निर्मित सफेद और पीले रंग का लोकप्रिय रैपर इस उत्पाद की पहचान बना रहा जिस पर एक छोटी लड़की को दिखाया जाता है। कंपनी का नारा है, जी का मतलब जीनियस (प्रतिभाशाली) "पार्ले-जी" नाम को उपनगरीय रेल स्टेशन विले पार्ले से लिया गया है जो स्वयं पार्ले नामक पुराने गांव पर आधारित है।
शेयर के मामले में ब्रिटानिया से पीछे, लेकिन बिक्री में नंबर वन:
ऑल इंडिया नील्सन सर्वे रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार पार्ले प्रोडक्ट्स बिस्किट कंपनी शेयर के मामले में ब्रिटानिया से 0.5 फीसदी पीछे थी। इसके बावजूद सबसे ज्यादा बिक्री के मामले में पार्ले-जी नंबर वन पर है। इसके बाद ब्रिटानिया (17-18%) और आईटीसी के सनफीस्ट (8-9%) का का नंबर आता है। इस ब्रांड की अनुमानित कीमत 2,000 करोड़ रुपए से अधिक है और कंपनी के कुल कारोबार में इसका 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान है।
अंग्रेजों के समय अस्तित्व में आई थी कंपनी:
1929 में भारत जब ब्रिटिश शासन के अधीन था, पार्ले प्रोडक्ट्स नामक एक छोटी कंपनी अस्तित्व में आई। मुंबई के उपनगर विले पार्ले (पूर्व) में मिठाइयों तथा टॉफियों (जैसे कि मेलोडी, कच्चा मैंगो बाईट आदि) के उत्पादन के लिए एक छोटे कारखाने को स्थापित किया गया। एक दशक बाद वहां बिस्कुट का उत्पादन भी शुरू कर दिया गया। उसके बाद से बढ़कर यह भारत की सबसे बड़ी खाद्य उत्पाद कंपनियों से एक हो गई है।
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