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अमेरिका ने उत्तरी ईरान पर तेज किए हवाई हमले, जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर दागीं मिसाइलें

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 16, 2026 08:14 am IST,  Updated : Jul 16, 2026 08:14 am IST

अमेरिका ने उत्तरी ईरान में हवाई हमले तेज करते हुए कई सैन्य ठिकानों पर बमबारी की और एक व्यापारी जहाज को निशाना बनाया। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

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अमेरिका और ईरान में जंग का नया दौर जारी है। Image Source : INDIA TV

Highlights

  • अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं।
  • अमेरिका ने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे व्यापारी जहाज को निष्क्रिय किया।
  • दोनों देशों के लगातार हमलों से पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ा।

दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिका ने उत्तरी ईरान तक अपने हवाई हमलों का दायरा बढ़ा दिया। वहीं, अमेरिका ने ईरान पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक व्यापारी जहाज पर भी कार्रवाई करते हुए उसे निष्क्रिय कर दिया। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। जॉर्डन ने भी कहा कि उसने अपनी ओर बढ़ रही 3 ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।

'अमेरिकी हवाई हमले में 35 से ज्यादा लोग मरे'

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से जारी जवाबी हमलों और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर बढ़ते तनाव ने युद्ध रोकने के लिए हुए अंतरिम समझौते को लगभग खत्म कर दिया है। अब पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, हाल के अमेरिकी हवाई हमलों में अब तक 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपौर ने बताया कि यह मौजूदा संघर्ष में पहली बार जारी किया गया आधिकारिक कुल आंकड़ा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि मृतकों और घायलों में कितने आम नागरिक और कितने सैनिक शामिल हैं।

'ईरान में रातभर दर्जनों ठिकानों पर हमले किए'

ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका के एक हमले में सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया। इस हमले में कम से कम 7 सैनिकों की मौत हो गई, जिनमें प्रशिक्षु और नियमित सैनिक दोनों शामिल थे, जबकि कई अन्य जवान घायल हुए। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने रातभर दर्जनों ठिकानों पर हमले किए और दिन के उजाले में भी अभियान जारी रखा। इसके बाद देर रात तीसरे दौर के हमले भी शुरू किए गए, जिससे साफ संकेत मिला कि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की गति और बढ़ा दी है।

'जहाज ने चेतावनी को नजरअंदाज किया था'

सेंटकॉम के मुताबिक, कुराकाओ के झंडे वाला तेल टैंकर 'बेल्मा' खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहा था। जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने आदेश नहीं माना। इसके बाद अमेरिकी विमान ने हेलफायर मिसाइल से जहाज की चिमनी पर हमला कर उसे निष्क्रिय कर दिया। अमेरिकी सेना ने बताया कि 2 अन्य व्यापारिक जहाजों को भी चेतावनी दी गई थी, जिन्होंने निर्देश मानते हुए अपना रास्ता बदल लिया। अमेरिका ने ग्रेटर तुंब द्वीप पर भी हमला किया, जिसे होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। सेंटकॉम के मुताबिक, इस कार्रवाई में ईरान के रक्षा प्रतिष्ठानों और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया।

ईरान पर दोबारा नौसैनिक नाकेबंदी लागू

अमेरिका का कहना है कि जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब ईरान ने प्रभावी रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोक दी थी। इससे तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की वैश्विक कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई और ईरान को बातचीत में बड़ा दबाव बनाने का मौका मिला। बढ़ती महंगाई को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि नवंबर में कांग्रेस के चुनाव होने हैं। अमेरिका होर्मुज को पूरी तरह खोलने में सफल नहीं हो सका, जिसके बाद बुधवार को उसने ईरान पर दोबारा नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी

'बातचीत का मतलब सरेंडर नहीं होता'

ईरान की संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि यदि अमेरिका अंतरिम समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तो ईरान व्यापक सैन्य टकराव के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े 'ईरानी प्रबंधों' को भी शामिल किया गया था, लेकिन अब अमेरिका कानूनी और कूटनीतिक विकल्प खत्म होने के बाद उन्हें बलपूर्वक खत्म करने की कोशिश कर रहा है। गालिबफ ने यह भी कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता, बल्कि यह प्रतिरोध की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उनका यह बयान उन आलोचकों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है जो अमेरिका से बातचीत का विरोध कर रहे हैं। (AP से इनपुट्स के साथ)

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